कंप्यूटर और साइबर दुनिया में आज सवाल यह नहींहै कि आप पर साइबर हमला किया जाएगा, बल्कि सवाल है कि हमला कब होगा। साइबर और डेटा सिक्योरिटी के कारोबार से जुड़ी अमेरिकी कंपनी सिमैंटेक ने इंटरनेट सिक्युरिटी थ्रेट रिपोर्ट जारी कर साइबर हमलावरों के तरीकों में हुए बदलावों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावर कंपनियों के नेटवर्क में किस तरह से घुसपैठ कर अपने इरादों को अंजाम देकर चतुराई से बच निकलते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमलों में तेजी देखने को मिली है। वित्तीय सेवाओं में 17.1 फीसदी परिवहन एवं संचार में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा परिवहन, संचार, विद्युत एवं गैस उद्योग ने साइबर हमलों में पांच गुनी वृद्धि दर्ज की। बीते वर्ष कुल 24 जीरो-डे वलनरेबिलिटी देखी गई। कंपनियों के नेटवर्क को चकता देने और फिशिंग की घटनाओं में वर्ष 2014 में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पिछले वर्ष किए गए हमलों को देखने से पता चलता है कि साइबर हमलावरों की कुशलता बढ़ गई है। इसके तहत उन्होंने अपने लक्ष्यों तक सफलता पूर्वक पहुंचने में 20 फीसदी कम ई-मेल का इस्तेमाल किया। हमलावरों ने मैलवेयर डाउनलोड्स और अन्य वेब आधारित तकनीकी कुचक्रों के जरिए ज्यादा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक साइबर क्षेत्र में सुरक्षात्मक कमजोरी और दुर्बलता को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इस वर्ष काफी सुधार हुआ है। सिमैंटेक की रिसर्च ने खुलासा किया है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों को सुरक्षा कवच बनाने और उसे चालू करने में औसतन 59 दिन लगते हैं, जोकि वर्ष 2013 की अपेक्षा केवल चार दिन का सुधार है। साइबर हमलावर इस देरी का लाभ उठा लेते हैं। हार्टब्लीड के मामले में साइबर हमलावरों ने इस कमजोरी का लाभ उठाते हुए चार घंटे के अंदर ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे दिया।
सिमैंटेक के टेक्नोलॉजी सेल्स निदेशक तरुण कौरा के मुताबिक जब चाबियां आसानी से उपलब्ध हैं, तो साइबर हमलावरों को किसी कंपनी के नेटवर्क के दरवाजे को तोड़ कर घुसने की जरूरत नहीं। हमलावर बेहद चतुराई से घुसपैठ बना कर वहां के कॉमन प्रोग्राम्स के सॉफ्टवेयर अपडेट्स को कमजोर बना देते हैं तथा उन्हें डाउनलोड करने के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करते हैं। इस प्रकार साइबर हमलावरों को कॉरपोरेट नेटवर्क में बिना किसी रोक-टोक के ऐक्सेस करने का मौका मिल जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमलों में तेजी देखने को मिली है। वित्तीय सेवाओं में 17.1 फीसदी परिवहन एवं संचार में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा परिवहन, संचार, विद्युत एवं गैस उद्योग ने साइबर हमलों में पांच गुनी वृद्धि दर्ज की। बीते वर्ष कुल 24 जीरो-डे वलनरेबिलिटी देखी गई। कंपनियों के नेटवर्क को चकता देने और फिशिंग की घटनाओं में वर्ष 2014 में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पिछले वर्ष किए गए हमलों को देखने से पता चलता है कि साइबर हमलावरों की कुशलता बढ़ गई है। इसके तहत उन्होंने अपने लक्ष्यों तक सफलता पूर्वक पहुंचने में 20 फीसदी कम ई-मेल का इस्तेमाल किया। हमलावरों ने मैलवेयर डाउनलोड्स और अन्य वेब आधारित तकनीकी कुचक्रों के जरिए ज्यादा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक साइबर क्षेत्र में सुरक्षात्मक कमजोरी और दुर्बलता को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इस वर्ष काफी सुधार हुआ है। सिमैंटेक की रिसर्च ने खुलासा किया है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों को सुरक्षा कवच बनाने और उसे चालू करने में औसतन 59 दिन लगते हैं, जोकि वर्ष 2013 की अपेक्षा केवल चार दिन का सुधार है। साइबर हमलावर इस देरी का लाभ उठा लेते हैं। हार्टब्लीड के मामले में साइबर हमलावरों ने इस कमजोरी का लाभ उठाते हुए चार घंटे के अंदर ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे दिया।
सिमैंटेक के टेक्नोलॉजी सेल्स निदेशक तरुण कौरा के मुताबिक जब चाबियां आसानी से उपलब्ध हैं, तो साइबर हमलावरों को किसी कंपनी के नेटवर्क के दरवाजे को तोड़ कर घुसने की जरूरत नहीं। हमलावर बेहद चतुराई से घुसपैठ बना कर वहां के कॉमन प्रोग्राम्स के सॉफ्टवेयर अपडेट्स को कमजोर बना देते हैं तथा उन्हें डाउनलोड करने के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करते हैं। इस प्रकार साइबर हमलावरों को कॉरपोरेट नेटवर्क में बिना किसी रोक-टोक के ऐक्सेस करने का मौका मिल जाता है।

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