Wednesday, June 17, 2015

टेक्सटाइल कंपनियों पर पड़ रही महंगे कपास की मार

उद्योग संगठन फिक्की ने कपड़ा  मंत्रालय को एक पत्र लिखकर भारत कपास निगम (सीसीआई) द्वारा खरीदे कपास को पर्याप्त मात्रा में जारी करने में मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिक्की ने जोर देकर कहा कि मिलों औऱ उद्योग को प्रतिस्पर्धी दरों पर शीघ्र ही कपास की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए यह आवश्यक है।

फिक्की के महासचिव डा. ए दीदार सिंह ने इस संबंध में कपड़ा  मंत्री संतोष गंगवार को लिखे पत्र में कहा है कि सीसीआई की मुख्य भूमिका किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रचालन करना है, ताकि किसानों को अपने उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले। जबकि उसी समय अगर खरीदा गया कपास उद्योग के लिए समय पर जारी नहीं किया जाता है और भंडार के रुप में सीसीआई द्वारा संग्रहित रखा जाता है, तो यह बाजार को विकृत और कीमतों में कृत्रिम वृद्धि करता है, जिससे उपयोगकर्ता खंड  (यू़जर सेगमेंट) अप्रतिस्पर्धी होते हैं। कपड़ा मिलें कपास की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से सीसीआई पर निर्भर हैं।

फिक्की के अनुसार पिछले कुछ दिनों में बाजार में कपास के आगमन में 20,000 गांठ तक बड़े पैमाने पर गिरावट हुई है। मिलों की कुल आवश्यकता लगभग 85,000 से 90,000 गांठ प्रतिदिन है, जबकि सीसीआई केवल 40,000 गांठ ही प्रतिदिन उपलब्ध करा रहा है, वह भी ऊंचे मूल्य के कारण अधिकतर बिक नहीं पा रही हैं। अब तक सीसीआई 10.8 लाख कपास की गांठें बेच चुका है और इस कारण 75 लाख गांठे अब भी भंडार में है, क्योंकि सीसीआई ने मौजूदा अवधि में 85.8 लाख कपास की गांठें खरीदी हैं।

फिक्की ने कहा है कि वर्तमान कपास वर्ष के आरंभ में भारतीय कपास अंतरराष्ट्रीय कपास की तुलना में सस्ती थी, लेकिन परिस्थितियां महत्वपूर्ण रूप से बदली हैं और अब बाजार में कपास के कम आने से  दाम अंतरराष्ट्रीय मूल्य की तुलना में अधिक हो चुके हैं। 

कुछ राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में सीसीआई ने न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर कपास की खरीद की है, जिससे इन राज्यों में कपास की कमी हो गई  है। स्थानीय मिलें दूरवर्ती स्थानों से कपास खरीदने को विवश हैं, जिससे परिवहन पर और अन्य लागत बढ़ी है। सीसीआई द्वारा बड़े पैमाने पर भंडारण के कारण देश भर में कपास के दाम ऊपर जा रहे हैं।

इस परिस्थित का लाभ उठाकर निजी व्यापारी इस धारणा के साथ जमाखोरी कर रहे हैं कि सीसीआई द्वारा कपास उपलब्ध न कराने से कपास के दाम में और बढ़त होगी। यदि सीसीआई खरीदे गए कपास को उचित दामों पर बड़ी मात्रा में बेचता है, तो निजी व्यापारी जमाखोरी के प्रति हतोत्साहित होंगे और बाजार के दामों पर कपास बेचने को विवश होंगे।

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