Friday, July 3, 2015

सीसीआई ने 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ खारिज की शिकायत

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टाटा मोटर्स,  महिंद्रा और फोर्ड सहित 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ अनुचित कारोबारी तौर-तरीकों को लेकर की गई शिकायत को खारिज कर दिया है।

यह आरोप लगाया गया है कि ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स और अधिकृत डीलरों के बीच डीलरशिप समझौता पूरी तरह से एक तरफा और ऑटो कंपनियों के पक्ष में है। यह शिकायत महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, होंड सिएल कार्स इंडिया, फॉक्सवैगन इंडिया, जनरल मोटर्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, फोर्ड इंडिया, रेनो इंडिया और ह्यूडई मोटर इंडिया के खिलाफ दर्ज कराई गई है।

इसके अलावा अशोक लेलैंड, पियाजिओ व्हीकल, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा टू व्हीलर, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया और टीवीएस मोटर कंपनी भी उन कंपनियों मेें शामिल है जिनके खिलाफ शिकायत की गई है। सीसीआई ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के मानकों के उल्लंघन का पृथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है।

Wednesday, June 24, 2015

बेहतर उच्च शिक्षा के लिए हर साल 6.8 लाख छात्र जा रहे विदेश

अच्छी उच्च शिक्षा की सुविधाओं वाले संस्थानों की कमी और अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते हर साल 6.8 लाख छात्र विदेशी शिक्षा संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बात उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है।

एसोचैम की ओर से ‘स्किलिंग इंडिया : एंपावरिंग इडियन यूथ थ्रू वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि  छात्रों के विदेश जाने के चलते आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू उच्च संस्थानों को सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ रहा है। यह वह राशि है, जो विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्र वहां के संस्थानों को देते हैं।

बेहतर भविष्य और सुनहरे कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र सिंगापुर, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, स्वीडेन, आयरलैंड, नार्वे और कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह नई जगहों पर जाने में भी नहीं हिचक रहे हैं और ऐसा करने वाले छात्रों की तादात में इस साल 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल अमीर घरों के बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। आजकल मध्य वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने में पीछे नहीं हैं। इसके लिए वह अपनी जीवन भर की बचत की राशि भी खर्च कर दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश से 2.9 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। इस साल यह संख्या बढ़कर 6.8 लाख तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी वजह विदेशी संस्थानों में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होना और कैरियर में बेहतर संभावनाओं के द्वार खुलना है। इसके अलावा विदेशी जीवन शैली से प्रभावित होकर भी छात्र इन देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
एसोचैम के महा सचिव डीएस रावत का कहना है कि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान बहुत कम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में दाखिला पाने के प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा यह कंपटीशन भी छात्रों का पढ़ाई के लिए विदेश जाने की एक अहम वजह बन रहा है।

मोबाइल फोन कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

माइक्रोमैक्स ने इक्सिगो में किया निवेश

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

Tuesday, June 23, 2015

फेडरल बैंक ने लांच किया नया मोबाइल ऐप


फेडरल बैंक ने अपने मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन फेड मोबाइल का नया संस्करण लांच किया है। नए वर्जन में मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें ग्राहकों को कुछ नई सहूलियतें भी दी गई हैं।

नए ऐप को तेजी से लोकप्रिय बनाने के लिए बैंक ने ग्राहकों को इससे किए जाने वाले 100 रुपये या उससे अधिक के पहले ट्रांजेक्शन पर 50 रुपये का कैशबैक देने की भी घोषणा की है। यह ऑफर 31 जुलाई तक चलेगा। ऐप को बैंक की ई पासबुक सुविधा फेडबुक के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे ग्राहक अब मोबाइल के जरिए ही अपनी पासबुक देख सकेंगे।

ब्याज दर में कटौती से कारोबारी धारणा हुई मजबूत

 सूचीबद्ध कंपनियों के उत्पादन के स्तर, घरेलू और निर्यात ऑर्डर में इस महीने बड़े पैमाने पर सुधार दर्ज किया गया है। ड्यूटसे बोर्से का एमएनआई इंडिया बिजनेस सेंटीमेंट इंडीकेटर मई के 62.3 से 7.7 फीसदी तक बढ़ कर जून में 67.1 पर आ गया है। सर्वे में कहा गया है कि जून के कारोबारी सर्वे एक संकेत मिलता है कि कुल मिला कर धारणा में गिरावट अपने निचने स्तर से बाहर निकल चुकी है।

एमएनआई इंडीकेटर्स के चीफ इकनॉमिस्ट फिलिप उगलो ने कहा कि एक माह के आंकड़ो में बहुत कुछ निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं होगी लेकिन जून के सर्वे की चमक यह शुरुआती संकेत मुहैया कराती है कि धारणा में गिरावट का ट्रेड अब पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष सितंबर में धारणा में गिरावट अपने चरम पर थी।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि जून में ब्याज दरों में कटौती ने कारोबारी विश्वास बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके अलावा रुपये की कीमत में गिरावट ने निर्यात आर्डर के मोर्चे पर मदद की है। उगलो ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट से निर्यातकों को फायदा हुआ है और श्रमिकों की मांग वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। 2 जून को रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी। आरबीआई ने इस वर्ष तीसरी बार दरों में कटौती है। आरबीआई ने निवेश और ग्रोथ में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया था। साथ ही बैंक ने यह संकेत भी दिया था निकट भविष्य में अब और कटौती नहीं होगी।

Monday, June 22, 2015

केबल टीवी प्रसारण के क्षेत्र में रिलायंस जियो ने बढ़ाया कदम

मुकेश अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस इडस्ट्रीज समूह की कंपनी रिलायंस जियो को सरकार की तरफ से डिजिटल केबल टीवी के मल्टी सर्विस ऑपरेटर (एमएसओ) के रूप में काम करने के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन मिल गया है। इससे अब वह देश भर में एमएसओ के रूप में काम कर सकेगी। यह पंजीकरण सूचना व प्रसारण मंत्रालय की तरफ से दिया गया है। सरकार की तरफ से इस इजाजत के बाद रिलायंस जियो को अपनी मीडिया सामग्री को केबल ऑपरेटर्स या लोगों तक भेजने के लिए किसी ऑपरेटर का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। रिलायंस जियो जल्द ही देश भर में 4जी सेवा की भी शुरुआत करने जा रही है।

एमएसओ उस केबल ऑपरेटर को कहते है जो प्रसारणकर्ता से प्रोग्रामिंग सेवा प्राप्त करता है और उसे एक साथ कई जगहों पर प्रसारित करता है या एक या दो केबल ऑपरेटर को यह प्रसारण भेजता है। एमएसओ बनने की सरकार की इस अनुमति के बाद रिलायंस जियो हेथवे, सिटी केबल नेटवर्क, आईएमसीएल व डीईएन नेटवर्क को चुनौती देने लगेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज रिलायंस जियो को एक ऐसे ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश में लगी है जो एक साथ टेलीकॉम, हाई स्पीड डेटा, ई-कॉमर्स, मीडिया व भुगतान सेवा देने में सक्षम हो।

रिलायंस पहले ही नेटवर्क-18 मीडिया हाउस का अधिग्रहण कर चुकी है, जिसके पास 17 समाचार चैनल हैं और आठ भाषा में 14 मनोरंजन के चैनल है। वर्ष 2017-18 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिलायंस जियो को टीवी व मोबाइल सामग्री का एकीकृत सेट बनाने का लक्ष्य रखा है। 4जी सेवा की शुरुआत के बाद मोबाइल पर वीडियो देखने में वही मजा आएगा, जो टेलीविजन सेट पर किसी वीडियो को देखने में आता है।

यूपी में खुली हार्ले डेविडसन की पहली डीलरशिप

हार्ले डेविडसन इंडिया ने उत्तर प्रदेश में अपनी पहली स्वतंत्र डीलरशिप खोल दी है। यह डीलरशिप लखनऊ के गोमती नगर में स्थित है। यूनाइटेड हार्ले डेविडसन ग्राहकों को ब्रांड के मोटरसायकिल, राइडिंग गियर, अपैरल और एक्सेसरीज तक पहुंच सुनिश्चित करती है। इसके साथ पूरे भारत में अब 18 स्वतंत्र हार्ले डेविडसन डीलरशिप सुविधाएं हैं।

कंपनी के डायरेक्टर सेल्स और डीलर डेवलपमेंट राजीव वोहरा लांच पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हम यूनाइटेड हार्ले डेविडसन को उनकी नई हार्ली डेविडसन फैसिलिटी पर बधाई देते हैं। पिछले पांच वर्षों में भारत में हमारा डीलर नेटवर्क लगातार बढ़ा है और देश भर में हजारों ओनर्स और शौकीनों को स्वागत किया है। यूनाइटेड हार्ले डेविडसन उत्तर प्रदेश में मोटरसाइकिल के सभी शौकीनों के लिए सही स्थल पर सेवाएं मुहैया कराएगी। यह खास कर ऐसे ग्राहकों के लिए है, जो प्रीमियम लाइफ स्टाइल का अनुभव करने की इच्छा रखते हैं और हार्ले डेविडसन इसके लिए दुनिया भर में जानी जाती है।  ग्राहकों और शौकीनों की ओर से मिला शानदार रिस्पांस कंपनी के ग्रोथ प्लान के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार में उतरेगा हीरो ग्रुप

हीरो ग्रुप ने सोमवार को देश में तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कदम रखते हुए एक नई कंपनी हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत की। कंपनी के मुताबिक उसका यह निर्णय सरकार के मेन इन इंडिया अभियान से प्रेरित है और और इसके जरिए वह मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में और अधिक विकास में योगदान देना चाहती है।

हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स देश में सेट टॉप बाक्स की सबसे बड़ी परिचालक कंपनी माइबॉक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के अधिकांश हिस्से का अधिग्रहण करेगी। माइबॉक्स भारत में बड़े डीटीएच ओर केबल ऑपरेटरों की अग्रणी सप्लायर है। ठोस अनुसंधान और विकास क्षमताओं के साथ माईबॉक्स भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और डीएसआईआर द्वारा स्वीकृत एक उपक्रम है। यह स्वदेशी सेट टॉप बॉक्स के संपूर्ण डिजाइन में संलग्न बहुत थोड़ी कंपनियों में से एक है।

उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की दीर्घकालीन विरासत के अनुरूप, हीरो का लक्ष्य मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने में मदद के लिए मजबूत इन हाउस क्षमताओं का निर्माण करके इस उपक्रम के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आगे बढ़ना है। 1950 से भारत में एक सुप्रसिद्ध नाम बन चुके इस समूह ने दुपहिया वाहनों से लेकर वित्तीय समाधानों तक ग्राहक केंद्रित उत्पाद प्रस्तुत करते हुए देश में उद्योग के विकास में मदद की है।

ग्रुपऑन ने रीयल टाइम डील्स के लिए एक्सप्लोरी

अग्रणी डेली डील्स वेबसाइट-ग्रुपऑन इंडिया तथा भारत के पहले सर्च एवं डिस्कवरी प्लेटफार्म एक्सप्लोरी (Xploree) ने आज अपनी भागीदारी की आधिकारिक घोषणा की। एक्सप्लोरी ग्राहकों को खरीदादारी की संभावनाएं मुहैया कराता है तथा उन्हें एक टैप में संबद्ध ब्रांड तथा सेवाओं से जोड़ता है।

ग्रुपऑन इंडिया तथा ग्चसवतमम दोनों मिलकर ग्राहकों को आकर्षक, वैल्यू फॉर मनी डील्स एक टच पर मुहैया कराएंगे। कीप्वाइंट टेक्नोलॉजीस ने इस महीने के आरंभ में एक्सप्लोरी को लॉन्च किया था जो कि इंडस्ट्री का पहला सर्च तथा डिस्कवरी प्लेटफार्म है जो मोबाइल यूजर्स को सभी सर्च, मैसेंजर तथा अन्य प्लेटफार्म में सबसे संबद्ध ब्रांड तथा सेवाओं से जोड़ता है और ऐसा करते हुए उन्हें उनके वर्तमान कन्वर्सेशन एप से बाहर नहीं आना पड़ता। इस भागीदारी से एक्सप्लोरी के यूजर्स को फौरन ग्रुपऑन की डील्स की खोज और खरीददारी में मदद मिलेगी। ग्रुपऑन के डील्स की रेंज में डाइनिंग और वेलनेस से लेकर शॉपिंग और गेटअवेज तक शामिल हैं।

भागीदारी के बारे में जानकारी देते हुए ग्रुपऑन इंडिया के सीईओ अंकुर वारीकू ने कहा कि डील्स को रियल टाइम में खोज निकालने के लिए ग्चसवतमम एक शानदार माध्यम है और हम उन्हें अपने भागीदार के रूप में पाकर अत्यन्त प्रसन्न हैं। हम दोनों का लक्ष्य एकसाथ मिलकर आज के तकनीक से लैस ग्राहक को अविश्वसनीय कीमतों पर आकर्षक डील्स की बड़ी रेंज मुहैया कराना है और उनके अनुभव को एक नए स्तर तक ले जाना है। हम भविष्य में ऐसी और भागीदारियों की तलाश में हैं और निरंतर ग्राहकों को खुश करने का इरादा रखते हैं। सुमित गोस्वामी, सीईओ, कीप्वाइंट टेक्नोलॉजीस कहते हैं, यकीनन ग्रुपऑन भारत में लोकल कामर्स क्षेत्र में अग्रणी खिलाड़ी है और हम उनके साथ भागीदारी करके बेहद प्रसन्न हैं। हमारा लक्ष्य लोगों को फौरन आकर्षक डील्स, सेवाएं खोजने तथा अविश्वसनीय दामों पर ऑफर्स हासिल करने में मदद करना है और एक्सप्लोरी की अनूठी प्रिडिक्ट एंड कनेक्ट टेक्नोलॉजी ऐसा करने में सही रूप से हमारी मदद करती है। हम ग्रुपऑन के साथ दीर्घकालिक भागीदारी करना चाहते हैं चूंकि इससे हमें ग्राहकों को पहले कभी न मिलने वाले ब्रांड और सेवाओं का अनुभव मुहैया कराने का अतुलनीय अवसर मिलेगा। हम इकोसिस्टम प्लेयर्स की साथ भागीदारी के अवसर तलाशेंगे जिससे लक्षित ब्रांड की खोज के माध्यम से ग्राहकों को फायदा पहुंचे। ग्राहक आज से एक्सप्लोरी पर ग्रुपऑन की डील्स को देख और खरीद सकेंगे। एक्सप्लोरी ऐप डाउनलोड करने के लिए  http://bit.ly/Xploree पर क्लिक करें या गूगल प्ले स्टोर पर जाएं जो केवल एन्ड्रॉयड पर उपलब्ध है।

