एमएसडी फार्मास्युटिकल्स (एमएसडी इंडिया) ने रमजान में रोजे के दौरान डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित रोजे रखने हेतु एक अभियान की शुरुआत की है। एमएसडी ने रमजान के पवित्र माह में ब्लड शुगर ट्रैकर और मधुमेह प्रबंधन के नुस्खों की मदद से रोजों की अवधि के दौरान एक विषेश ऐप की शुरुआत की है। आईओएस और एंड्रायड उपयोक्ताओं के लिए ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप का निर्माण टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए किया गया है, जो रमजान के दौरान रोजे रखते हैं। इस ऐप में इनकी परेशानियों का समाधान पेश किया गया है।
रमजान के दौरान रोज रखना जहां एक महत्वपूर्ण इबादत मानी जाती है, वहीं डायबिटीज़ रोगियों को कम रक्त शर्करा स्तर (हाइपोग्लाइसीमिया), अधिक ब्लड शुगर स्तर (हाइपरग्लाइसीमिया) और निर्जलीकरण के जोखिमों की रोकथाम के लिए विशेष्ज्ञ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। उपवास पर रहने वाले डायबिटीज के मरीजों को हाइपोग्लाइसीमिया का उच्च जोखिम होता है। ऐसा विषेशकर उस समय होता है जब वे मधुमेह की दवाएं ले रहे होते हैं।
खाना खाने के बीच में लंबे अंतर और डायबिटीज़ की दवाओं के कारण ग्लूकोज़ का स्तर प्राय: गिर जाता है, जिससे पसीना आने, चक्कर आने और बेचैनी होने जैसे लक्षण सामने आते हैं। गंभीर होने पर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण मानसिक भ्रम, विपरीत व्यवहार, बेहोशी और यहां तक कि दौरों जैसी समस्याएं भी आ सकती है जिसके कारण उपवास के दौरान ब्लड शुगर के स्तर पर निगरानी रखना आवश्यक हो जाता है। ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप यह काम बखूबी करता है। ऐप में एक रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) ट्रैकर उपलब्ध है। यह रक्तचाप की निरंतर निगरानी की सुविधा प्रदान करता है जिससे रोगियों को उपवास के दौरान अपनी टाइप 2 डायबिटीज को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।
मुफ्त में उपलब्ध इस ऐप में कई तरह के खास फीचर शामिल किए गए हैं। यह तीन भाषाओं, हिंदी, अंग्रेजी और अरबी में उपलब्ध है। यह रोजाना नमाज और सूर्यास्त का समय बताता है। यह इस बात की जानकारी देता है कि रोजा कब खोला जा सकता है। इसका किबला कंपास उपयोक्ता की स्थिति के अनुसार नमाज की दिशा की जानकारी देता है। प्रतिदिन रोज़े की शुरुआत और समापन (सहरी और इफ्तार) के लिए अलार्म लगाने की सुविधा भी इसमें दी गई है। इसके अलावा रमजान की तैयारी के लिए अपने स्वास्थ्य देखभाल से जूड़े प्रश्न पूछने की सुविधा भी इसमें मौजूद है।
ऐप के बारे में एमएसडी इंडिया के प्रबंध निदेशक केजी अनंतकृष्णन ने बताया कि रमजान में रोजे के दौरान एक महीने तक खाने के समय, भोजन, दवाइयों के उपयोग और दिनचर्या में होने वाले बदलावों से डायबिटीज पर प्रभाव पड़ सकता है। इस ऐप के उपयोग से कोई भी अपने ब्लड ग्लूकोज स्तर पर नजर रख सकता है और साथ ही साथ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकता है। रमजान के दौरान 5 करोड़ से अधिक डायबिटीज पीड़ित लोग रोजे रखते हैं और ग्लूकोज स्तर का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस ऐप की संस्तुति करते हुए डीएम, एंडोक्रायनोलॉजिस्ट डा. शहला शेख ने कहा कि रमजान के पवित्र माह के दौरान उपवास रखते हुए डायबिटीज रोगियों को विशेष सतर्कता और सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ब्लड शुगर स्तर पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसी स्थिति में एमएसडी का यह ऐप मार्गदर्शक का काम करता है।
रमजान के दौरान रोज रखना जहां एक महत्वपूर्ण इबादत मानी जाती है, वहीं डायबिटीज़ रोगियों को कम रक्त शर्करा स्तर (हाइपोग्लाइसीमिया), अधिक ब्लड शुगर स्तर (हाइपरग्लाइसीमिया) और निर्जलीकरण के जोखिमों की रोकथाम के लिए विशेष्ज्ञ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। उपवास पर रहने वाले डायबिटीज के मरीजों को हाइपोग्लाइसीमिया का उच्च जोखिम होता है। ऐसा विषेशकर उस समय होता है जब वे मधुमेह की दवाएं ले रहे होते हैं।
खाना खाने के बीच में लंबे अंतर और डायबिटीज़ की दवाओं के कारण ग्लूकोज़ का स्तर प्राय: गिर जाता है, जिससे पसीना आने, चक्कर आने और बेचैनी होने जैसे लक्षण सामने आते हैं। गंभीर होने पर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण मानसिक भ्रम, विपरीत व्यवहार, बेहोशी और यहां तक कि दौरों जैसी समस्याएं भी आ सकती है जिसके कारण उपवास के दौरान ब्लड शुगर के स्तर पर निगरानी रखना आवश्यक हो जाता है। ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप यह काम बखूबी करता है। ऐप में एक रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) ट्रैकर उपलब्ध है। यह रक्तचाप की निरंतर निगरानी की सुविधा प्रदान करता है जिससे रोगियों को उपवास के दौरान अपनी टाइप 2 डायबिटीज को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।
मुफ्त में उपलब्ध इस ऐप में कई तरह के खास फीचर शामिल किए गए हैं। यह तीन भाषाओं, हिंदी, अंग्रेजी और अरबी में उपलब्ध है। यह रोजाना नमाज और सूर्यास्त का समय बताता है। यह इस बात की जानकारी देता है कि रोजा कब खोला जा सकता है। इसका किबला कंपास उपयोक्ता की स्थिति के अनुसार नमाज की दिशा की जानकारी देता है। प्रतिदिन रोज़े की शुरुआत और समापन (सहरी और इफ्तार) के लिए अलार्म लगाने की सुविधा भी इसमें दी गई है। इसके अलावा रमजान की तैयारी के लिए अपने स्वास्थ्य देखभाल से जूड़े प्रश्न पूछने की सुविधा भी इसमें मौजूद है।
ऐप के बारे में एमएसडी इंडिया के प्रबंध निदेशक केजी अनंतकृष्णन ने बताया कि रमजान में रोजे के दौरान एक महीने तक खाने के समय, भोजन, दवाइयों के उपयोग और दिनचर्या में होने वाले बदलावों से डायबिटीज पर प्रभाव पड़ सकता है। इस ऐप के उपयोग से कोई भी अपने ब्लड ग्लूकोज स्तर पर नजर रख सकता है और साथ ही साथ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकता है। रमजान के दौरान 5 करोड़ से अधिक डायबिटीज पीड़ित लोग रोजे रखते हैं और ग्लूकोज स्तर का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस ऐप की संस्तुति करते हुए डीएम, एंडोक्रायनोलॉजिस्ट डा. शहला शेख ने कहा कि रमजान के पवित्र माह के दौरान उपवास रखते हुए डायबिटीज रोगियों को विशेष सतर्कता और सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ब्लड शुगर स्तर पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसी स्थिति में एमएसडी का यह ऐप मार्गदर्शक का काम करता है।
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