भारत में आर्थिक विकास की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कार्यों के लिए एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की ओर से अब सहायता राशि मिलेगी। बैंक ने कहा है कि वह भारत को दी जा रही सहायता को अगले तीन साल में करीब 50 फीसदी तक बढ़ा देगा।
एडीबी के अध्यक्ष टाकेहीको नकाओ ने मंगलवार को यहां केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि वह अगले तीन साल में भारत की सहायता राशि को बढ़ा कर 12 अरब डॉलर तक करने जा रहा है।
इस समय एडीबी की तरफ से भारत को नॉन सॉवरेन लेंडिंग 7 अरब डॉलर है, इसे 2017 तक बढ़ाकर 9 अरब डॉलर किया जाएगा। इसके बाद 2018 तक यह आंकड़ा 12 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा। एशियन डेवलेपमेंट फंड लेंडिंग ऑपरेशन के इसके ऑर्डीनरी कैपिटल रिसोर्सेस बैलेंस शीट के साथ विलय होने पर एडीबी की वर्तमान 13 अरब डॉलर सालाना लेंडिंग क्षमता बढ़कर 20 अरब डॉलर सालाना होने की उम्मीद है।
एडीबी की मार्च में प्रकाशित भारत के लिए ताजा आर्थिक अनुमान में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.8 फीसदी रहेगी और यह वित्त वर्ष 2015-16 में बढ़कर 8.2 फीसदी हो जाएगी। महंगाई में कमी आना और चालू खाता घाटा कम होने के साथ ही साथ कुछ प्रमुख क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने की वजह से ऐसे अनुमान लगाए गए हैं।
एडीबी के अध्यक्ष टाकेहीको नकाओ ने मंगलवार को यहां केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि वह अगले तीन साल में भारत की सहायता राशि को बढ़ा कर 12 अरब डॉलर तक करने जा रहा है।
इस समय एडीबी की तरफ से भारत को नॉन सॉवरेन लेंडिंग 7 अरब डॉलर है, इसे 2017 तक बढ़ाकर 9 अरब डॉलर किया जाएगा। इसके बाद 2018 तक यह आंकड़ा 12 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा। एशियन डेवलेपमेंट फंड लेंडिंग ऑपरेशन के इसके ऑर्डीनरी कैपिटल रिसोर्सेस बैलेंस शीट के साथ विलय होने पर एडीबी की वर्तमान 13 अरब डॉलर सालाना लेंडिंग क्षमता बढ़कर 20 अरब डॉलर सालाना होने की उम्मीद है।
एडीबी की मार्च में प्रकाशित भारत के लिए ताजा आर्थिक अनुमान में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.8 फीसदी रहेगी और यह वित्त वर्ष 2015-16 में बढ़कर 8.2 फीसदी हो जाएगी। महंगाई में कमी आना और चालू खाता घाटा कम होने के साथ ही साथ कुछ प्रमुख क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने की वजह से ऐसे अनुमान लगाए गए हैं।
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