अब भारत में भी मिलेगी शेल ल्युब्रिकेंट्स पर लाइफटाइम इंजन वारंटी


लाइफटाइम इंजन वारंटी एक्सक्लूसिव तौर पर सिर्फ उन कारों के लिए उपलब्ध होगी, जिनका रजिस्ट्रेशन भारत में प्योर प्लस तकनीक से लैस शेल हेलिक्स अल्ट्रा के इस्तेमाल के लिए हुआ है। शेल की यह गारंटी ल्युब्रिकेंट से संबंधित इंजन खामियों को भी कवर करेगी। इसके अतिरिक्त ग्राहकों को शेल हेलिक्स एचएक्स-7 5 वर्ष की सीमित अवधि वारंटी भी दी जा रही है। देश भर में शेल हेलिक्स अल्ट्रा या हेलिक्स एचएक्स7 का इस्तेमाल करने कार मालिक षेल ल्युब्रिकेंट्स की आधिकारिक लाइफटाइम इंजन वारंटी वेबसाइट Lifetime Engine Warranty website पर पंजीकरण करा इस इंजन वारंटी प्रोग्राम का मुफ्त में लाभ उठा सकते हैं। वारंटी  www.shell.com/warranty पर पंजीकरण कराने के 30 दिन या 1000 किलोमीटर चलने (जो भी बाद में हो) से षुरू होती है और पंजीकरण षेल हेलिक्स अल्ट्रा/षेल हेलिक्स एचएक्स7 इंजन ऑयल व इंजन ऑयल चेंज खरीदने के 60 दिन के भीतर हो जाना चाहिए (जो तिथि खरीद रसीद में दी गई हो)। लाइफटाइम इंजन वारंटी इंजन के 13 हिस्सों को कवर करेगी।

इस अवसर पर शेल ल्युब्रिकेंट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन प्रसाद ने कहा किभारत में अपने ग्राहकों के लिए लाइफटाइम इंजन वारंटी प्रोग्राम को सबसे पहले पेष करने वाली इकलौती ल्युब्रिकेंट निर्माता होने पर हमें गर्व है। हमें हमारे मोटर ऑयल पर पूरा भरोसा है कि वह इंजन को मोटर ऑयल संबंधी गड़बडि़यों से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा कि हमने अपने ग्राहकों को प्योर प्लस तकनीक से लैस षेल हेलिक्स अल्ट्रा के तहत इस तरह की वारंटी देने का फैसला किया। इससे आपको दिमाग का षांति मिलती है और आपको अतिरिक्त लागत व चिंता के बिना ड्राइव करने में मदद मिलती है। नवोन्वेश पर हमारा पूरा ध्यान है और षेल ने पिछले 40 साल के दौरान ये अगली पीढ़ी के मोटर ऑयल विकसित करने व उनके षोध पर कई करोड़ डॉलर का निवेश किया है। हमारा मोटर ऑयल आज के इंजन को उत्कृष्ट क्लींजिंग व सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रोग्राम के जरिये हम हमारे ग्राहकों को उच्चतम स्तर का भरोसा और संतुष्टि देना चाहते हैं। इसके साथ ही सबसे विष्वसनीय ल्युब्रिकेंट आपूर्तिकर्ता के तौर पर अपनी साख और मजबूत करना चाहते हैं।

Sunday, June 21, 2015

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश में बनेंगे चार थीम बेस्ड टूरिज्म सर्किट


भारत में ढेर सारे ऐसे टूरिस्ट स्पॉट हैं, जिन्हें देख कर पर्यटक हैरान रह जाते हैं, पर के अभाव में लोग इन स्‍थानों तक नहीं पहुंच पाते। इसे देखते हुए पर्यटन मंत्रालय एक ऐसी योजना पर काम कर रहा है, जिससे देश के पर्यटन स्थलों की न सिर्फ जानकारी मिलेगी, बल्कि वहां सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके लिए मंत्रालय अगले वर्ष से स्वदेश दर्शन योजना के शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत चार नए विषय वस्तु आधारित (थीम बेस्ड) टूरिज्म सर्किटों का विकास किया जाएगा। इन चार सर्किटों में वन्य जीव, अध्यात्म, मरुस्थल और रामायण शामिल हैं। यह चार सर्किट उन पांच सर्किटों के अतिरिक्त हैं, जिन्हें पर्यटन मंत्रालय पहले से विकसित कर रहा है।

वन्य जीव सर्किट में राष्ट्रीय उद्यान और अभयरण्यों को शामिल किया जाएगा। अध्यात्म सर्किट में सभी धर्मों के प्रख्यात तीर्थ स्थलों को शामिल किया जाएगा। देखा जाए तो भारत इस मामले में अनूठा देश है जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई धर्म से जुड़े कई तीर्थ स्थल मौजूद हैं। बस जरूरत है इसे सही ढंग से विकसित करने की और उसे प्रचारित करने की। इसी शृंखला में तीसरा मरुस्थल सर्किट होगा, जिसमें राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध थार रेगिस्तान के पर्यटन स्थलों को शामिल किया जाएगा। चौथा सर्किट रामायण पर आधारित होगा जिसमें अध्योध्या, सीतामढ़ी, सेतु बांध रामेश्वरम, धनुष्कोटि और चित्रकूट अदि स्थल शामिल होंगे।

इससे पहले पर्यटन मंत्रालय मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार नेनेशनल मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म बोर्ड स्थापित करने की घोषणा कर चुकी है। यह बोर्ड उन पर्यटकों की मदद करेगा, जो देश में हेल्थ केयर संबंधी जरूरतों के लिए आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस बोर्ड में मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा अस्पताल, होटेलियर्स, मेडिकल एक्सपर्ट और टूर ऑपरेटर्स को भी शामिल किया जाएगा।

विकसित देशों की तुलना में जो लोग कम कीमत पर बेहतर मेडिकल केयर की जगह तलाश रहे हैं, उनके लिए भारत एक किफायती गंतव्य है। इससे वैकल्पिक ट्रीटमेंट जैसे योग, आयुर्वेद और यूनानी को भी बढ़ावा मिलेगा। अनुसंधान फर्म केपीएमजी की पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया में टॉप थ्री मेडिकल टूरिज्म डेस्टीनेशन में थाईलैंड और सिंगापुर के साथ ही भारत भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कम खर्च में तो उपचार होता ही है, यहां क्वालिटी हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहद अनुभवी और उच्च कोटि के प्रशिक्षित डाक्टर भी उपलब्ध हैं।

देसी कंपनियां चाहती हैं स्टील पर और ज्यादा आयात शुल्क

चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से सस्ते में आयात किया जा रहा स्टील भारतीय स्टील कंपनियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

भारतीय स्टील निर्माताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार ने स्टील के आयात पर शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी भले ही कर दी हो, लेकिन इससे इस उद्योग को कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। भारतीय निर्माताओं का कहना है कि आयात बढ़ने के बावजूद अभी भी आयातित स्टील यहां बने स्टील के मुकाबले प्रति किलो 13 से 15 रुपये तक सस्ता पड़ रहा है। इनका कहना है कि सरकार यदि आयात शुल्क 15 फीसदी करे, तभी मेक इन इंडिया कार्यक्रम सही ढंग से फलीभूत हो पाएगा।

भारतीय स्टील संघ के महासचिव और राउरकेला स्टील प्लांट के प्रबंध निदेशक रहे सनक मिश्रा का कहना है कि उन्होंने तो सरकार से इस पर 15 फीसदी के आयात शुल्क की मांग की थी लेकिन सरकार ने 7.5 और 10 फीसदी पर ही छोड़ दिया। इससे भारत में आयातित स्टील सस्ता पड़ता है। यहां सवाल यह उठता है कि यदि सस्ता आयातित स्टील मिलता रहेगा तो महंगा भारतीय स्टील कौन खरीदेंगे। इससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को धक्का पहुंचेगा। उनका कहना है कि जब तक स्टील पर आयात शुल्क 15 फीसदी नहीं होगा, तब तक इसका समाधान नहीं हो सकता है।

उनका कहना है पूरी दुनिया में अमेरिका अपनी उदार नीतियों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन वह भी अपने स्टील उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए इस पर 25 फीसदी का अयात शुल्क लगाए हुए है तो भारत को इसे 15 फीसदी करने में क्या दिक्कत है। इस पर आयात शुल्क बढ़ाने की राह में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का भी रोड़ा नहीं है क्योंकि डब्ल्यूटीओ स्टील पर 40 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है।

जिंदल स्टील एवं पावर लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि भारतीय स्टील संघ के बैनर तले वह केन्द्रीय इस्पात मंत्री से लेकर वित्त मंत्री, सब से मिल चुके हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही है। अभी लांग और फ्लैट प्रोडक्ट पर जो आयात शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी की गई, उससे कोई खास फायदा नहीं हो पाया है। अभी भी आयातित स्टील भारत में बने स्टील के मुकाबले 13 से 15 रुपये प्रति किलो सस्ता पड़ता है। ऐसे में लघु, मंझोली और सूक्ष्म इकाइयां उनका स्टील क्याें खरीदेंगी। यही नहीं, रियल इस्टेट क्षेत्र केकई बड़े ग्राहक आयातित स्टील से ही अपना काम चला रहे हैं।

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष ए पी चौधरी कहते हैं कि आयातित स्टील के दाम पर नहीं जाएं बल्कि गुणवत्ता पर जाएं। बाहर से जो सस्ता स्टील आ रहा है, उसकी गुणवत्ता भारतीय स्टील की तुलना में हमेशा कमतर होती है। जहां भी क्वालिटी स्टील की बात होती है, वहां भारतीय स्टील को ही प्राथमिकता मिलती है। लेकिन जहां गुणवत्ता पर समझौता किया जाता है, वहां सस्ता स्टील लगा दिया जाता है।

पैनासोनिक ने लांच की छह हेडफोन की नई रेंज

इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, घरेलू उपकरणों से लेकर मोबाइल फोन तक बनाने वाली कंपनी पैनासोनिक ने संगीत के शौकीनों के लिए हेडफोनों की एक व्यापक रेंज भारतीय बाजार में पेश की है। कंपनी ने इस रेंज के तहत अलग-अलग तरह की खूबियों वाले छह हेडफोन पेश किए हैं। इनकी कीमतें 949 रुपये से लेकर 13,990 रुपये तक जाती हैं।

पैनासोनिक की इस रेंज की शुरुआत 949 रुपये की कीमत वाले आरपी-एचएस34 हेड फोन से शुरू होती है। 14.3 एमएम की ड्राइवर यूनिट वाला यह हेड फोन 10 हर्ट्ज से लेकर 25 किलो हर्ट्ज तक की ध्वनियों को पकड़ने व सुनाने में सक्षम है। इसके बाद 1,690 रुपये कीमत वाला एचबीडी 250 हेडफोन आता है, जिसमें न उलझने वाला फ्लैट केबल दिया गया है। यह दोनों ही हेडफोन पांच रंगों में उपलब्ध हैं।

रेंज के बाकी चार हेड फोन काले रंग में पेश किए गए हैं। इनमें आरपी-एचएक्सएस 400 की कीमत 2,899 रुपये, आरपी-बीटीडी 10 की कीमत 8,990 रुपये, आरपी-एचसी 800 की 11,990 रुपये रखी गई है, जबकि 13,999 रुपये की कीमत वाला आरपी-डीजे 1210 इस रेंज का सबसे हाई एंड हेड फोन है।

योग दिवस लांच हुआ योग परिधान प्रोयोग

भारत के आईकेए योगा वियर ने अरबों डॉलर के योग परिधान बाजार के जाने-माने खिलाड़ियों को चुनौती देते हुएपहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर एक खास योग परिधान प्रोयोग लांच किया है। योग परिधान का डिजाइन प्राचीन भारत से लिया गया है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के द्वारा इसे आज की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है। प्रोयोग महिलाओं के लिए दुनिया का पहला योग परिधान है, जिसमें सिंथेटिक कपड़ा त्वचा को जरा भी नहीं छुएगा और यह परिधान शरीर से बिल्कुल नहीं चिपकेगा।

इस खास परिधान में योग करते समय आपकी त्वचा तक हवा का ठीक से आदान-प्रदान होगा। प्रोयोग के ट्रेडमार्क हाइपरब्रीद फैब्रिक बेहद स्टाइलिश हैं और साथ ही दुनिया भर के ब्रांड्स के द्वारा पेश किए जाने वाले योग परिधान की तुलना में कहीं अधिक आरामदायक भी हैं। प्रोयोग भारत में प्रोयोग डॉट कॉम पर उपलब्ध है।

कंपनी के सह-संस्थापक एवं प्रोडक्ट हेड मलिका बरुआ के मुताबिक आज योग परिधान के 90 फीसदी बाजार में पॉलिएस्टर एवं नायलॉन उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है जो कि प्लास्टिक या पीईटी फैब्रिक है। ये परिधान योगा के लिए अनुकूल नहीं हैं। प्रोयोग ने इस फैब्रिक और परिधान के विकास से पहले इस पर दो साल का लंबा अनुसंधान किया, इस दौरान योगा अध्यापकों और टेक्सटाइल इंजीनियरों से परामर्श लिया गया। उन्होंने 11 देशों के योग अध्यापकों से बात की। इन सब अनुसंधानों के बाद पाया गया कि ज्यादातर योग अध्यापक इस बात को जानते ही नहीं हैं कि वे नायलॉन और पॉलिएस्टर से बने परिधानों का इस्तेमाल कर रहें हैं। वे योग और ‘प्लास्टिक’ के बीच के विरोधाभास से परिचित नहीं हैं।

Friday, June 19, 2015

ऑडी ने लांच की नई क्यू-3

ऑडी ने भारत में नई ऑडी क्यू3 लांच की है। नई ऑडी क्यू 3 डिजाइन के नए पन व कई नई तकनीक खासियतों के कारण अब और भी आकर्षक होकर आई है। यह वर्ष 2012 में बाजार में लांच के बाद से ऑडी क्यू3 अपने सेगमेंट से सबसे अहमअ मॉडल रही है।

नई दिल्ली व मुंबई में ऑडी क्यू3 की एक्स शो रूम कीमत 28.99 लाख रुपये तय की गई है। यह कार उत्तर भारत में ऑडी की सभी डीलरशिप पर उपलब्ध होगी।

ऑडी क्यू3 में डायनामिक टर्न इंडिकेटरों के साथ एलईडी हैडलाइट दी गई है। कार में स्टीयरिंग माउंटेड पैडल शिफ्टर भी पहली बार पेश किए गए। वहीं कार में एमएमआई नेविगेशन सिस्टम और पार्किंग सिस्टम प्लस, रियर व्यू कैमरा के साथ ऑडी म्युजिक इंटरफेस, 20जीबी ज्यूकबॉक्स, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और स्ट्रीमिंग शामिल हैं।

ऑडी इंडिया के प्रमुख जो किंग ने कहा कि नई ऑडी क्यू3 इस साल हमारा पांचवां लांच है। उन्होंने कहा कि इस साल उनका इरादा 10 नई कारें लांच करने का है। कंपनी कई शानदार नए मॉडल को लांच करने की तैयारी कर रही है।

डायबिटीज पीड़ित रोजेदारों के लिए मोबाइल ऐप

एमएसडी फार्मास्युटिकल्स (एमएसडी इंडिया) ने रमजान में रोजे के दौरान डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित रोजे रखने हेतु एक अभियान की शुरुआत की है। एमएसडी ने रमजान के पवित्र माह में ब्लड शुगर ट्रैकर और मधुमेह प्रबंधन के नुस्खों की मदद से रोजों की अवधि के दौरान एक विषेश ऐप की शुरुआत की है। आईओएस और एंड्रायड उपयोक्ताओं के लिए ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप का निर्माण टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए किया गया है, जो रमजान के दौरान रोजे रखते हैं। इस ऐप में इनकी परेशानियों का समाधान पेश किया गया है।

