Tuesday, June 16, 2015

मानसून में देरी, फसलों की बुवाई में आई 9 फीसदी की कमी

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते गर्मी की फसलों की बुवाई 9 फीसदी कमी देखने को मिली है। इस दौरान मोटे अनाजों के रकबे में सबसे ज्यादा गिरावट हुई है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक गर्मी में बोए जाने वाले मोटे अनाजों की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। 12 जून तक इसकी बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 60 फीसदी घटी है।

दलहनी फसलों की बुवाई भी करीब 11 फीसदी घटी है, जबकि धान की बुवाई का रकबा करीब 4.2 फीसदी बढ़ा है। यदि कपास और गन्ना जैसे नकदी फसलों में देखें, तो उसमें भी बुवाई का रकबा घटा है। कपास की बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले 18 फीसदी घटा है, जबकि गन्ने का रकबा 4.5 फीसदी घटा है। अभी तक गर्मी की फसलों की बुवाई 75.10 हेक्टेअर क्षेत्र में हो पाई है, जबकि पिछले साल इस अवधि तक 82.27 लाख हेक्टेअर में बुवाई हुई थी।

घरेलू उपयोग के लिए भारत में आधे से ज्यादा खाद्य तेलों और करीब 20 फीसदी दालों का आयात करना पड़ता है। यदि बारिश की वजह से इन फसलों की बुवाई ही कम हो रही है तो इसके लिए आयात पर निर्भरता और बढ़ सकती है। हालांकि सरकार के लिए राहत की बात यह है कि दुनिया भर के बाजारों में इस समय खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ी नहीं हैं।

मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल 88 फीसदी ही बारिश होगी। यदि यह सही हुई, तो स्थिति और बिगड़ेगी। वैसे केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि मानसून खराब होने की स्थिति में दालों और खाद्य तेलों की कोई कमी नहीं रहेगी, क्योंकि सरकार इन पदार्थों का आयात बढ़ाएगी।

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