पैकेज्ड फूड का कारोबार देश में पिछले पांच वर्ष में सालाना 22.5 फीसदी की दर से बढ़ा है और वर्ष 2017 तक इस बढ़ोतरी की दर 32 फीसदी तक पहुंच जाने की उम्मीद है। यह अनुमान औद्योगिक संगठन एसोचैम की एक रिपोर्ट में जताया गया है। सर्वे के मुताबिक देश में इस वक्त पैकेज्ड फूड का कारोबार करीब 1,920 अरब रुपये (30 अरब डॉलर) का है, जो 2017 तक बढ़कर 3,200.5 अरब रुपये (50 अरब डॉलर) तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में लोगों की आय में बढ़ोतरी और जीवन स्तर में सुधार होने के साथ ही पैकेज्ड फूड पर लोगों के बढ़ते भरोसे को इसकी मुख्य वजह बताया गया है। सर्वे में बताया गया है कि पति-पत्नी दोनों के ही काम करने पर करीब 76 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को महीने में 10 से 12 बार पैकेज्ड फूड परोसना पसंद कर रहे हैं। पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल वह काम के बढ़ते दबाव व व्यस्तता के चलते जीवन को सरल बनाने के लिहाज से करते हैं।
सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल देश के शहरी इलाकों में खासतौर पर मेट्रो शहरों में काफी तेजी स बढ़ रहा है। ऐसा वहां की तेज रफ्तार जिंदगी के चलते देखने को मिल रहा है। एसोचैम की स्वास्थ्य संबंधी कमेटी द्वारा किए गए इस सर्वे में 2,200 परिवारों की राय ली गई है। इनमें बच्चों और बिना बच्चों के परिवार, एकल परिवार और अकेले रहने वाले लोग भी शामिल हैं।
सर्वे के तहत जिन शहरों में लोगों से राय ली गई उनमें मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, कोचीन, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, पटना, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून शामिल हैं। सर्वे में सभी शहरों में पैकेज्ड फूड के चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सर्वे में शहरों के साथ ही अर्ध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
शहरी क्षेत्रों में जहां बढ़ोतरी की दर 80 फीसदी के करीब रही, वहीं कस्बों में यह 40 फीसदी से ऊपर और गांवों में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि पैकेज्ड फूड के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। एसोचैम की हेल्थ कमेटी काउंसिल के चेयरमैन डा. बीके राव का कहना है कि पैकेज्ड फूड में आमतौर पर काफी मात्रा में नमक मौजूद होता है। यह सेहत की दृष्टि ठीक नहीं है क्योंकि ज्यादा नमक खाने से रक्त चाप बढ़ सकता है।
इसके अलावा ऐसे उत्पादों में ट्रांस फैट भी काफी मात्रा में होता है। सेहत के लिए यह संतृप्त वसा से भी ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि यह गुड कैलेस्ट्रॉल को घटाता और बैड कैलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
रिपोर्ट में लोगों की आय में बढ़ोतरी और जीवन स्तर में सुधार होने के साथ ही पैकेज्ड फूड पर लोगों के बढ़ते भरोसे को इसकी मुख्य वजह बताया गया है। सर्वे में बताया गया है कि पति-पत्नी दोनों के ही काम करने पर करीब 76 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को महीने में 10 से 12 बार पैकेज्ड फूड परोसना पसंद कर रहे हैं। पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल वह काम के बढ़ते दबाव व व्यस्तता के चलते जीवन को सरल बनाने के लिहाज से करते हैं।
सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल देश के शहरी इलाकों में खासतौर पर मेट्रो शहरों में काफी तेजी स बढ़ रहा है। ऐसा वहां की तेज रफ्तार जिंदगी के चलते देखने को मिल रहा है। एसोचैम की स्वास्थ्य संबंधी कमेटी द्वारा किए गए इस सर्वे में 2,200 परिवारों की राय ली गई है। इनमें बच्चों और बिना बच्चों के परिवार, एकल परिवार और अकेले रहने वाले लोग भी शामिल हैं।
सर्वे के तहत जिन शहरों में लोगों से राय ली गई उनमें मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, कोचीन, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, पटना, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून शामिल हैं। सर्वे में सभी शहरों में पैकेज्ड फूड के चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सर्वे में शहरों के साथ ही अर्ध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस चलन में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
शहरी क्षेत्रों में जहां बढ़ोतरी की दर 80 फीसदी के करीब रही, वहीं कस्बों में यह 40 फीसदी से ऊपर और गांवों में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि पैकेज्ड फूड के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। एसोचैम की हेल्थ कमेटी काउंसिल के चेयरमैन डा. बीके राव का कहना है कि पैकेज्ड फूड में आमतौर पर काफी मात्रा में नमक मौजूद होता है। यह सेहत की दृष्टि ठीक नहीं है क्योंकि ज्यादा नमक खाने से रक्त चाप बढ़ सकता है।
इसके अलावा ऐसे उत्पादों में ट्रांस फैट भी काफी मात्रा में होता है। सेहत के लिए यह संतृप्त वसा से भी ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि यह गुड कैलेस्ट्रॉल को घटाता और बैड कैलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।
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