रमजान के दौरान रोज रखना जहां एक महत्वपूर्ण इबादत मानी जाती है, वहीं डायबिटीज़ रोगियों को कम रक्त शर्करा स्तर (हाइपोग्लाइसीमिया), अधिक ब्लड शुगर स्तर (हाइपरग्लाइसीमिया) और निर्जलीकरण के जोखिमों की रोकथाम के लिए विशेष्ज्ञ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। उपवास पर रहने वाले डायबिटीज के मरीजों को हाइपोग्लाइसीमिया का उच्च जोखिम होता है। ऐसा विषेशकर उस समय होता है जब वे मधुमेह की दवाएं ले रहे होते हैं।

खाना खाने के बीच में लंबे अंतर और डायबिटीज़ की दवाओं के कारण ग्लूकोज़ का स्तर प्राय: गिर जाता है, जिससे पसीना आने, चक्कर आने और बेचैनी होने जैसे लक्षण सामने आते हैं। गंभीर होने पर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण मानसिक भ्रम, विपरीत व्यवहार, बेहोशी और यहां तक कि दौरों जैसी समस्याएं भी आ सकती है जिसके कारण उपवास के दौरान ब्लड शुगर के स्तर पर निगरानी रखना आवश्यक हो जाता है।  ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप यह काम बखूबी करता है। ऐप में एक रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) ट्रैकर उपलब्ध है। यह रक्तचाप की निरंतर निगरानी की सुविधा प्रदान करता है जिससे रोगियों को उपवास के दौरान अपनी टाइप 2 डायबिटीज को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

मुफ्त में उपलब्ध इस ऐप में कई तरह के खास फीचर शामिल किए गए हैं। यह तीन भाषाओं, हिंदी, अंग्रेजी और अरबी में उपलब्ध है। यह रोजाना नमाज और सूर्यास्त का समय बताता है। यह इस बात की जानकारी देता है कि रोजा कब खोला जा सकता है। इसका किबला कंपास उपयोक्ता की स्थिति के अनुसार नमाज की दिशा की जानकारी देता है। प्रतिदिन रोज़े की शुरुआत और समापन (सहरी और इफ्तार) के लिए अलार्म लगाने की सुविधा भी इसमें दी गई है। इसके अलावा रमजान की तैयारी के लिए अपने स्वास्थ्य देखभाल से जूड़े प्रश्न पूछने की सुविधा भी इसमें मौजूद है।

ऐप के बारे में एमएसडी इंडिया के प्रबंध निदेशक केजी अनंतकृष्णन ने बताया कि रमजान में रोजे के दौरान एक महीने तक खाने के समय, भोजन, दवाइयों के उपयोग और दिनचर्या में होने वाले बदलावों से डायबिटीज पर प्रभाव पड़ सकता है। इस ऐप के उपयोग से कोई भी अपने ब्लड ग्लूकोज स्तर पर नजर रख सकता है और साथ ही साथ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकता है। रमजान के दौरान 5 करोड़ से अधिक डायबिटीज पीड़ित लोग रोजे रखते हैं और ग्लूकोज स्तर का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस ऐप की संस्तुति करते हुए डीएम, एंडोक्रायनोलॉजिस्ट डा. शहला शेख ने कहा कि रमजान के पवित्र माह के दौरान उपवास रखते हुए डायबिटीज रोगियों को विशेष सतर्कता और सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ब्लड शुगर स्तर पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसी स्थिति में एमएसडी का यह ऐप मार्गदर्शक का काम करता है।

Thursday, June 18, 2015

मुद्रा को हिट कराने के लिए वित्त मंत्रालय ने कसी कमर

छोटे कारोबारियोंऔर असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को बैंकों से सस्ते दर पर लोन दिलवाने की बहुप्रचारित मुद्रा योजना को हिट कराने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय सक्रिय हो गया है। इसके तहत असल लाभार्थी को कितना लोन मिलता है, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इसमें लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए बैंको को मंत्रालय से कुछ अलग ही निर्देश दिया गया है।

वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन के एक अधिकारी ने बताया कि सभी सरकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सरकारों के सहकारी बैंकों और अरबन कोऑपरेटिव बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्होंने 10 लाख रुपये तक के जो भी नॉन-फार्म (गैर कृषि) लोन दिए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा लोन के रूप में पारिभाषित करें। इस तरह के निर्देश देने के बाद ही बैंकिंग डिवीजन चुप नहीं बैठ गया बल्कि बीते 27 मई को सभी सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुला कर मुद्रा योजना की समीक्षा भी की गई।

इसके बाद इसी महीने 4 तारीख को पीएमएमवाई की समीक्षा के लिए एक बड़ी बैठक भी की गई। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग मंत्रालय के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके तहत संख्या दिखाने की भी तैयारी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 के दौरान 27 सरकारी बैंकों द्वारा 10 लाख रुपये तक के दिए गए नॉन-फार्म लोन का आंकड़ा मंगा लिया गया है, जो कि 29.37 लाख खाते हैं। इन्हें अब मुद्रा खाता के रूप में प्रचारित किया जाएगा।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 अप्रैल को जबु मुद्रा योजना को शुरू किया था तब कहा था कि इस योजना में लघु, मंझोले एवं सूक्ष्म क्षेत्र के उद्योगपतियों से लेकर साइकिल ठीक करने वाले, पंचर लगाने वाले, पतंग बनाने वाले, मटकी बनाने वाले, चाय-पान बेचने वाले और पंसारी जैसे छोटे कारोबारियों को भी सस्ते ब्याज दरों पर लोन मिलेगा। हालांकि अभी मुद्रा बैंक की स्थापना नहीं हुई है लेकिन इसका कामकाज शुरू करने के लिए सिडबी की अनुषंगी इकाई के रूप में मुद्रा लिमिटेड की स्थापना हो गई है और नाबार्ड के सीजीएम जीजी मैमन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया है। शुरूआती कामकाज के लिए रिजर्व बैंक ने भी 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या अधिक से अधिक दिखाने का दवाब है तभी तो ऐसा किया जाएगा।

महज 10 सेकेंड में पर्सनल लोन देगा एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी बैंक ने 10 सेंकेंड में ग्राहकों को पर्सनल लोन देने की घोषणा की है। इसके तहत बैंक के वर्तमान ग्राहकों को एक पूर्व-स्वीकृत ऋण की राशि 24×7 उपलब्ध रहेगी। लोन देने की यह पूरी प्रक्रिया कागज रहित है और ग्राहक नेटबैंकिंग के जरिए अपने बैंक खाते में लॉग इन करके या मोबाइल बैंकिंग के जरिए केवल एक क्लिक से ऋण हासिल कर सकेंगे।

एचडीएफसी बैंक का दावा है कि वह पहला ऐसा संस्थान है, जिसने ऋण स्वीकृति और वितरण की पूरी प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया है। यह 10 सेकेंड  का लोन पूरी तरह झंझट-मुक्त एवं पारदर्शी है और इसमें लोन लेने वाला राशि जारी होने का इंतजार नहीं करेगा, खास कर चिकित्सा या अन्य तरह की आपात स्थितियों में जहां तुरंत नकदी की जरूरत होती है।

एचडीएफसी बैंक में अनसिक्योर्ड लोन, होम एवं मोर्गेज लोन विभाग के बिजनेस हेड अरविंद कपिल के मुताबिक यह किसी के वर्चुअल वैलेट में एक वास्तविक चेक होने के जैसा है और केवल एक क्लिक पर उपलब्ध सरल एवं तेज बैंकिंग समाधानों को उपलब्ध करा कर ग्राहकों को खुश करने के हमारे अभियान का हिस्सा है। यह 10 सेकेंड का लोन एचडीएफसी बैंक की डिजिटल बैंकिंग की पेशकश गो डिजिटल के तहत नई पहल है। गो डिजिटल अभियान पिछले साल वाराणसी में शुरू किया गया था, जो मोबाइल फोन को बिल्कुल एक बैंक शाखा में परिवर्तित कर देता है। उसके बाद से बैंक ने कई नई डिजिटल पहल  की शुरुआत की है।

आयशर पोलारिस ने पेश किया देश का पहला पर्सनल यूटिलिटी वाहन ‘मल्टिक्स’

आयशर पोलारिस प्राइवेट लिमिटेड ने देश के पहले पर्सनल यूटिलिटी वाहन ‘मल्टिक्स’ को पेश किया है। यह वाहन अपनी श्रेणी का अकेला और अनूठा है, जो न सिर्फ कार की तरह आपको और आपके परिवार को यात्रा कराता है, बल्कि आपके कारोबार में यह पिकअप वाहन की तरह काम में आता है। इससे घर और दुकान के लिए तीन किलोवाट तक की बिजली भी ली जा सकती है। यह वाहन देश का पहला पर्सनल यूटिलिटी वाहन है और इसे व्यावसायिक वाहन की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

मल्टिक्स के उत्पादन संयंत्र के दौरे के दौरान आयशर मोटर्स के एमडी और सीईओ सिद्धार्थ लाल ने बताया कि इस वाहन को वैसे कारोबारियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो स्वतंत्र रूप से अपना कारोबार करते हैं। इस तरह के कारोबारियों की संख्या देश में करीब 5.8 करोड़ है।

पांच लोगों के बैठने वाले इस वाहन में मय सामान परिवार के साथ सफर किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कारोबार से संबंधित सामान लाद सकते हैं और इसका उपयोग जेनरेटर की तरह भी कर सकते हैं। इसमें एक्स पोर्ट की सुविधा है जिसके जरिए आसानी से बिजली की आपूर्ति मिलती है। इससे घर की बिजली चलाई जा सकती है अथवा वाटर पंप या डीजे भी चला सकते हैं।

लाल ने बताया कि इस वाहन में विश्वसनीय डीजल इंजन का प्रयोग किया गया है जो एक लीटर में 28.45 किलोमीटर का माइलेज देती है। इसमें 225 एमएम का ग्राउंड क्लीयरेंस है जिससे यह हर तरह की सड़कों पर आरामदायक रहती है। इस वाहन के दो वैरिएंट होंगे और यह चार रंगों में उपलब्ध होगा। इस वाहन की शुरुआती कीमत 2,32,850 रुपये (एक्स शोरूम जयपुर) होगी।

लाल ने बताया कि लांच से पहले इस वाहन की विश्वसनीयता, सुरक्षा और टिकाऊपन की कड़ी जांच की गई है। इसे 18 लाख किलोमीटर चला कर परखा गया है और परख में खरा उतरने के बाद इसे लांच किया गया है। इसकी जांच भारत में विशेष रूप से बनाए ट्रैक पर की गई है और इसके अलावा इसे अमेरिका स्थित दुनिया के सबसे कठिन ट्रैक पर भी इसे परखा गया है।

उन्होंने बताया कि मल्टिक्स संयंत्र की उत्पादन क्षमता 60,000 सालाना है जिसे बढ़ाकर 1,20,000 सालाना किया जा सकता है। संयंत्र में रोबोटिक वेल्ड लाइन है जिससे वाहन निर्माण में उत्कृष्टता बनी रहती है। इनहाउस पेंट सिस्टम होने से रंग क्वालिटी के मानकों पर हमेशा खरे उतरते हैं।

आयशर पोलारिस प्राइवेट लिमिटेड आयशर और अमेरिका की पोलारिस की समान भागीदारी वाली कंपनी है। पोलारिस पावर स्पोर्ट्स क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है और इसकी विशेषज्ञता मिलिट्री वाहनों के अलावा ऑल टेरेन व्हीकल बनाने में है। लाल ने बताया कि मल्टिक्स को तैयार करने में डिजाइन से लेकर उत्पादन तक 350 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

एनएसई स्कूलों में कराएगा शेयर बाजार की पढ़ाई

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इक्विटी बाजार से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए स्कूली छात्रों को इससे जोड़ने की ओर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत एनएसई देशभर में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध 15 हजार स्कूलों में कक्षा 9 और 10 के छात्रों को इक्विटी और शेयर बाजार के बारे में शिक्षित करेगा।

 इसके साथ ही एनएसई स्कूलों में कार्यशालाओं का आयोजन कर शिक्षकों को को भी वित्तीय बाजार के बारे में प्रशिक्षण देगा, ताकि वह बच्चों को इस बारे में शिक्षा दे सकें। एनएसई के इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 200 से ज्यादा स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने अपनी सहमति भी दे दी है।

एनएसई की ओर से शिक्षकों के पहले बैच की ट्रेनिंग 20 जून को शुरू होने जा रही है। एनएसई की एमडी व सीईओ चित्रा रामकृष्णा ने बताया कि हमारे फाइनेंशियल मार्केट मैनेजमेंट (एफएमएम) कोर्स का उद्देश्य लोगों को अपने धन का कुशल प्रबंधन करने और इस बारे में सजगता व समझदारी से निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।

इसके लिए एनएसई ने सीबीएसई के साथ साझेदारी की है जिससे कि भविष्य के छात्रों को वित्तीय बाजार के बारे में शिक्षित किया जा सके। हमारा यह कार्यक्रम देश में वित्तीय साक्षरता का प्रसार करके भारत को दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने के वृहद लक्ष्य का हिस्सा है। कार्यक्रम के दायरे में देश भर में 15 हजार स्कूलों को लाने का लक्ष्य है। इसके लिए एनएसई के मुंबई स्थित मुख्यालय में शिक्षकों के पहले बैच का प्रशिक्षण शुरू होने जा रहा है।

गौरतलब है कि सीबीएसई सत्र 2015-16 से कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए फायनेंशियल मार्केट मैनेजमेंट का व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है। इस वोकेशनल कोर्स का संचालन नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के तहत किया जाएगा। इस कोर्स के तहत छात्रों को कक्षाओं में पाठ पढ़ाने के अलावा इंटरनेट के जरिए करीब 60 घंटे की ऑनलाइन शिक्षा भी दी जाएगी। कोर्स करने वाले छात्रों को एनएसई और सीबीएसई द्वारा संयुक्त रूप से प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

सीबीएसई के निदेशक डा. एमवीवी प्रसाद राव ने स्कूलों को इस बारे में लिखे अपने पत्र में कहा है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय छात्रों में कौशल और दक्षता के विकास पर काफी ध्यान दे रहा है। भविष्य में रोजगार और नियोजन के मामले में एनएसक्यूएफ की काफी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इससे समूचे परिदृश्य में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

Wednesday, June 17, 2015

आईसीआईसीआई बैंक में कामथ की जगह लेंगे शर्मा

आईसीआईसीआई बैंक ने एमके शर्मा को बैंक का नया गैर कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड वाइस चेयरमैन रहे शर्मा अब तक इस पद को संभाल रहे केवी कामथ की जगह लेंगे, जो अगले माह ब्रिक्स बैंक के पहले प्रेसिडेंट के रूप में पदभार संभालने जा रहे हैं।

आईसीआईसीआई बैंक की ओर से इस संबंध में जारी बयान में कहा गया है कि शर्मा की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य नियामकीय मंजूरियां अभी ली जानी हैं। इन मंजूरियों के बाद शर्मा की नियुक्ति 1 जुलाई या आरबीआई की ओर से मंजूरी मिलने की तारीख में से जो भी पहले होगी से प्रभावी मानी जाएगी।

शर्मा कई कंपनियों के देश की कई बड़ी कंपनियों के निदेशक मंडल से स्वतंत्र निदेशक के रूप में जुड़े रहे हैं। वह सरकार की ओर से गठित कंपनी कानून और कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी समितियों के सदस्य भी रहे हैं। इस समय भी वह आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी और आईसीआईसीआई प्रूडेेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के स्वतंत्र निदेशक हैं।

