छोटे कारोबारियोंऔर असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को बैंकों से सस्ते दर पर लोन दिलवाने की बहुप्रचारित मुद्रा योजना को हिट कराने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय सक्रिय हो गया है। इसके तहत असल लाभार्थी को कितना लोन मिलता है, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इसमें लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए बैंको को मंत्रालय से कुछ अलग ही निर्देश दिया गया है।
वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन के एक अधिकारी ने बताया कि सभी सरकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सरकारों के सहकारी बैंकों और अरबन कोऑपरेटिव बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्होंने 10 लाख रुपये तक के जो भी नॉन-फार्म (गैर कृषि) लोन दिए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा लोन के रूप में पारिभाषित करें। इस तरह के निर्देश देने के बाद ही बैंकिंग डिवीजन चुप नहीं बैठ गया बल्कि बीते 27 मई को सभी सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुला कर मुद्रा योजना की समीक्षा भी की गई।
इसके बाद इसी महीने 4 तारीख को पीएमएमवाई की समीक्षा के लिए एक बड़ी बैठक भी की गई। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग मंत्रालय के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके तहत संख्या दिखाने की भी तैयारी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 के दौरान 27 सरकारी बैंकों द्वारा 10 लाख रुपये तक के दिए गए नॉन-फार्म लोन का आंकड़ा मंगा लिया गया है, जो कि 29.37 लाख खाते हैं। इन्हें अब मुद्रा खाता के रूप में प्रचारित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 अप्रैल को जबु मुद्रा योजना को शुरू किया था तब कहा था कि इस योजना में लघु, मंझोले एवं सूक्ष्म क्षेत्र के उद्योगपतियों से लेकर साइकिल ठीक करने वाले, पंचर लगाने वाले, पतंग बनाने वाले, मटकी बनाने वाले, चाय-पान बेचने वाले और पंसारी जैसे छोटे कारोबारियों को भी सस्ते ब्याज दरों पर लोन मिलेगा। हालांकि अभी मुद्रा बैंक की स्थापना नहीं हुई है लेकिन इसका कामकाज शुरू करने के लिए सिडबी की अनुषंगी इकाई के रूप में मुद्रा लिमिटेड की स्थापना हो गई है और नाबार्ड के सीजीएम जीजी मैमन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया है। शुरूआती कामकाज के लिए रिजर्व बैंक ने भी 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या अधिक से अधिक दिखाने का दवाब है तभी तो ऐसा किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन के एक अधिकारी ने बताया कि सभी सरकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सरकारों के सहकारी बैंकों और अरबन कोऑपरेटिव बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्होंने 10 लाख रुपये तक के जो भी नॉन-फार्म (गैर कृषि) लोन दिए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा लोन के रूप में पारिभाषित करें। इस तरह के निर्देश देने के बाद ही बैंकिंग डिवीजन चुप नहीं बैठ गया बल्कि बीते 27 मई को सभी सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुला कर मुद्रा योजना की समीक्षा भी की गई।
इसके बाद इसी महीने 4 तारीख को पीएमएमवाई की समीक्षा के लिए एक बड़ी बैठक भी की गई। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग मंत्रालय के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके तहत संख्या दिखाने की भी तैयारी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 के दौरान 27 सरकारी बैंकों द्वारा 10 लाख रुपये तक के दिए गए नॉन-फार्म लोन का आंकड़ा मंगा लिया गया है, जो कि 29.37 लाख खाते हैं। इन्हें अब मुद्रा खाता के रूप में प्रचारित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 अप्रैल को जबु मुद्रा योजना को शुरू किया था तब कहा था कि इस योजना में लघु, मंझोले एवं सूक्ष्म क्षेत्र के उद्योगपतियों से लेकर साइकिल ठीक करने वाले, पंचर लगाने वाले, पतंग बनाने वाले, मटकी बनाने वाले, चाय-पान बेचने वाले और पंसारी जैसे छोटे कारोबारियों को भी सस्ते ब्याज दरों पर लोन मिलेगा। हालांकि अभी मुद्रा बैंक की स्थापना नहीं हुई है लेकिन इसका कामकाज शुरू करने के लिए सिडबी की अनुषंगी इकाई के रूप में मुद्रा लिमिटेड की स्थापना हो गई है और नाबार्ड के सीजीएम जीजी मैमन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया है। शुरूआती कामकाज के लिए रिजर्व बैंक ने भी 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या अधिक से अधिक दिखाने का दवाब है तभी तो ऐसा किया जाएगा।
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