मोदी सरकार पेट्रोलियम और गैस क्षेत्र की नीतियों में और पारदर्शिता लाएगी। यह भरोसा केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने दिलाया है। प्रधान ने कहा कि इस क्षेत्र की नीतियां स्थिर एवं पारदर्शी होंगी और इस क्षेत्र में काम करने वालों को विश्वस्तरीय माहौल उपलब्ध कराया जाएगा।
उद्योग संगठन फिक्की द्वारा हाइड्रोकार्बन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने कहा कि अधिकतर कारोबारी वहां काम करना पसंद करते हैं, जहां नीतियों में स्थिरता हो और सरकार पारदर्शी तरीके से काम करती हो। ऐसा ही माहौल भारत में भी मिलेगा। वह सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय की ही बात नहीं कर रहे हैं बल्कि केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालय इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। वे इस तरह से काम करेंगे कि उद्योग जगत को कोई परेशानी नहीं हो।
इसी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के 69 छोटे एवं सीमांत तेल ब्लॉकों को नीलाम करने की तैयारी चल रही है।
इससे ओएनजीसी और ओआईएल भी खुश हैं क्योंकि वे इन ब्लॉकों पर काम नहीं कर पा रहे थे। इन ब्लॉकों को नीलामी में शामिल करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक केबिनेट नोट तैयार कर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए ) के पास भेज दिया है।
उन्होंने बताया कि देश में ही कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में तय किया गया है कि देश में कच्चे तेल की होने वाली कुल खपत में पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्ेसदारी बढ़ा कर 10 फीसदी की जाएगी। वहां ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए सरकार अन्वेषण (ई एंड पी) पर ज्यादा ध्यान दे रही है और वहां इसके लिए आवंटन दूना कर दिया गया है।
पेट्रोलियम सचिव ने बताया कि वर्ष 2014-15 की अंतिम तिमाही के दौरान ओएनजीसी और आयल इंडिया लिमिटेड को रसोई गैस के सिलेंडरों पर दी जा रही सब्सिडी में एक भी रुपये की भागीदारी नहीं करनी होगी। इस मद में जो राशि बचेगी, उसका उपयोग तेल कुओं की खोज और उत्पादन बढ़ाने में हो सकेगा।
उद्योग संगठन फिक्की द्वारा हाइड्रोकार्बन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने कहा कि अधिकतर कारोबारी वहां काम करना पसंद करते हैं, जहां नीतियों में स्थिरता हो और सरकार पारदर्शी तरीके से काम करती हो। ऐसा ही माहौल भारत में भी मिलेगा। वह सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय की ही बात नहीं कर रहे हैं बल्कि केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालय इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। वे इस तरह से काम करेंगे कि उद्योग जगत को कोई परेशानी नहीं हो।
इसी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के 69 छोटे एवं सीमांत तेल ब्लॉकों को नीलाम करने की तैयारी चल रही है।
इससे ओएनजीसी और ओआईएल भी खुश हैं क्योंकि वे इन ब्लॉकों पर काम नहीं कर पा रहे थे। इन ब्लॉकों को नीलामी में शामिल करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक केबिनेट नोट तैयार कर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए ) के पास भेज दिया है।
उन्होंने बताया कि देश में ही कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में तय किया गया है कि देश में कच्चे तेल की होने वाली कुल खपत में पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्ेसदारी बढ़ा कर 10 फीसदी की जाएगी। वहां ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए सरकार अन्वेषण (ई एंड पी) पर ज्यादा ध्यान दे रही है और वहां इसके लिए आवंटन दूना कर दिया गया है।
पेट्रोलियम सचिव ने बताया कि वर्ष 2014-15 की अंतिम तिमाही के दौरान ओएनजीसी और आयल इंडिया लिमिटेड को रसोई गैस के सिलेंडरों पर दी जा रही सब्सिडी में एक भी रुपये की भागीदारी नहीं करनी होगी। इस मद में जो राशि बचेगी, उसका उपयोग तेल कुओं की खोज और उत्पादन बढ़ाने में हो सकेगा।

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