भारत नियुक्तियों के मामले में दूसरे नंबर पर

कंपनियों में भर्तियों के माहौल को लेकर भारत दुनिया भर में दूसरे नंबर पर रहा। हालांकि आने वाले तीन महीनों के दौरान भर्तियों की रफ्तार में धीमापन देखने को मिल सकता है। यह अनुमान ग्लोबल स्टाफिंग फर्म मैनपावर ग्रुप की एक रिपोर्ट में जताया गया है।

मैनपावर के तिमाही ग्लोबल इंप्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के मुताबिक भर्तियों के मामले में ताइवान दुनिया भर सबसे अव्वल रहा। रिपोर्ट में भारत के बारे में अनुमान जताया गया है कि आगामी तिमाही (जुलाई-सितंबर)  के दौरान देश में भर्तियों की रफ्तार नई शुरू होने वाली कंपनियों और ग्रामीण व अर्ध शहरी इलाकों से आने वाली मांग के स्तर पर निर्भर करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में देश भर से शामिल कुल 5,007 नियोक्ताओं में से 37 फीसदी की धारणा भर्तियों को लेकर सकारात्मक है। रोजगार तलाशने वाले लोगों को बाजार की इस बेहतर स्थिति का लाभ आने वाले महीनों में मिल सकेगा। आगामी तिमाही में कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद नियुक्तियों की रफ्तार पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में धीमी रहेगी।

समूचे माहौल में यह सुधार सरकारी की ओर से उठाए जाने वाले कदमों, नीतिगत स्तर पर काम होने और अर्थव्यवस्था में तेजी लौटने के बीच नए उद्यम शुरू होने के चलते आएगा। हालांकि सालाना आधार पर सर्वे में शामिल सभी सात सेक्टरों में भर्तियों की रफ्तार में अगली तिमाही सुस्ती दिखाई देगी, जबकि तिमाही आधार पर पांच सेक्टरों की रफ्तार तुलनात्मक रूप से धीमी रहेगी। सात सेक्टरों में सबसे बेहतर स्थिति खनन और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) जैसे सेक्टरों में रहेगी। इसके अलावा वित्त, बीमा, रीयल एस्टेट, आईटी और रिटेल सेक्टर में भी सकारात्मक स्थिति रहेगी।

सर्वे के मुताबिक भर्तियों के परिदृश्य की दृष्टि से ताइवान और भारत के बाद जापान, हांगकांग, और अमेरिका का नंबर रहा। दूसरी ओर सबसे कमजोर और नकारात्मक परिदृश्य इटली और ब्राजील का रहा।

मैनपावर ग्रुप इंडिया के प्रबंध निदेशक एजी राव का कहना है कि कंपनियों द्वारा देश के ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ाने के चलते इस साल भर्तियों की स्थिति सकारात्मक बनी रहेगी। ऐसे में नौकरी तलाशने वालों के लिए यह वक्त अच्छा रहेगा। विस्तार की प्रक्रिया विभिन्न सेक्टरों में देखने को मिलेगी। नई कंपनियों (स्टार्ट अप) के मैदान में उतरने से भी रोजगार के परिदृश्य में सुधार देखने को मिलेगा।

टेक्सटाइल कंपनियों पर पड़ रही महंगे कपास की मार

उद्योग संगठन फिक्की ने कपड़ा  मंत्रालय को एक पत्र लिखकर भारत कपास निगम (सीसीआई) द्वारा खरीदे कपास को पर्याप्त मात्रा में जारी करने में मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिक्की ने जोर देकर कहा कि मिलों औऱ उद्योग को प्रतिस्पर्धी दरों पर शीघ्र ही कपास की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए यह आवश्यक है।

फिक्की के महासचिव डा. ए दीदार सिंह ने इस संबंध में कपड़ा  मंत्री संतोष गंगवार को लिखे पत्र में कहा है कि सीसीआई की मुख्य भूमिका किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रचालन करना है, ताकि किसानों को अपने उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले। जबकि उसी समय अगर खरीदा गया कपास उद्योग के लिए समय पर जारी नहीं किया जाता है और भंडार के रुप में सीसीआई द्वारा संग्रहित रखा जाता है, तो यह बाजार को विकृत और कीमतों में कृत्रिम वृद्धि करता है, जिससे उपयोगकर्ता खंड  (यू़जर सेगमेंट) अप्रतिस्पर्धी होते हैं। कपड़ा मिलें कपास की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से सीसीआई पर निर्भर हैं।

फिक्की के अनुसार पिछले कुछ दिनों में बाजार में कपास के आगमन में 20,000 गांठ तक बड़े पैमाने पर गिरावट हुई है। मिलों की कुल आवश्यकता लगभग 85,000 से 90,000 गांठ प्रतिदिन है, जबकि सीसीआई केवल 40,000 गांठ ही प्रतिदिन उपलब्ध करा रहा है, वह भी ऊंचे मूल्य के कारण अधिकतर बिक नहीं पा रही हैं। अब तक सीसीआई 10.8 लाख कपास की गांठें बेच चुका है और इस कारण 75 लाख गांठे अब भी भंडार में है, क्योंकि सीसीआई ने मौजूदा अवधि में 85.8 लाख कपास की गांठें खरीदी हैं।

फिक्की ने कहा है कि वर्तमान कपास वर्ष के आरंभ में भारतीय कपास अंतरराष्ट्रीय कपास की तुलना में सस्ती थी, लेकिन परिस्थितियां महत्वपूर्ण रूप से बदली हैं और अब बाजार में कपास के कम आने से  दाम अंतरराष्ट्रीय मूल्य की तुलना में अधिक हो चुके हैं। 

कुछ राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में सीसीआई ने न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर कपास की खरीद की है, जिससे इन राज्यों में कपास की कमी हो गई  है। स्थानीय मिलें दूरवर्ती स्थानों से कपास खरीदने को विवश हैं, जिससे परिवहन पर और अन्य लागत बढ़ी है। सीसीआई द्वारा बड़े पैमाने पर भंडारण के कारण देश भर में कपास के दाम ऊपर जा रहे हैं।

इस परिस्थित का लाभ उठाकर निजी व्यापारी इस धारणा के साथ जमाखोरी कर रहे हैं कि सीसीआई द्वारा कपास उपलब्ध न कराने से कपास के दाम में और बढ़त होगी। यदि सीसीआई खरीदे गए कपास को उचित दामों पर बड़ी मात्रा में बेचता है, तो निजी व्यापारी जमाखोरी के प्रति हतोत्साहित होंगे और बाजार के दामों पर कपास बेचने को विवश होंगे।

रिजर्व बैंक इस साल और नहीं घटाएगा ब्याज दरें

उद्योग और कारोबार जगत जहां आने वाले दिनों में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में और कटौती किए जाने की उम्मीद कर रहा है, वहीं ग्लोबल स्तर पर वित्तीय और आर्थिक गतिविधियों से जड़े एचएसबीसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि आरबीआई द्वारा इस साल अब दरों में और कटौती की संभावना नहीं है।

एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस साल बारिश में कमी का प्रतिकूल असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। इससे ग्रामीण इलाकों से आने वाली मांग भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आरबीआई की ओर से दरों में और कटौती की उम्मीद नहीं की जा सकती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावित अलनीनो प्रभाव के देश के आर्थिक हालात पर होने वाले असर को कम नहीं आंका जाना चाहिए। दुनिया भर से मिल रही जानकारी के मुताबिक अलनीनो प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है और साल की अंतिम छमाही में इसका असर गहराता दिखाई दे सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बारिश में कमी का सीधा असर खाद्य महंगाई पर देखने को मिलेगा और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में माग असरदार ढंग से प्रभावित होगी। हालांकि यह असर काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सरकार इस अवधि में खाद्य प्रबंधन कैसे करती है।

एचएसबीसी के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी का कहना है कि ऐसे हालात में रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दर में और कटौती की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके अलावा दरों में और कटौती किया जाना सरकारी की ओर से किए जाने वाले ढांचागत सुधारों, खाद्य क्षेत्र के आधारभूत ढांचे और सरकार की कृषि नीति जैसी चीजों पर भी काफी हद तक निर्भर करेगी। गौरतलब है कि आरबीआई 2 जून को अपनी पिछली मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर में चौथाई फीसदी की कटौती कर चुका है।

लांच हुई रेनो की क्रॉसओवर एमपीवी लॉजी प्रीमियम

फ्रांस की ऑटो कंपनी रेनो ने मं मल्टी परपज व्हीकल (एमपीवी) श्रेणी में अपने क्रॉसओवर मॉडल लॉजी को लांच कर दिया है। इस की प्राइस रेंज 11.99 लाख रुपये से 12.29 लाख रुपये (एक्स शोरूम, दिल्ली) के बीच है। रेनो लॉजी प्रीमियम स्टेपवे एडीसन दो वैरिएंटस लॉजी आरएक्सजेड 110 पीएस और लॉजी आरएक्सजेड 110 पीएस लांच किया है।

 1.5 लीटर के9के डीसीआई (कॉमन रेल डायरेक्ट इंजेक्शन) इंजन द्वारा युक्त, आरएक्सजेड 110 पीएस एक आठ सीटों वाली और आरएक्सजेड 110 पीएस सात सीटों वाली कार है। रेनो इंडिया के कंट्री सीईओ और एमडी सुमित साहनी ने कहा कि लॉजी प्रीमियम स्टेपवे एडीसन के लांच के साथ हम नवाचार की प्रक्रिया जारी रखेंगे।

लॉजी प्रीमियम स्टेपवे एडीसन को असेर्टिव और डिसटिंकटिव स्टाइलिंग के साथ डिजाइन किया गया है। दोनों वैरिएंट एंटी लॉक ब्राकिंग सिस्टम, ब्रेक असिस्ट, ड्राइवर और पैसेंजर एयरबैग, रियर वाइपर और डीफॉगर, रियर पार्किंग सेंसर, रियर व्यू कैमरा, सेंट्रल लॉकिंग, पावर स्टीयरिंग और पावर विंडोज जैसे फीचर्स से लैस है।े रेनो के पास देश में पिछले वर्ष कार बाजार की सिर्फ दो फीसदी हिस्सेदारी थी। कंपनी ने इस वर्ष 9 अप्रैल को लॉजी की लांचिंग के साथ एमपीवी सेगमेंट में प्रवेश किया है।

अच्छी कमाई कर टैक्स न चुकाने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार



कारोबार या स्वरोजगार से तगड़ी कमाई करने के बावजूद आयकर न भ्‍ारने वालों के बुरे दिन आने ही वाले हैं। नरेंद्र मोदी सरकार इन दिनों ऐसे लोगों की आर्थिक कुंडली खंगाल रही है और उनसे संबंधित सारी जानकारी जुटा रही है। जैसे ही इनके बारे में पर्याप्त जानकारी मिलेगी, इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अध्यक्ष अनीता कपूर ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि कारोबार या स्वरोजगार से अच्छी-खासी कमाई कर भी आयकर नहीं चुकाने वालों की समाज में अच्छी खासी तादाद है। इनके बारे में आयकर विभाग को कुछ तो जानकारी है और कुछ जुटाई जा रही है।

ऐसे लोगों के बारे में गहन सर्वे भी चल रहा है। जैसे ही इनके बारे में पुख्ता जानकारी मिल जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी।  उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों पर आमदनी के हिसाब से जो टैक्स बनता है, वह तो वसूला ही जाएगा, उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा। यही नहीं, उनके ऊपर आयकर कानून के मुताबिक मुकदमा भी चलाया जाएगा।

सीबीडीटी अध्यक्ष ने बताया कि कई मामलों में देखा गया कि बड़े शहरों के रिहायशी इलाकों में परचून की दुकान चलाने वाले या मिठाई की दुकान चलाने वाले देखने में तो छोटे कारोबारी लगते हैं लेकिन उनकी मासिक आमदनी लाखों रुपये महीने होती है। तुर्रा यह कि ऐसे व्यक्ति आय कर के नाम पर एक पैसा भी नहीं चुकाते।

ऐसे लोगों के बारे में ही अब जानकारी जुटायी जा रही है। विभाग के मुताबिक देश में ऐसे लाखों लोग हैं जिनके पास भरपूर आमदनी के साधन हैं लेकिन वे अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते। इन्हें आयकर रिटर्न के दायरे में लाना और उनसे टैक्स वसूलना अधिकारियों के लिए चुनौती है और इस चुनौती से पार पाया जाएगा।

विदेशी निवेशकों पर मैट लगाने के मसले पर उन्होंने बताया कि फिलहाल आयकर विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में नई पहल नहीं करने को कहा गया है। इस बारे में न्यायमूर्ति ए पी शाह की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई है और इस कमेटी ने काम भी शुरू कर दिया है। लिहाजा अब इस कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। शाह कमेटी की रिपोर्ट में जो दिशानिर्देश आएगा, उसी के हिसाब से काम होगा।

भारत-पोलैंड व्यापार 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

आपसी कारोबार को बढ़ाने के लिए भारत और पोलैंड ने 5 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य तय किया है। 15 जून को वारसा में आयोजित आर्थिक सहयोग पर द्विपक्षीय संयुक्त आयोग के चौथे सत्र में यह लक्ष्य तय किया गया।

औद्योगिक नीति तथा संवर्द्धन विभाग के सचिव अमिताभ कांत तथा पोलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री जर्जी पिट्रीविच की सह अध्यक्षता वाले आयोग ने निवेश बढा़ने तथा कारोबार 2014 के 2-3 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2018 तक 5 अरब डॉलर करने का रोडमैप तैयार किया।

 पिट्रीविच ने कहा कि जनवरी 2015 में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री पी की भारत यात्रा तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उनकी मुलाकात से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के प्रयास को बल मिला है। कांत ने पोलैंड के निवेशकों को मेक इन इंडिया तथा स्मार्ट सिटी जैसे कार्यक्त्रस्मों पर विचार करने तथा भारत में निवेश के सुधरे हुए माहौल का लाभ उठाने के लिए का आमंत्रण दिया।

एडीबी भारत को देगा 50 फीसदी ज्यादा सहायता

भारत में आर्थिक विकास की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कार्यों के लिए एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की ओर से अब सहायता राशि मिलेगी। बैंक ने कहा है कि वह भारत को दी जा रही सहायता को अगले तीन साल में करीब 50 फीसदी तक बढ़ा देगा।

एडीबी के अध्यक्ष टाकेहीको नकाओ ने मंगलवार को यहां केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि वह अगले तीन साल में भारत की सहायता राशि को बढ़ा कर 12 अरब डॉलर तक करने जा रहा है।

इस समय एडीबी की तरफ से भारत को नॉन सॉवरेन लेंडिंग 7 अरब डॉलर है, इसे 2017  तक बढ़ाकर 9 अरब डॉलर किया जाएगा। इसके बाद 2018 तक यह आंकड़ा 12 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा। एशियन डेवलेपमेंट फंड लेंडिंग ऑपरेशन के इसके ऑर्डीनरी कैपिटल रिसोर्सेस बैलेंस शीट के साथ विलय होने पर एडीबी की वर्तमान 13 अरब डॉलर सालाना लेंडिंग क्षमता बढ़कर 20 अरब डॉलर सालाना होने की उम्मीद है।

