Tuesday, June 16, 2015

उत्तर में तेजी से फैल रहा है कॉरपोरेशन बैंक का नेटवर्क

कॉरपोरेशन बैंक के सीएमडी एसआर बंसल का कहना है कि मैंने 5 अक्तूबर 2013 को इस बैंक में कार्यभार संभाला। तब से अब तक स्थिति में काफी सुधार हुआ। मैंने अपना पांच फोकस प्वाइंट निर्धारित किए और उसके हिसाब से काम शुरू किया। यही नहीं, हमने शाखा विस्तार पर आक्रामक ढंग से काम करना शुरू किया। इसके अलावा हमने देखना शुरू किया किस तरह से खर्च घटाये जा सकते हैं।

हमने शाखाओं के लिए लंबी-चौड़ी जगहों के बदले कम जगह में भी कॉम्पेक्ट ब्रांच की अवधारणा शुरू की। यही नहीं, हमने गार्ड की संख्या में कटौती की। इससे हर साल बैंक को सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत हो रही है। हमने पिछले साल अक्तूबर में इसी चीज की एक रिपोर्ट बना कर केंद्रीय बैंकिंग सचिव को दी थी। उन्होंने इस रिपोर्ट की कॉपी सभी बैंक के सीएमडी को भेजी कि इस तरह से आप भी खर्च में कटौती कर सकते हैं। इसकी सब जगह तारीफ हो रही है।

हमें दक्षिण भारतीय बैंक माना जाता था, लेकिन अब ऐसा है नहीं। अभी देखें, तो हमारी देश भर में 2,300 से भी ज्यादा शाखाएं हैं। बीते शनिवार को ही दिल्ली एनसीआर में फरीदाबाद के सेक्टर 31 में 2,303वीं शाखा खोली है।

आप देखें तो इस समय उत्तर भारत में हमारी 1,000 से भी ज्यादा शाखाएं काम कर रही हैं। उत्तर भारत में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर तो हमारा विशेष ध्यान है। तभी तो यहां हमने तीन क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ, लखनऊ और वाराणसी में खोला है। वाराणसी का क्षेत्रीय कार्यालय पिछले वर्ष ही खुला है।

हम देश के अन्य हिस्सों पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, जितना कि दक्षिण या उत्तर भारतीय राज्यों में। हम पश्चिम भारतीय राज्य गुजरात के राजकोट में अपना 34वां क्षेत्रीय कार्यालय खोल रहे हैं। वहां क्षेत्रीय कार्यालय में काम 1 जून से शुरू हो गया है पर औपचारिक रूप से इसका उद्घाटन होना बाकी है।

इसके अलावा हमने पूर्वोत्तर के गुवाहाटी में भी अपनी शाखा शुरू की है। वहां एक अधिकारी को सिर्फ इसलिए पदस्थापित किया है कि वह वहां विस्तार की संभावना को तलाश सके। बिहार और पश्चिम बंगाल पर भी हमारा विशेष ध्यान है।

कर्मचारी तो शाखा के हिसाब से बढ़ते हैं। हमने वर्ष 2013-14 में करीब 2,000 कर्मचारियों की भर्ती की। 2014-15 में भी इतनी ही कर्मचारियों की भर्ती की। चालू वित्त वर्ष के दौरान भी हमने करीब 1,850 कर्मचारियों की भर्ती का लक्ष्य तय किया है।

इस समय मैं कह सकता हूं कि अब हमारे यहां कर्मचारियों की संख्या को लेकर कोई परेशानी नहीं है। आपको यह भी जान कर आश्चर्य होगा कि हम इन्हें तैनाती से पहले काफी एडवांस ट्रेनिंग पुणे में दिलवाते हैं। यह वही केंद्र है, जहां रिजर्व बैंक के अधिकारियों को ट्रेनिंग मिलती है।

हमारा मुख्य ध्यान तो बचत खाता और चालू खाता जमाओं (कासा डिपॉजिट) को बढ़ाने पर है। इसके अलावा हम एसएमई, रिटेल और कृषि ऋण पर ज्यादा जोर रहेगा।

जब बैंकों का एनपीए बढ़ रहा है, तो स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था का असर इस पर भी है। जहां तक हमारी बात है, तो मार्च 2015 में हमारा ग्रॉस एनपीए 4.80 था। यह एक साल पहले की इसी अवधि के 3.42 फीसदी के मुकाबले 1.38 फीसदी ज्यादा है।

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