सूचीबद्ध कंपनियों के उत्पादन के स्तर, घरेलू और निर्यात ऑर्डर में इस महीने बड़े पैमाने पर सुधार दर्ज किया गया है। ड्यूटसे बोर्से का एमएनआई इंडिया बिजनेस सेंटीमेंट इंडीकेटर मई के 62.3 से 7.7 फीसदी तक बढ़ कर जून में 67.1 पर आ गया है। सर्वे में कहा गया है कि जून के कारोबारी सर्वे एक संकेत मिलता है कि कुल मिला कर धारणा में गिरावट अपने निचने स्तर से बाहर निकल चुकी है।
एमएनआई इंडीकेटर्स के चीफ इकनॉमिस्ट फिलिप उगलो ने कहा कि एक माह के आंकड़ो में बहुत कुछ निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं होगी लेकिन जून के सर्वे की चमक यह शुरुआती संकेत मुहैया कराती है कि धारणा में गिरावट का ट्रेड अब पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष सितंबर में धारणा में गिरावट अपने चरम पर थी।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि जून में ब्याज दरों में कटौती ने कारोबारी विश्वास बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके अलावा रुपये की कीमत में गिरावट ने निर्यात आर्डर के मोर्चे पर मदद की है। उगलो ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट से निर्यातकों को फायदा हुआ है और श्रमिकों की मांग वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। 2 जून को रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी। आरबीआई ने इस वर्ष तीसरी बार दरों में कटौती है। आरबीआई ने निवेश और ग्रोथ में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया था। साथ ही बैंक ने यह संकेत भी दिया था निकट भविष्य में अब और कटौती नहीं होगी।
एमएनआई इंडीकेटर्स के चीफ इकनॉमिस्ट फिलिप उगलो ने कहा कि एक माह के आंकड़ो में बहुत कुछ निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं होगी लेकिन जून के सर्वे की चमक यह शुरुआती संकेत मुहैया कराती है कि धारणा में गिरावट का ट्रेड अब पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष सितंबर में धारणा में गिरावट अपने चरम पर थी।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि जून में ब्याज दरों में कटौती ने कारोबारी विश्वास बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके अलावा रुपये की कीमत में गिरावट ने निर्यात आर्डर के मोर्चे पर मदद की है। उगलो ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट से निर्यातकों को फायदा हुआ है और श्रमिकों की मांग वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। 2 जून को रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी। आरबीआई ने इस वर्ष तीसरी बार दरों में कटौती है। आरबीआई ने निवेश और ग्रोथ में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया था। साथ ही बैंक ने यह संकेत भी दिया था निकट भविष्य में अब और कटौती नहीं होगी।
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