एडीबी की मार्च में प्रकाशित भारत के लिए ताजा आर्थिक अनुमान में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.8 फीसदी रहेगी और यह वित्त वर्ष 2015-16 में बढ़कर 8.2 फीसदी हो जाएगी। महंगाई में कमी आना और चालू खाता घाटा कम होने के साथ ही साथ कुछ प्रमुख क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने की वजह से ऐसे अनुमान लगाए गए हैं।

नए मोबाइल गेम में रोनाल्डो ने ह्यूगो से मिलाया हाथ

फुटबाल की दुनिया के सुपर स्टार क्रिस्टियानो  रोनाल्डो ह्यूगो सुपरस्टार स्केटर्स में गठजोड़ किया है। यह  एक नया एक्शन से भरा एडवेंचर अब  मोबाइल फोन और टैबलेट और एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस पर उपलब्ध है।  इस गेमिंग सेशन में बाधाओं से बचने की जरूरत होती है। स्केटबोर्ड को इस्तेमाल किया जाता है और सिक्कों को एकत्र किया जाता है।

 फेम और ग्लोरी के लिए ज्यादा प्लेयर्स वर्ल्ड वाइड लीडरबोर्ड्स में शामिल होते हैं तो हाई स्कोर हासिल करना कठिन हो जाता है। रोनाल्डो एंड ह्यूगो सुपरस्टार स्केटर्स खेलने के लिए आसान और छोटी और लंबी अवधि के गेमिंग सेशंस के लिए सटीक है। ह्यूगो गेम्स  के सीईओ और संस्थापक हेनरिक कोले ने कहा कि हमने ह्यूगो द ट्राल की बदौलत पहले मोबाइल गेम्स का 2.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हासिल किया है।

हमे इस बात में संदेह नहीं है कि ह्यगो द ट्राल में दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग कैरेक्टर बनने की क्षमता है। खास कर तब जब क्रिस्टियानो रोनाल्डो हमारे साथ हैं। ह्यगो गेम्स को दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स स्टार के साथ गठबंधन करने की घोषणा करने को लेकर गर्व है। 

क्रिस्टियानो अपने व्यक्तित्व और ताकत के साथ पूरी दुनिया में चाहे जाने वाले इंटरनेशनल आइकन हैं। हमने अपने गठबंधन के जरिए क्रिस्टियानो के शानदार व्यक्तित्व का अनुभव किया है। संक्षेप में कहें तो क्रिस्टियानो रोनाल्डो के साथ काम करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है। नया एक्शन एडवेंचर सोमवार से गूगल प्ले और एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध है।

आप रोनोल्डो एंड ह्यूगो: सुपरस्टार स्केटर्स यहां एड्रायड, आईफोन और आईपैड पर पा सकते हैं। इसके अलावा आप फोटो लोगो और स्क्रीन शाट्स असेट भी पा सकते हैं। यहां रोनाल्डो इंटरव्यू, न्यूज वीडियो, न्यूज वीडियो भी उपलब्ध है।

काम में देरी के चलते रद्द हुई 22 सेज की मंजूरी

विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के काम में देरी करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय की सेज मंजूरी समिति ने 22 सेज की औपचारिक मंजूरी को रद्द कर दिया। मंत्रालय इन 22 सेज के डेवलपर्स के रवैये से संतुष्ट नहीं था। इनमें से कई सेज ऐसे हैं, जिन्हें आठ-नौ साल पहले मंजूरी दी गई, लेकिन उनका अब तक विकास नहीं हो पाया था। अधिकतर सेज आईटी व आईटीईएस क्षेत्र के हैं।

मंत्रालय के मुताबिक जिन 22 सेज की औपचारिक मंजूरी को रद्द किया गाय है, उनमें सात सेज हरियाणा के हैं तो चार सेज उत्तर प्रदेश में थे। इन सभी सेज को वर्ष 2007-2010 के बीच में मंजूरी दी गई थी। हरियाणा के जिन सेज को रद्द किया गया है उनमें आईटी व आईटीएस क्षेत्र के सोहना स्थ्ति प्रोग्रेसिव बिल्डएस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के सेज, गुड़गांव स्थित जीएचआई फिनलीज एंड इंवेस्टमेंट लिमिटेड के सेज, सजवाइज प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के सेज, मोहन इंवेस्टमेंट एंड प्रोपर्टीज के सेज, सोहना बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के सेज रोज व्यू प्रोमोटर्स के सेज शामिल हैं।

 वहीं उत्तर प्रदेश के सेज में ग्रेटर नोएडा स्थित आरसी इंफोसिस्टम के सेज, नोएडा स्थित आईवीआर प्राइम आईटी सेज, ग्रेटर नोएडा के उप्पल हाउसिंग के सेज तो नोएडा स्थित सर्वमंगल रियल टेक के सेज शामिल हैं। रद्द होने वाले सेज में हरियाणा व उत्तर प्रदेश के अलावा तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के सेज भी शामिल हैं। इनमें से दो-तीन सेज को वर्ष 2006 में मंजूरी दी गई थी। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इन सेज को विकसित करने में डेवलपर्स की तरफ से उठाए गए कदम से मंत्रालय बिल्कुल संतुष्ट नहीं था।

 सूत्रों केमुताबिक सेज की मंजूरी को रद्द करने केफैसले से सरकार उन सभी सेज डेवलपर्स को यह संदेश देना चाहती है कि जल्द से जल्द सेज विकास के प्रयास में तेजी नहीं लाने पर उनके सेज की मंजूरी को भी रद्द कर दिया जाएगी। जिन सेज की मंजूरी को रद्द किया गया है, उनके इलाके विकास आयुक्त इस बात की जांच करेंगे कि कहीं इनमें से कोई डेवलपर सेज के तहत मिलने वाला सरकारी लाभ तो नहीं लिया है और अगर लिया है तो उस डेवलपर को वह लाभ लौटाना पड़ेगा।

Tuesday, June 16, 2015

22.5 फीसदी की दर से बढ़ रहा है पैकेज्ड फूड का कारोबार

पैकेज्ड फूड का कारोबार देश में पिछले पांच वर्ष में सालाना 22.5 फीसदी की दर से बढ़ा है और वर्ष 2017 तक इस बढ़ोतरी की दर 32 फीसदी तक पहुंच जाने की उम्मीद है। यह अनुमान औद्योगिक संगठन एसोचैम की एक रिपोर्ट में जताया गया है। सर्वे के मुताबिक देश में इस वक्त पैकेज्ड फूड का कारोबार करीब 1,920 अरब रुपये (30 अरब डॉलर) का है, जो 2017 तक बढ़कर 3,200.5 अरब रुपये (50 अरब डॉलर) तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में लोगों की आय में बढ़ोतरी और जीवन स्तर में सुधार होने के साथ ही पैकेज्ड फूड पर लोगों के बढ़ते भरोसे को इसकी मुख्य वजह बताया गया है।  सर्वे में बताया गया है कि पति-पत्नी दोनों के ही काम करने पर करीब 76 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को महीने में 10 से 12 बार पैकेज्ड फूड परोसना पसंद कर रहे हैं। पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल वह काम के बढ़ते दबाव व व्यस्तता के चलते जीवन को सरल बनाने के लिहाज से करते हैं।

सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल देश के शहरी इलाकों में खासतौर पर मेट्रो शहरों में काफी तेजी स बढ़ रहा है। ऐसा वहां की तेज रफ्तार जिंदगी के चलते देखने को मिल रहा है। एसोचैम की स्वास्थ्य संबंधी कमेटी द्वारा किए गए इस सर्वे में 2,200 परिवारों की राय ली गई है। इनमें बच्चों और बिना बच्चों के परिवार, एकल परिवार और अकेले रहने वाले लोग भी शामिल हैं।

सर्वे के तहत जिन शहरों में लोगों से राय ली गई उनमें मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, कोचीन, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, पटना, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून शामिल हैं। सर्वे में सभी शहरों में पैकेज्ड फूड के चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सर्वे में शहरों के साथ ही अर्ध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शहरी क्षेत्रों में जहां बढ़ोतरी की दर 80 फीसदी के करीब रही, वहीं कस्बों में यह 40 फीसदी से ऊपर और गांवों में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि पैकेज्ड फूड के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। एसोचैम की हेल्थ कमेटी काउंसिल के चेयरमैन डा. बीके राव का कहना है कि पैकेज्ड फूड में आमतौर पर काफी मात्रा में नमक मौजूद होता है। यह सेहत की दृष्टि ठीक नहीं है क्योंकि ज्यादा नमक खाने से रक्त चाप बढ़ सकता है।

इसके अलावा ऐसे उत्पादों में ट्रांस फैट भी काफी मात्रा में होता है। सेहत के लिए यह संतृप्त वसा से भी ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि यह गुड कैलेस्ट्रॉल को घटाता और बैड कैलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

नेस्ले नष्ट करेगी देश भर में मैगी हटाने का पूरा स्टॉक

बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले के उत्पाद मैगी नूडल्स पर कई राज्यों द्वारा प्रतिबंध लगाने के बीच कंपनी ने देश भर की दुकानों से इसे वापस लेने की घोषणा की। हालांकि कंपनी ने कहा है कि उनके उत्पाद में कोई गड़बड़ी नहीं है बल्कि ग्राहकों में असमंजस की स्थिति नहीं रहे, इसके लिए ऐसा कर रहे हैं।

नेस्ले के ग्लोबल सीईओ पॉल बल्के ने यहां शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत में मैगी पर जो विवाद हो रहा है, उससे ग्राहकों के बीच असमंजस की स्थिति है। ग्राहकों का विश्वास इस उत्पाद पर बना रहे, इसके लिए देश भर में इसकी बिक्री रोकने का निर्णय लिया गया।

जब उनसे पूछा गया कि मैगी में लेड या एमएसजी की कितनी मात्रा है तो उन्होंने बताया कि इसमें इन रसायनों की उपस्थिति शून्य है और उनका उत्पाद पूरी तरह से सुरक्षित है। उनका कहना है कि वह मैगी में अलग से इस तरह का कोई रसायन नहीं मिलाते। कंपनी ने मैगी के 1000 बैच में से सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच करायी है और सारे सैंपल सुरक्षित पाये गए।

उनसे जब यह पूछा गया कि विभिन्न राज्यों ने जो सैंपल जांच करायी, उसमें प्रयोगशाला की रिपोर्ट गलत है, इस पर उनका कहना था कि नेस्ले को यह नहीं पता कि उन प्रयोगशालाओं ने जांच के दौरान क्या प्रक्रिया अपनायी। लेकिन इतना तय है कि उनका उत्पाद सुरक्षित है। पॉल बल्के ने बताया जब यह विवाद थम जाएगा तो वह फिर से मैगी का उत्पादन शुरू करेंगे। उसके बाद जो उत्पाद बाजार में आएगा, उसमें लिखा होगा ‘नो एमएसजी’।

इस बीच खाद्य क्षेत्र में केन्द्रीय नियामक एफएसएसएआई ने मैगी टू मिनट नूडल्स को मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए ‘असुरक्षित एवं खतरनाक’ बताते हुए इसका उत्पादन, आयात और बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकने और उत्पाद को वापस मंगाने का निर्देश दिया है।  यही नहीं एजेंसी ने कहा है कि नेस्ले ने ‘मैगी ओट्स मसाला नूडल्स’  को बिना प्रोडक्ट अप्रूवल लिये बाजार में उतार दिया है। इसके लिए अभी तक रिस्क और सेफ्टी असेसमेंट हुआ ही नहीं है। 

एफएसएसएआई ने कंपनी को एक कारण बताओ नोटिस भी भेजा है कि उसके सभी नौ उत्पादों को दिए गए प्रोडक्ट अप्रूवल को क्यों नहीं वापस ले लिया जाए। नेस्ले को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। एजेंसी के मुताबिक नेस्ले ने मैगी ओट्स मसाला नूडल्स  के लिए पिछले जुलाई में प्रोडक्ट अप्रूवल का आवेदन दिया था। इस पर कुछ स्पष्टीकरण मांगा गया था और यह प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। तब भी कंपनी ने इसे बाजार में उतार दिया ।

डिस्कवरी चैनल योग दिवस पर दिखाएगा द स्टोरी ऑफ योगा

डिस्कवरी चैनल पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग पर खास कार्यक्रम ‘द स्टोरी ऑफ योगा’ प्रसारित करने जा रहा है। 21 जून को रात 9 बजे प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम में योग के जरिए शरीर, मन और आत्मा को एकाकार करने पर विस्तृत जानकारी दर्शकों को दी जाएगी। इसमें योग की उत्पत्ति से लेकर उसकी अबतक की यात्रा को दर्शाया जाएगा। यह कार्यक्रम हिन्दी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु और बांग्ला भाषा में दिखाया जाएगा।

एक घंटे के इस कार्यक्रम में योग के उद्भव, उद्विकास, आध्यात्मिता, योग के रहस्यों और उसके सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम में योग के भारत से निकल कर पश्चिमी जगत में पहुंचने और वहां के आधुनिकतावादी समाज में इस पारंपरिक विधा के लोकप्रिय होने की कहानी भी दिखाई जाएगी।

डिस्कवरी नेटवर्क एशिया-प्रशांत क्षेत्र के ईवीपी व जीएम दक्षिण एशिया राहुल जौहरी ने बताया कि ‘द स्टोरी ऑफ योगा’ कार्यक्रम में योग की प्राचीनता से लेकर आधुनिक जीवन शैली के साथ इसके समन्वय तक को सम्मिलित करते हुए इस विषय पर गहरी और व्यापक जानकारी दर्शकों को मुहैया कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि योग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई पहल के साथ जुड़कर हम खासे उत्साहित हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत में उनकी अहम भूमिका रही है। योग को एक जनआंदोलन में परिवर्तित करके इसे दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाने को लेकर उनके उत्साह और पहल का हम सम्मान करते हैं।

गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान साल में एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाए जाने की अपील की थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की ओर से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया है। इस साल पहली बार दुनिया में इसे मनाया जाएगा।

कार्यक्रम में योग के परंपरागत दृष्टि कोण के साथ इसकी अनूठी शैलियों को भी पेश किया जाएगा। इसके साथ ही इसमें योग सिखाने वाले नई पीढ़ी के गुरुओं-प्रशिक्षकों और संस्थानों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इनमें पुणे स्थित आयंगर स्कूल, मुंगेर का बिहार स्कूल ऑफ योग, पांडिचेरी का आंतरिक योग संस्थान, ऋषिकेश का शिवानंद आश्रम शामिल है। कार्यक्रम में इन योगपीठों में योग की ऐसी तकनीकों और दर्शन को प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आमतौर पर लोग परिचित नहीं हैं।

निर्यातकों को मिल सकती है ब्याज दरों में छूट

ब्याज दरों में छूट दिए जाने की निर्यातकों की पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। सरकार निर्यातकों को जून माह के अंत तक ब्याज दरों में राहत दे सकती है। ब्याज दरों में यह छूट तीन फीसदी की होगी। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक जून आखिर से जुलाई के पहले सप्ताह तक ब्याज दरों में छूट के मद में आवंटित फंड के भुगतान की घोषणा की जा सकती है। निर्यातकों के मुताबिक ब्याज दरों में छूट मिलने से इस चुनौतीपूर्ण समय में उन्हें थोड़ी सी राहत जरूर मिलेगी।

