रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने वित्त वर्ष 2015-16 में देश के रिटेल सेक्टर के लिए निगेटिव टू स्टेबल आउटलुक को बरकरार रखा है। ऐजेंसी ने घरेलू मांग में कुछ सुधार आने के आसार जताए हैं। रिपोर्ट में महंगाई में कमी आने से नॉन ड्यूरेबल वर्ग की वस्तुओं की मांग में सुधार आने की सभावना व्यक्त की गई है। हालांकि जमा की ब्याज दरों में स्थिति सकारात्मक बने रहने के चलते लोगों द्वारा अपनी बचत की राशि को खर्च करने के बजाय निवेश करने का नजरिया भी अपनाया जाएगा।
देश भर में रिटेल क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों की राय पर आधारित इस रिपोर्ट में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के चलते कॉरपोरेट सेक्टर के मुनाफे को अगले 12 से 18 माह के दौरान 0.70 फीसदी तक के दायरे में सीमित रखेगी। हालांकि 2016 और 2017 में वेतन वृद्धि नाममात्र रहने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। ऐसा 2015 और 2016 में रिटेल सेक्टर की आय में बढ़ोतरी काफी कम रहने के चलते होगा।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों के व्यय में बढ़ोतरी सुस्त रहेगी। ऐसा मौसम और उसके चलते फसल को लेकर अनिश्चितता की स्थिति और राज्य व केंद्र सरकारों की ओर से इस क्षेत्र पर किए जाने वाले व्यय में गिरावट के चलते देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट में रिटेल सेक्टर की विकास दर 2015-16 में पांच फीसदी के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। विकास दर में यह सुस्ती बिक्री और उसके चलते कंपनियों को होने वाली आय में होने वाली बढ़ोतरी की रफ्तार सुस्त रहने के चलते रहेगी। इसके अलावा ई-कॉमर्स से प्रतिस्पर्धा का और अधिक बढ़ना पारंपरिक कारोबार क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।
हालांकि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ग्राहकों तक सामान पहुंचाने (लॉजिस्टिक्स) की ऊंची लागत और ऑनलाइन स्टोरों द्वारा दी जा रही भारी-भरकम छूट इस सेक्टर के लिए भी एक मुश्किल साबित होगी। यह लंबे समय के लिए कारगर कारोबारी मॉडल की दृष्टि से ई-कॉमर्स के लिए एक चुनौती बनेगी। हालांकि ऑनलाइन रिटेलर जब तक कारोबार में पूंजी लगाने में सक्षम बने रहेंगे, तब तक उनका कारोबार इसी तरह आक्रामक ढंग से आगे बढ़ता रहेगा।
देश भर में रिटेल क्षेत्र के करीब एक हजार लोगों की राय पर आधारित इस रिपोर्ट में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के चलते कॉरपोरेट सेक्टर के मुनाफे को अगले 12 से 18 माह के दौरान 0.70 फीसदी तक के दायरे में सीमित रखेगी। हालांकि 2016 और 2017 में वेतन वृद्धि नाममात्र रहने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। ऐसा 2015 और 2016 में रिटेल सेक्टर की आय में बढ़ोतरी काफी कम रहने के चलते होगा।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों के व्यय में बढ़ोतरी सुस्त रहेगी। ऐसा मौसम और उसके चलते फसल को लेकर अनिश्चितता की स्थिति और राज्य व केंद्र सरकारों की ओर से इस क्षेत्र पर किए जाने वाले व्यय में गिरावट के चलते देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट में रिटेल सेक्टर की विकास दर 2015-16 में पांच फीसदी के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। विकास दर में यह सुस्ती बिक्री और उसके चलते कंपनियों को होने वाली आय में होने वाली बढ़ोतरी की रफ्तार सुस्त रहने के चलते रहेगी। इसके अलावा ई-कॉमर्स से प्रतिस्पर्धा का और अधिक बढ़ना पारंपरिक कारोबार क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।
हालांकि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ग्राहकों तक सामान पहुंचाने (लॉजिस्टिक्स) की ऊंची लागत और ऑनलाइन स्टोरों द्वारा दी जा रही भारी-भरकम छूट इस सेक्टर के लिए भी एक मुश्किल साबित होगी। यह लंबे समय के लिए कारगर कारोबारी मॉडल की दृष्टि से ई-कॉमर्स के लिए एक चुनौती बनेगी। हालांकि ऑनलाइन रिटेलर जब तक कारोबार में पूंजी लगाने में सक्षम बने रहेंगे, तब तक उनका कारोबार इसी तरह आक्रामक ढंग से आगे बढ़ता रहेगा।
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