वाणिज्य मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक ब्याज दरों में छूट के मद में वित्त मंत्रालय की तरफ से 1,723 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। एक अप्रैल को विदेश व्यापार नीति की घोषणा के दौरान वाणिज्य सचिव ने निर्यातकों को ब्याज दरों में छूट मिलने की बात कही थी। मंत्रालय के मुताबिक ब्याज दरों में तीन फीसदी की छूट एमएसएमई निर्यातक व रोजगारपरक क्षेत्रों के निर्यातकों को दी जाएगी। इनमें हैंडीक्राफ्ट्स, कार्पेट, गारमेंट जैसे निर्यात क्षेत्र शामिल हैं।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ब्याज दरों में छूट पिछले साल अप्रैल से दी जाएगी या इस साल अप्रैल से। एमएसएमई व रोजगारपरक क्षेत्र के निर्यातकों को पिछले साल मार्च तक ब्याज दरों में तीन फीसदी की छूट मिल रही थी। उसके बाद से ब्याज दरों में छूट की इस स्कीम को जारी रखा जाएगा या नहीं, यह खुलासा नहीं किया गया है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन के मुताबिक ब्याज दरों में छूट मिलने पर निर्यातकों की ब्याज दर 8-9 फीसदी तक आ जाएगी, लेकिन उन्होंने सरकार से निर्यातकों को 4 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि छूट शुरू होने पर निर्यातकों को थोड़ी सी राहत मिलेगी, लेकिन निर्यात में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए यह राहत काफी कम है। पिछले तीन महीने से निर्यात में गिरावट हो रही है। वैश्विक हालात को देखते हुए मई महीने के निर्यात में भी गिरावट की आशंका है। निर्यातकों के मुताबिक सरकार को नए बाजार में निर्यात पर भी इंसेंटिव देने की घोषणा करनी चाहिए।

मांग में सुधार होने पर भी सुस्त पड़ेगी रिटेल सेक्टर की रफ्तार

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने वित्त वर्ष 2015-16 में देश के रिटेल सेक्टर के लिए निगेटिव टू स्टेबल आउटलुक को बरकरार रखा है। ऐजेंसी ने घरेलू मांग में कुछ सुधार आने के आसार जताए हैं। रिपोर्ट में महंगाई में कमी आने से नॉन ड्यूरेबल वर्ग की वस्तुओं की मांग में सुधार आने की सभावना व्यक्त की गई है। हालांकि जमा की ब्याज दरों में स्थिति सकारात्मक बने रहने के चलते लोगों द्वारा अपनी बचत की राशि को खर्च करने के बजाय निवेश करने का नजरिया भी अपनाया जाएगा।

देश भर में रिटेल क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों की राय पर आधारित इस रिपोर्ट में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के चलते कॉरपोरेट सेक्टर के मुनाफे को अगले 12 से 18 माह के दौरान 0.70 फीसदी तक के दायरे में सीमित रखेगी। हालांकि 2016 और 2017 में वेतन वृद्धि नाममात्र रहने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। ऐसा 2015 और 2016 में रिटेल सेक्टर की आय में बढ़ोतरी काफी कम रहने के चलते होगा।

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों के व्यय में बढ़ोतरी सुस्त रहेगी। ऐसा मौसम और उसके चलते फसल को लेकर अनिश्चितता की स्थिति और राज्य व केंद्र सरकारों की ओर से इस क्षेत्र पर किए जाने वाले व्यय में गिरावट के चलते देखने को मिलेगा।

रिपोर्ट में रिटेल सेक्टर की विकास दर 2015-16 में पांच फीसदी के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। विकास दर में यह सुस्ती बिक्री और उसके चलते कंपनियों को होने वाली आय में होने वाली बढ़ोतरी की रफ्तार सुस्त रहने के चलते रहेगी। इसके अलावा ई-कॉमर्स से प्रतिस्पर्धा का और अधिक बढ़ना पारंपरिक कारोबार क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।

हालांकि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ग्राहकों तक सामान पहुंचाने (लॉजिस्टिक्स) की ऊंची लागत और ऑनलाइन स्टोरों द्वारा दी जा रही भारी-भरकम छूट इस सेक्टर के लिए भी एक मुश्किल साबित होगी। यह लंबे समय के लिए कारगर कारोबारी मॉडल की दृष्टि से ई-कॉमर्स के लिए एक चुनौती बनेगी। हालांकि ऑनलाइन रिटेलर जब तक कारोबार में पूंजी लगाने में सक्षम बने रहेंगे, तब तक उनका कारोबार इसी तरह आक्रामक ढंग से आगे बढ़ता रहेगा।

एक्सिस बैंक में अब मोबाइल से ही खुलवाइये लॉकर

देश के सबसे बड़े निजी बैंक एक्सिस बैंक ने ग्राहकों को मोबाइल ऐप के जरिए लॉकर की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा की पेशकश की है। इसके अंतर्गत ग्राहक अब बैंक के मोबाइल एप्लीकेशन में लॉग इन कर अपनी मनपसंद शाखा में लॉकर के विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं। वह मैनुअली अथवा जियो-सेलेक्शन विकल्प के जरिये इस सेवा का लाभ उठाने के लिए शाखा का चयन कर सकते हैं।

लॉकर का चुनाव करने के बाद ग्राहक को बुकिंग पेज पर भेजा जाएगा। यह पेज लॉकर का सालाना किराया अदा करने के लिए बचत खाते से एकीकृत है। ग्राहक के लिए बनाया गया बुकिंग आइडी 7 दिनों के लिए वैध होगा। ग्राहक को लॉकर खुलवाने के लिए 7 दिनों के भीतर शाखा में अवश्य जाना होगा।

पसंदीदा शाखा में लॉकर की उपलब्ध न होने की स्थिति में ग्राहक को प्रतीक्षा सूची में डाल कर एक प्रतीक्षा सूची संख्या प्रदान की जाएगी। बैंक के मुताबिक समूची प्रक्रिया को रीयल टाइम आधार पर अपडेट किया जाता है  जिससे ग्राहकों को पारदर्शी एवं सरलीकृत बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होती है।

एक्सिस बैंक के ग्रुप एक्जीक्यूटिव एवं हेड-रिटेल बैंकिंग, राजीव आनंद का कहना है कि हम लॉकर्स की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा देने वाले देश के पहले बैंक हैं। हमें भरोसा है कि यह नई सुविधा देश में लॉकर्स बुक कराने की अवधारणा में क्रांति लेकर आएगी।

एचडीएफसी बैंक की वन-क्लिक मोबाइल भुगतान सेवा पेजैप लांच

एचडीएफसी बैंक ने अपनी डिजिटल सेवाओं का विस्तार करते हुए पेजैप नाम के एक भुगतान समाधान की शुरुआत की है। इए मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके मोबाइल फोन टॉप-अप से लेकर तत्काल मनी ट्रांसफर, बिल पेमेंट, शॉपिंग, यात्रा और मूवी टिकट बुकिंग ही नहीं, बल्कि विदेशों में छुट्टियों के लिए टिकट खरीदने जैसे काम भी महज एक क्लिक में किए जा सकेंगे। पेजैप के अंदर स्मार्ट बाय नाम से एक  आभासी मेगा मार्केट प्लेस दिया गया है। यह एक मॉल की ही तरह आपकी खरीदारी संबंधी जरूरतों तक को पूरा करता है।

एचडीएफसी बैंक का कहना है कि उसकी ओर से शुरू की जा रही इस सुविधा से मोबाइल उपकरणों के माध्यम से होने वाले भुगतान और खरीदारी में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा। पेजैप एचडीएफसी बैंक की ओर से डिजिटल बैंकिंग की पेशकश ‘गो डिजिटल’ के तहत एक नवीनतम पहल है। यह बैंक की मुख्य डिजिटल सोच ‘बैंक आपकी मुट्ठी में’ से मेल खाता है, जिसमें ग्राहक के हाथ में बैंकिंग की शक्ति दी जाती है।

पेजैप और स्मार्टबाय  के जरिए ग्राहकों को एक साथ फ्लिपकार्ट, क्लीयरट्रिप, गोआईबिबो, एक्सपीडिया जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स पोर्टलों के सभी सौदे एवं ऑफर वगैरह उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही मोबाइल, डीटीएच के रिचार्ज एवं बिल भुगतान की सुविधा भी मिल रही है। पेजैप एकल पिन का उपयोग कर जल्दी और आसानी से चेकआउट सुनिश्चित करने वाली देश की पहली वन-क्लिक भुगतान प्रणाली है।

पेजैप में हर खरीदारी के लिए बार-बार क्रेडिट या डेबिट कार्ड नंबरों और उनके सुरक्षा कोड दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा पेजैप किसी सौदे की प्रामाणिकता का निर्धारण करने के लिए कार्ड नंबर के साथ बैंक में पंजीकृत उपकरण का मिलान करके सुरक्षा को बढ़ाता है।

पेजैप के साथ उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी का उपयोग कर किसी को भी तुरंत मनी ट्रांसफर कर सकते हैं। इस ऐप्लिकेशन में नेटसेफ  वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय कार्ड भी बनाया जा सकता है। इसमें दैनिक या मासिक सीमा पर कोई प्री-पेड कार्ड प्रतिबंध नहीं, क्योंकि इसमें भुगतान संबद्ध कार्डों के माध्यम से किया जाता है। भुगतान करने के लिए पैसा डालने (लोड मनी) की भी कोई जरूरत नहीं होती।

उत्तर में तेजी से फैल रहा है कॉरपोरेशन बैंक का नेटवर्क

कॉरपोरेशन बैंक के सीएमडी एसआर बंसल का कहना है कि मैंने 5 अक्तूबर 2013 को इस बैंक में कार्यभार संभाला। तब से अब तक स्थिति में काफी सुधार हुआ। मैंने अपना पांच फोकस प्वाइंट निर्धारित किए और उसके हिसाब से काम शुरू किया। यही नहीं, हमने शाखा विस्तार पर आक्रामक ढंग से काम करना शुरू किया। इसके अलावा हमने देखना शुरू किया किस तरह से खर्च घटाये जा सकते हैं।

हमने शाखाओं के लिए लंबी-चौड़ी जगहों के बदले कम जगह में भी कॉम्पेक्ट ब्रांच की अवधारणा शुरू की। यही नहीं, हमने गार्ड की संख्या में कटौती की। इससे हर साल बैंक को सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत हो रही है। हमने पिछले साल अक्तूबर में इसी चीज की एक रिपोर्ट बना कर केंद्रीय बैंकिंग सचिव को दी थी। उन्होंने इस रिपोर्ट की कॉपी सभी बैंक के सीएमडी को भेजी कि इस तरह से आप भी खर्च में कटौती कर सकते हैं। इसकी सब जगह तारीफ हो रही है।

हमें दक्षिण भारतीय बैंक माना जाता था, लेकिन अब ऐसा है नहीं। अभी देखें, तो हमारी देश भर में 2,300 से भी ज्यादा शाखाएं हैं। बीते शनिवार को ही दिल्ली एनसीआर में फरीदाबाद के सेक्टर 31 में 2,303वीं शाखा खोली है।

आप देखें तो इस समय उत्तर भारत में हमारी 1,000 से भी ज्यादा शाखाएं काम कर रही हैं। उत्तर भारत में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर तो हमारा विशेष ध्यान है। तभी तो यहां हमने तीन क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ, लखनऊ और वाराणसी में खोला है। वाराणसी का क्षेत्रीय कार्यालय पिछले वर्ष ही खुला है।

हम देश के अन्य हिस्सों पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, जितना कि दक्षिण या उत्तर भारतीय राज्यों में। हम पश्चिम भारतीय राज्य गुजरात के राजकोट में अपना 34वां क्षेत्रीय कार्यालय खोल रहे हैं। वहां क्षेत्रीय कार्यालय में काम 1 जून से शुरू हो गया है पर औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन होना बाकी है।

इसके अलावा हमने पूर्वोत्तर के गुवाहाटी में भी अपनी शाखा शुरू की है। वहां एक अधिकारी को सिर्फ इसलिए पदस्थापित किया है कि वह वहां विस्तार की संभावना को तलाश सके। बिहार और पश्चिम बंगाल पर भी हमारा विशेष ध्यान है।

कर्मचारी तो शाखा के हिसाब से बढ़ते हैं। हमने वर्ष 2013-14 में करीब 2,000 कर्मचारियों की भर्ती की। 2014-15 में भी इतनी ही कर्मचारियों की भर्ती की। चालू वित्त वर्ष के दौरान भी हमने करीब 1,850 कर्मचारियों की भर्ती का लक्ष्य तय किया है।

इस समय मैं कह सकता हूं कि अब हमारे यहां कर्मचारियों की संख्या को लेकर कोई परेशानी नहीं है। आपको यह भी जान कर आश्चर्य होगा कि हम इन्हें तैनाती से पहले काफी एडवांस ट्रेनिंग पुणे में दिलवाते हैं। यह वही केंद्र है, जहां रिजर्व बैंक के अधिकारियों को ट्रेनिंग मिलती है।

हमारा मुख्य ध्यान तो बचत खाता और चालू खाता जमाओं (कासा डिपॉजिट) को बढ़ाने पर है। इसके अलावा हम एसएमई, रिटेल और कृषि ऋण पर ज्यादा जोर रहेगा।

जब बैंकों का एनपीए बढ़ रहा है, तो स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था का असर इस पर भी है। जहां तक हमारी बात है, तो मार्च 2015 में हमारा ग्रॉस एनपीए 4.80 था। यह एक साल पहले की इसी अवधि के 3.42 फीसदी के मुकाबले 1.38 फीसदी ज्यादा है।

एयर इंडिया यात्रियों को दिल्ली, मुंबई में ही मिल सकती है अमेरिकी प्रीक्लियरेंस

सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया की कोशिश रंग लाई, तो भारत से अमेरिका जाने वाले यात्रियों को कस्टम क्लियरेंस और इमिग्रेशन की सुविधा अब भारत के दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर भी मिल सकेगी। इस समय आबू धाबी, कनाडा, कुछ कैरिबियाई देश और आयरलैंड के हवाई अड्डे पर अमेरिकी प्रीक्लियरेंस की सुविधा उपलब्ध है।

एयर इंडिया ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह उनके यात्रियों के लिए दिल्ली एवं मुंबई हवाई अड्डे पर अमेरिकी प्रीक्लियरेंस सुविधा उपलब्ध कराने में मदद करे। यदि ऐसा होता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले यात्री यहां से क्लियरेंस करवा कर विमान में चढ़ेंगे और अमेरिकी हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उसी तरह चल देंगें जैसे कि कोई घरेलू यात्री हो।

अमेरिका के कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) कार्यक्रम के अनुसार वहां आने वाले हर विदेशी यात्री को इमिग्रेशन, कस्टम और एग्रीकल्चर क्लियरेंस करवाना पड़ता है। इसके लिए वहां के हवाई अड्डों पर लंबी लाइन लगती है और यह काफी थकाऊ काम माना जाता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया के कुछ हवाई अड्डों पर प्रीक्लियरेंस की सुविधा दे रखी है, जिनमें पश्चिम एशिया का आबू धाबी हवाई अड्डा भी शामिल है।

 इन दिनों एयर इंडिया की नींद इसलिए उड़ी हुई है कि उसकी के अमेरिका जाने वाले डाइरेक्ट फ्लाइटों में यात्रियों की संख्या में गिरावट आ रही है। आबू धाबी के इतिहाद एयरवेज से भारतीय विमानन कंपनी जेट एयरवेज का समझौता है और जेट एयरवेज देश के 23 हवाई अड्डों से आबू धाबी के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की तैयारी में है। यदि ऐसा हुआ, तो भारत से अमेरिका जाने वाले यात्री इतिहाद एयरवेज ही पंसद करेंगे। इसलिए एयर इंडिया ने भी यहीं अपने यात्रियों को अमेरिकी प्रीक्लियरेंस सुविधा देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

मानसून में देरी, फसलों की बुवाई में आई 9 फीसदी की कमी

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते गर्मी की फसलों की बुवाई 9 फीसदी कमी देखने को मिली है। इस दौरान मोटे अनाजों के रकबे में सबसे ज्यादा गिरावट हुई है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक गर्मी में बोए जाने वाले मोटे अनाजों की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। 12 जून तक इसकी बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 60 फीसदी घटी है।

दलहनी फसलों की बुवाई भी करीब 11 फीसदी घटी है, जबकि धान की बुवाई का रकबा करीब 4.2 फीसदी बढ़ा है। यदि कपास और गन्ना जैसे नकदी फसलों में देखें, तो उसमें भी बुवाई का रकबा घटा है। कपास की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले 18 फीसदी घटा है, जबकि गन्ने का रकबा 4.5 फीसदी घटा है। अभी तक गर्मी की फसलों की बुवाई 75.10 हेक्टेअर क्षेत्र में हो पाई है, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 82.27 लाख हेक्टेअर में बुवाई हुई थी।

घरेलू उपयोग के लिए भारत में आधे से ज्यादा खाद्य तेलों और करीब 20 फीसदी दालों का आयात करना पड़ता है। यदि बारिश की वजह से इन फसलों की बुवाई ही कम हो रही है तो इसके लिए आयात पर निर्भरता और बढ़ सकती है। हालांकि सरकार के लिए राहत की बात यह है कि दुनिया भर के बाजारों में इस समय खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ी नहीं हैं।

मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल 88 फीसदी ही बारिश होगी। यदि यह सही हुई, तो स्थिति और बिगड़ेगी। वैसे केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि मानसून खराब होने की स्थिति में दालों और खाद्य तेलों की कोई कमी नहीं रहेगी, क्योंकि सरकार इन पदार्थों का आयात बढ़ाएगी।

Friday, April 24, 2015

श्याओमी ने भारत में की अपने स्मार्टफोन एमआई 4 आई की ग्लोबल लांचिंग

स्मार्टफोर्न बनाने वाली कंपनी श्याओमी ने अपने स्मार्ट फोन एमआई 4 आई की ग्लोबल लांचिंग नई दिल्ली में की। श्याओमी ने दुनिया भर के उपभोक्ताओं को ध्यान में रख कर नया स्मार्टफोन अपनी दमदार डिजाइन और इंजीनियरिंग क्षमताओं के साथ एक शानदार स्मार्टफोन तैयार किया है।

उचित आकार के कारण हाथ में एमआई 4 आई पकड़ने में कोई असुविधा नहीं होती है। इसमें संपूर्ण एडी स्क्रीन और बिल्कुल नया सनलाइट डिस्प्ले जैसी खूबियां हैं। इसे उच्च कोटि के आपूर्तिकर्ताओं और विश्वस्तरीय निर्माता सहयोगियों के साथ मिल कर बनाया गया है। एमआई 4 आई श्याओमी का सबसे पहला एमआईयूआई 6 उपकरण है, जो एंड्रायड एल तकनीक से लैस है।

ग्लोबल लांचिंग के तहत एमआई 4 आई की बिक्री पहले भारत में शुरू होगी। यहां इसकी कीमत 12,999 रखी गई है। इसकी खरीदारी के लिए फ्लिपकार्ट पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है और इसकी बिक्री 30 अप्रैल, 2015 से आरंभ होगी। मई महीने में एमआई 4 आई को श्याओमी को अन्य विदेशी बाजारों हांगकांग, ताइवान, सिंगापुर, ताइवान, मलयेशिया और इंडोनेशिया में लांच किया जाएगा। इससे कंपनी की विश्वव्यापी योजनाओं के प्रति उसकी गंभीरता का पता चलता है।


श्याओमी ग्लोबल के वाइस प्रेसीडेंट ह्यगो बारा ने सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में एमआई इंडिया के 1,500 से अधिक प्रशंसकों के सामने कंपनी के इस चिरप्रतीक्षित स्मार्टफोन का अनावरण किया है। इस अवसर पर श्याओमी के संस्थापक एवं सीईओ लेइ जन और सह संस्थापक एवं प्रेसीडेंट बिन लिन भी उपस्थित थे, जिन्होंने एमआई इंडिया के प्रशंसकों के समर्थन को लेकर आभार जताया।

इस मौके पर श्याओमी के संस्थापक एवं सीईओ लेइ जन ने कहा कि श्याओमी के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण देश है। हमारे लिए यह चीन के बाहर सबसे बड़ा विदेशी बाजार है और मैं सचमुच इस बात को लेकर रोमांचित हूं कि एमआई 4 आई को सबसे पहले भारत में लांच किया गया है।

इसके बाद यह दुनिया के अन्य देशों में उपलब्ध होगा। हम भारत और अन्य बाजारों के लिए और अधिक उत्पाद लांच करेंगे, क्योंकि हमारा ध्यान प्रशंसकों को दोस्त बनाने और उनकी जरूरतों के अनुसार नए नए उत्पादों का निर्माण करने पर केंद्रित है।

टाटा प्रोजेक्ट्स वाले ब्रूकफील्ड मल्टीप्लेक्स वालों से मिलाए हाथ

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने विश्व के अग्रणी निर्माण कंपनी ब्रूकफील्ड मल्टीप्लेक्स के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है जिससे कि पूरे भारत भर में व्यावसायिक एवं खुदरा, आवासीय, स्वास्थ्य-देखभाल तथा पर्यटन व मनोरंजन संबंधी परियोजनाओं की श्रृंखला को स्वरूप दिया जा सके।

ब्रूकफील्ड मल्टीप्लेक्स एक ऑस्ट्रेलियाई मुख्यालय वाली कंपनी है जिसे सिडनी के स्काइलाइन को बदलने के लिए जाना जाता है और साथ ही इसे मिडिल ईस्ट और यूरोप में भी इसे इसके अनूठे भवनों के लिए अच्छी खासी प्रसिद्धि प्राप्त है।

इसने 61 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत मूल्य की 900 से अधिक परियोजनाओं को मूर्तरूप दिया है। जबकि टाटा प्रोजेक्ट्स अधोसंरचना निर्माण में एक अग्रणी कंपनी है और इसने अब तक 14,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की परियोजनाओं को हाथ में लिया है।

कंपनी सचिवों के लिए जारी हुए नए सचिवीय मानक

फंड मैनेजरों और विदेशी निवेशकों का अब भारतीय बाजार में विश्वास बढ़ेगा क्योंकि भारतीय कंपनी सचिव संस्थान ने कंपनी कानून 2013 की धारा 118(10) के अनुरूप नया सचिवीय मानक औपचारिक रूप से जारी कर दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु भखरू ने इसे जारी किया। इस अवसर पर कंपनी लॉ बोर्ड के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिलीप रावसाहब देशमुख भी उपस्थित थे।

न्यायमूर्ति विभु भखरू ने इस अवसर पर कहा कि इस समय भारतीय कंपनी सचिव संस्थान दुनिया भर में अकेला ऐसा संस्थान है जिसने सचिवीय मानक जारी किया है। इससे न सिर्फ उद्योग जगत को लाभ होगा बल्कि नियामक को भी मदद मिलेगी।

इससे देश में कारोबारी माहौल तो बेहतर होगा ही, संस्थानिक निवेशकों का भी विश्वास बढ़ेेगा। कंपनी सचिव संस्थान के अध्यक्ष अतुल एच मेहता ने बताया कि नए सचिवीय मानक से निवेशकों, खास कर फंड मैनेजरों और विदेशी निवेशकों के बीच बेहतर संदेश जाएगा। क्योंकि ऐसे निवेशक बेहतर शासन के नियमों का पालन तो करते ही हैं, इसी तरह का माहौल भी चाहते हैं।

ईबे वाले बेचने जा रहे हैं गुप्त कालीन सिक्के

उत्तर व दक्षिण भारत के 2,000 वर्ष पुराने चांदी व तांबे के सिक्के, गुप्त वंश के सम्राट समुद्र गुप्त के सोने के सिक्के अब ईबेडॉटइन पर बोली के लिए उपलब्ध होंगे। क्वायन, बैंक नोट और मेडल के डीलर और आक्शनर मरुधर आर्ट्स ने ईबेडॉटइन पर सिक्कों के एक्सक्लूसिव आक्शन के साथ अपना ब्रांड स्टोर लांच किया है। यह पहली बार है कि जाने माने डीलर और आक्शनर ने एंटीक्स और विंटेज कलेक्टिबिल कलेक्शन को ई कॉमर्स प्लेटफार्म पर लिस्ट किया है।

ईबे इंडिया के ग्राहकों के पास अब कई शताब्दियों पुराने यूनिक और एक्सक्लूसिव कलेक्शन के लिए बोली लगाने का अवसर होगा। इसके अलावा ईबेडॉटन इन पर दूसरी सदी ईसवी से कुषाण वंश के सोने के सिक्के, तत्कालीन मुगल काल में अकबर, जहांगीर और अन्य बादशाहों के चांदी व सोने के सिक्के, बीकानेर, जयपुर, हैदराबाद, मैसूर इत्यादि रजवाड़ों के सिक्के, ब्रिटिशकालीन भारत और भारत गणराज्य के विभिन्न बैंक नोट भी उपलब्ध होंगे।

ईबे इंडिया के प्रमुख (संचार) गिरीश हुरिया ने कहा कि प्राचीन सिक्के व नोट और डाक टिकट ईबे डॉट इन पर बिकने वाली सबसे पुरानी वस्तुएं हैं। अब इस पहल में मरुधर आर्ट्स द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे इस विशिष्ट संग्रह में से कुछ खरीदकर हमारे देश के समृद्ध और विविध इतिहास का अनुभव करना चाहेंगे।

मरुधर आर्ट्स के निदेशक अर्चि मरू ने कहा कि ईबे डॉट इन पर सिक्कों व बैंक नोट की एक्सक्लूसिव नीलामी करने से ईबे डाट इन के ग्राहकों का ज्ञान आधार काफी समृद्ध होगा और उन्हें इसके बारे में अधिक जानने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे ग्राहकों को बिना किसी आशंका या संदेह के असली सिक्कों के लिए बोली लगाकर अपने कलेक्शन को समृद्ध करने का मौका मिलेगा।

सीजीसीईएल में अवांता समूह बेचेगा अपनी हिस्सेदारी

अवांता समूह क्रॉम्पटन ग्रीव्स के उपभोक्ता उत्पाद कारोबार में अपनी 34.37 फीसदी की पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रहा है। वह अपनी हिस्सेदारी इक्विटी निवेश करने वाली फर्म एडवेंट इंटरनेशनल और टेमासेक को 2,000 करोड़ रुपये में बेचेगा।

इसके बाद यह दोनों निवेशक कंपनियां ओपेन ऑफर के जरिए कंपनी की और हिस्सेदारी खरीद कर क्रॉप्टन ग्रीव्स का स्वामित्व हासिल करने का प्रयास करेंगी। इसके बाद क्रॉप्टन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स (सीजीसीईएल) को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध कराया जाएगा।

हिस्सेदारी की खरीद के लिए हुए इस सौदे में सीजीसीईएल का मूल्य कुल 6,600 करोड़ रुपये आंका गया है। गौरतलब है कि क्रॉम्पटन ग्रीव्स का बोर्ड फरवरी में अपने कंज्यूमर उत्पाद का कारोबार करने वाली इकाई सीजीसीईएल का अलग किए जाने की मंजूरी दे चुका है।

हिस्सेदारी की बिक्री के लिए हुए इस सौदे के तहत सीजीसीईएल में टेमासेक की भूमिका एडवेंट के साथ एक सह निवेशक के रूप में होगी। सौदे की शर्तों के अनुसार सीजीसीईएल को क्रॉपटन ग्रीव्स से अलग इकाई के रूप में एनएसई और बीएसई में सूचीबद्ध कराया जाएगा।

अवांता समूह के संस्थापक और चेयरमैन गौतम थापर ने इस सौदे के बारे में कहा कि  एडवेंट और टेमासेक दोनों के ही पास वित्तीय क्षेत्र और कारोबार के संचालन का लंबा अनुभव है। हमें विश्वास है कि यह दोनों कंपनियां सीजीसीईएल को विकास के अगले दौर में ले जाने का काम काफी बेहतर ढंग से कर सकेंगी।

इनफोसिस वाले ज्यादा फायदा कमाए ‌इस बार

देश में आईटी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी इनफोसिस ने जनवरी-मार्च तिमाही में अपने समेकित शुद्ध लाभ में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। बीती तिमाही में कंपनी ने 3,097 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। साल भर पहले जनवरी-मार्च 2014 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 2,992 करोड़ रुपये रहा था।

कंपनी की ओर से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को दी गई जानकारी के मुताबिक बीती तिमाही में कंपनी की आय 4.2 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी के साथ 13,411 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी की आय 12,875 करोड़ रुपये रही थी।

हालांकि तिमाही आधार पर तुलना करने पर इनफोसिस के मुनाफे और आय दोनों में ही गिरावट दर्ज की गई है। अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी को 3,250 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस तरह जनवरी-मार्च में तिमाही आधार पर उसका मुनाफा 4.7 फीसदी घटा है।

इसी तरह आय 13,796 करोड़ रुपये के मुकाबले 2.8 फीसदी घट गई। कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 में अपनी आय में 10 से 12 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है, जबकि आईटी क्षेत्र की संस्था नॉस्कॉम ने आय में 12 से 14 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है।

Thursday, April 23, 2015

ऑडी की स्पोर्ट्स कार टीटी का नया वर्जन लांच

लक्जरी कारें बनाने वाली जर्मनी की कंपनी ऑडी ने भारत में अपनी स्पोर्ट्स कार टीटी का नया वर्जन पेश किया है। दिल्ली में इसकी एक्स शोरूम कीमत 60.34 लाख रुपये रखी गई है। ऑडी ने इस नए वर्जन को भारतीय लक्जरी कार बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बरकरार रखने की कोशिश के तहत पेश किया है।

ऑडी इंडिया के प्रमुख जो किंग ने बताया कि यह अगले पांच महीनों में लांचिंग के लिए प्रस्तावित 5 कारों में से पहली पेशकश है। बीते वर्ष आर्थिक सुस्ती के बावजूद कंपनी ने वृद्धि दर्ज की है। ऑडी ने मर्सिडीज-बेंज से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए इस साल भारतीय बाजार में कुल 10 कारें लांच करने की योजना बनाई है।

गौरतलब है कि ए-3 सिडान और क्यू-5 एसयूवी बेचने वाली ऑडी ने जनवरी-मार्च, 2015 के दौरान मर्सिडीज-बेंज को पीछे छोड़ दिया है। ऑडी ने मार्च तिमाही में 3,139 इकाइयों के साथ 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की थी। ऑडी ने 2014-15 के दौरान अपनी बिक्री में रिकॉर्ड 11.51 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की थी और लक्जरी कार बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बरकरार रखी है।

टाटा मोटर्स पेश करेगी नैनो का ऑटोमेटिक वर्जन

टाटा मोटर्स ने नैनो के सभी मौजूदा ग्राहकों के लिए एक एक्सक्लूसिव कैंपेनशुरू करने की घोषणा की। इस प्रोग्राम के साथ नैनो के ग्राहकों को मौका सबसे पहले नई जेनएक्स नैनो ईजी शिफ्ट (ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन) खरीदने का। नैनो का यह नया संस्करण अगली पीढ़ी के लिए ढेर सारे रोमांचक फीचरों के साथ आ रहा है।

इसके जरिए नैनो के मालिकों को उनकी पुरानी नैनो के लिए बाज़ार में सबसे बेहतर कीमत दी जाएगी और उन्हें पुरानी कार की कीमत के अतिरिक्त 20,000 रुपये का विशेष बोनस भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त नैनो के ग्राहक रेफरल प्रोग्राम में भी शामिल हो सकते हैं, जिसके तहत उन्हें प्रत्येक रेफरल के लिए 5,000 रुपये मिलेंगे। ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए टाटा मोटर्स ने तरज़ीही वित्तीय पार्टनरों के साथ करार किया है।

टाटा मोटर्स के अध्यक्ष, यात्री वाहन कारोबार इकाई मयंक पारीक ने कहा कि हॉरिजनेक्स्ट यात्रा के हिस्से के तहत अब हम नवीनतम तकनीकी एडवांस्मेंट के साथ जेनएक्स नैनो लेकर आ रहे हैं। यह ग्राहकों को श्रेणी में सबसे बेहतरीन तकनीक और डिजाइन इंजीनियरिंग के साथ शानदार फीचर वाले उत्पाद पेश करने की हमारी निरंतर कोशिश का ही नतीजा है। पेश करने के समय ही नैनो एक ऐतिहासिक, उत्पाद रहा है, जो इस श्रेणी में सबसे बेहतरीन वैल्यू देती है और लॉन्च के समय से अभी तक 2.5 लाख से अधिक नैनो बिक चुकी हैं। यह यात्री वाहन बाज़ार में शीर्ष 5 मॉडलों में से एक है।

झटके झेलने में सक्षम हैं भारत सहित एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्थाएं

भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं बाहरी झटकों को सहने के लिए तो पर्याप्त सक्षम हैं, पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने पर इन्हें झटका लग सकता है। यह बात ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है।

मूडीज की सहायक इकाई मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सभी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती उस वक्त खड़ी होगी, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरें बढ़ाना शुरू करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एशिया-प्रशांत के देशों में आमतौर पर वाह्य भुगतान स्थिति अच्छी है और सरकारी ऋण की स्थिति भी दुनिया के अन्य क्षेत्रों के देशों के मुकाबले बेहतर है। एजेंसी ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में वाह्य झटकों से बचने की क्षमता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन उनकी रेटिंग के परिदृश्य अलग-अलग हैं, क्योंकि उनमें से कुछ अर्थव्यवस्थाएं महत्वाकांक्षी सुधार की ओर बढ़ रही हैं।

उधर कई अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों से जूझ रही हैं। इन देशों की साख की गुणवत्ता सबसे प्रमुख रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार नीतिगत प्रतिबद्धताओं पर खरी उतरती है या नहीं। एजेंसी ने कहा कि एशिया प्रशांत के ज्यादातर देश पेट्रोलियम आयातक हैं और हाल में कच्चे तेल में हालिया नरमी को इस क्षेत्र में सकारात्मक असर होगा।

अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जून या सितंबर तक ब्याज दरें बढ़ाएगा। फेड के इस कदम से भारत समेत कई उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी होने की आशंका है। मूडीज ने भारत को सकारात्मक परिदृश्य के साथ बीएए-3 की रेटिंग दे रखी है।

मूडीज ने कहा कि ऊर्जा लागत में बचत से विभिन्न देशों को अपने बजट घाटे पर नियंत्रण और राजकोषीय बफर तैयार करने में मदद मिलेगी। चीन के संबंध में एजेंसी ने कहा कि घटती विकास दर और ग्लोबल अर्थव्यवस्था में नरमी आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी। मूडीज ने कहा कि इस क्षेत्र के जिंस निर्यातक चीन की आर्थिक वृद्धि में नरमी के नए सामान्य स्तर को सबसे अधिक प्रभावित कर सकते हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) ने हाल ही में अनुमान जताया है कि भारत 2015-16 में 7.5 फीसदी की वृद्धि दर के साथ चीन को पीछे छोड देगा। ऐसा सरकार के नीतिगत कदमों, निवेश में बढ़ोतरी और तेल की कीमतों में नरमी के चलते संभव हो पाएगा। इस क्षेत्र की कई अर्थव्यवस्थाओं में पारिवारिक कर्ज का स्तर ऊंचा रहेगा, लेकिन यह वित्तीय व्यवस्था की स्थिरता के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।

एजेंसी ने कहा हालांकि ऐसे कर्ज से निजी खपत में वृद्धि कम होगी, जिससे आर्थिक विस्तार सीमित हो सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के जिन देशों को मूडीज रेटिंग प्रदान करती है उनमें भारत (बीएए-3), कोरिया (एए-3), मलेशिया (ए-3), और पाकिस्तान (सीएए-1) को सकारात्मक रेटिंग परिदृश्य प्रदान किया है, जबकि मंगोलिया (बी-2) का परिदृश्य नकारात्मक है।

Wednesday, April 22, 2015

फायदे का फंडा


कंपनियों की लेट-लतीफी का फायदा उठा रहे साइबर हमलावर

कंप्यूटर और साइबर दुनिया में आज सवाल यह नहींहै कि आप पर साइबर हमला किया जाएगा, बल्कि सवाल है कि हमला कब होगा। साइबर और डेटा सिक्योरिटी के कारोबार से जुड़ी अमेरिकी कंपनी सिमैंटेक ने इंटरनेट सिक्युरिटी थ्रेट रिपोर्ट जारी कर साइबर हमलावरों के तरीकों में हुए बदलावों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावर कंपनियों के नेटवर्क में किस तरह से घुसपैठ कर अपने इरादों को अंजाम देकर चतुराई से बच निकलते हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमलों में तेजी देखने को मिली है। वित्तीय सेवाओं में 17.1 फीसदी परिवहन एवं संचार में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा परिवहन, संचार, विद्युत एवं गैस उद्योग ने साइबर हमलों में पांच गुनी वृद्धि दर्ज की।  बीते वर्ष कुल 24 जीरो-डे वलनरेबिलिटी देखी गई। कंपनियों के नेटवर्क को चकता देने और फिशिंग की घटनाओं में वर्ष 2014 में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पिछले वर्ष किए गए हमलों को देखने से पता चलता है कि साइबर हमलावरों की कुशलता बढ़ गई है।  इसके तहत उन्होंने अपने लक्ष्यों तक सफलता पूर्वक पहुंचने में 20 फीसदी कम ई-मेल  का इस्तेमाल किया। हमलावरों ने मैलवेयर डाउनलोड्स और अन्य वेब आधारित तकनीकी कुचक्रों के जरिए ज्यादा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक साइबर क्षेत्र में सुरक्षात्मक कमजोरी और दुर्बलता को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इस वर्ष काफी सुधार हुआ है। सिमैंटेक की रिसर्च ने खुलासा किया है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों को सुरक्षा कवच बनाने और उसे चालू करने में औसतन 59 दिन लगते हैं, जोकि वर्ष 2013 की अपेक्षा केवल चार दिन का सुधार है। साइबर हमलावर इस देरी का लाभ उठा लेते हैं। हार्टब्लीड के मामले में साइबर हमलावरों ने इस कमजोरी का लाभ उठाते हुए चार घंटे के अंदर ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे दिया।

सिमैंटेक के टेक्नोलॉजी सेल्स निदेशक तरुण कौरा के मुताबिक जब चाबियां आसानी से उपलब्ध हैं, तो साइबर हमलावरों को किसी कंपनी के नेटवर्क के दरवाजे को तोड़ कर घुसने की जरूरत नहीं। हमलावर बेहद चतुराई से घुसपैठ बना कर वहां के कॉमन प्रोग्राम्स के सॉफ्टवेयर अपडेट्स को कमजोर बना देते हैं तथा उन्हें डाउनलोड करने के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करते हैं। इस प्रकार साइबर हमलावरों को कॉरपोरेट नेटवर्क में बिना किसी रोक-टोक के ऐक्सेस करने का मौका मिल जाता है।

मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ आरबीआई अधिकारियों ने खोला मोर्चा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पर कतरने और सारे वित्तीय अधिकार वित्त मंत्री के हाथों में देने की कवायद में जुटी मोदी सरकार के खिलाफ आरबीअधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है।

आरबीआई के अधिकारियों के एक समूह ने की शक्तियां घटाए जाने की आशंका जताते हुए सांसदों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखा है। पत्र में अधिकारियों ने वित्त विधेयक में शामिल बजट प्रस्तावों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही इनसे राज्य सरकारों के हितों पर बुरा असर पड़ने और देश के संघीय ढांचे पर भी बुरा असर पड़ने की बात कही है।

मोदी सरकार की कारगुजारी के खिलाफ यह पत्र अधिकारियों के एक फोरम यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्प्लॉइज ने लिखा है। फोरम ने अपने पत्र में कहा है कि वित्त विधेयक कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनके काफी दूरगामी परिणाम होंगे और अगर इन्हें लागू कर दिया गया तो देश के केंद्रीय बैंक के रूप में आरबीआई के कामकाज और शक्तियों पर काफी बुरा असर पड़ेगा। 

पत्र में कहा गया है कि विधेयक के प्रावधान आरबीआई के अधिकारों में भी कटौती करने वाले हैं। यह प्रावधान मौद्रिक नीति के मामले में रिजर्व बैंक के दायित्वों और अधिकारों को निरर्थक करने वाले हैं। इसके अलावा वित्तीय स्थिरता और महंगाई को नियंत्रित करने के मामले में भी इन प्रावधानों के चलते रिजर्व बैंक का काम प्रभावित होगा।

पत्र के मुताबिक बिल के कुछ प्रस्तावों में जहां 1934 के आरबीआई एक्ट में बदलाव की बात है, वहीं इससे 2006 का सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 1956 का सिक्यूरिटीज कांट्रेक्ट (रेग्यूलेशन) एक्ट और फेमा एक्ट भी भंग होता है। पत्र में फोरम ने सांसदों से इस मामले को सरकार के सामने उठाने की अपील की है। अधिकारियों ने राष्ट्रहित में ऐसा करने की गुहार लगाई है।

पत्र में कहा गया है कि सरकारी ऋणों के प्रबंधन का काम रिजर्व बैंक से छीना जाना जहां राज्यों के हितों के खिलाफ होगा, वहीं यह देश के संघीय ढांचे को भी प्रभावित करेगा। राज्यों के मुख्य मंत्रियों को लिखे गए पत्र में फोरम ने उन्हें इसके प्रति आगाह किया है।

पेट्रोलियम नीति में और पारदर्शिता लाएगी सरकार

मोदी सरकार पेट्रोलियम और गैस क्षेत्र की नीतियों में और पारदर्शिता लाएगी। यह भरोसा केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने दिलाया है। प्रधान ने कहा कि इस क्षेत्र की नीतियां स्थिर एवं पारदर्शी होंगी और इस क्षेत्र में काम करने वालों को विश्वस्तरीय माहौल उपलब्ध कराया जाएगा।

उद्योग संगठन फिक्की द्वारा हाइड्रोकार्बन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने कहा कि अधिकतर कारोबारी वहां काम करना पसंद करते हैं, जहां नीतियों में स्थिरता हो और सरकार पारदर्शी तरीके से काम करती हो। ऐसा ही माहौल भारत में भी मिलेगा। वह सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय की ही बात नहीं कर रहे हैं बल्कि केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालय इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। वे इस तरह से काम करेंगे कि उद्योग जगत को कोई परेशानी नहीं हो।

इसी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के 69 छोटे एवं सीमांत तेल ब्लॉकों को नीलाम करने की तैयारी चल रही है।

इससे ओएनजीसी और ओआईएल भी खुश हैं क्योंकि वे इन ब्लॉकों पर काम नहीं कर पा रहे थे। इन ब्लॉकों को नीलामी में शामिल करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक केबिनेट नोट तैयार कर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए ) के पास भेज दिया है।

उन्होंने बताया कि देश में ही कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में तय किया गया है कि देश में कच्चे तेल की होने वाली कुल खपत में पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्ेसदारी बढ़ा कर 10 फीसदी की जाएगी। वहां ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए सरकार अन्वेषण (ई एंड पी) पर ज्यादा ध्यान दे रही है और वहां इसके लिए आवंटन दूना कर दिया गया है।

पेट्रोलियम सचिव ने बताया कि वर्ष 2014-15 की अंतिम तिमाही के दौरान ओएनजीसी और आयल इंडिया लिमिटेड को रसोई गैस के सिलेंडरों पर दी जा रही सब्सिडी में एक भी रुपये की भागीदारी नहीं करनी होगी। इस मद में जो राशि बचेगी, उसका उपयोग तेल कुओं की खोज और उत्पादन बढ़ाने में हो सकेगा।

विप्रो का मुनाफा बढ़ा, एचसीएल टेक का मार्जिन गिरा

सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो ने वित्तवर्ष की चौथी तिमाही में मुनाफे में 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,286.5 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी के पुत्र रिशद प्रेमजी को कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल किया है। 31 मार्च 2014 को समाप्त तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,239.1 करोड़ रुपये था। आलोच्य अवधि में कंपनी के कारोबार में 3.9 फीसदी की बढ़ोतरी रही और यह आंकड़ा 11,703 करोड़ रुपये की तुलना में 12,171.4 करोड़ रहा।

कंपनी के आईटी सर्विस कारोबार में 6 फीसदी की बढ़ोतरी रही। पूरे साल में कंपनी का शुद्ध लाभ 11.03 फीसदी बढ़कर 8,705.9 करोड़ रुपये रहा जबकि कंपनी के कारोबार में 8.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 47,318 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

दूसरी ओर एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने तीसरी तिमाही के समेकित शुद्ध मुनाफे में 3.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है और कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा 1,683 करोड़ रुपये हो गया है। मुद्रा विनिमय की दरों में उतार चढ़ाव के कारण कंपनी का मार्जिन प्रभावित हुआ है।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,624 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया था। कंपनी का समेकित राजस्व 11 फीसदी बढ़ कर 9,267 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 8,349 करोड़ रुपये था। कंपनी के नतीजे सामने आने के बाद उसके शेयर की कीमतों में 10 फीसदी तक गिरावट आई।

एचसीएल की आय बाजार की उम्मीदों से कम रही है। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रेसीडेंट और सीईओ अनंत गुप्ता ने कहा कि एचसीएल सभी भौगोलिक क्षेत्रों और वर्टिकल्स में ग्रोथ जारी रखेगी। इस तिमाही में हमारा राजस्व 14.4 फीसदी बढ़ा है। हमने 1 अरब डॉलर से अधिक के सौदों की बुकिंग की है।