Sunday, June 21, 2015

देसी कंपनियां चाहती हैं स्टील पर और ज्यादा आयात शुल्क

चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से सस्ते में आयात किया जा रहा स्टील भारतीय स्टील कंपनियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

भारतीय स्टील निर्माताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार ने स्टील के आयात पर शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी भले ही कर दी हो, लेकिन इससे इस उद्योग को कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। भारतीय निर्माताओं का कहना है कि आयात बढ़ने के बावजूद अभी भी आयातित स्टील यहां बने स्टील के मुकाबले प्रति किलो 13 से 15 रुपये तक सस्ता पड़ रहा है। इनका कहना है कि सरकार यदि आयात शुल्क 15 फीसदी करे, तभी मेक इन इंडिया कार्यक्रम सही ढंग से फलीभूत हो पाएगा।

भारतीय स्टील संघ के महासचिव और राउरकेला स्टील प्लांट के प्रबंध निदेशक रहे सनक मिश्रा का कहना है कि उन्होंने तो सरकार से इस पर 15 फीसदी के आयात शुल्क की मांग की थी लेकिन सरकार ने 7.5 और 10 फीसदी पर ही छोड़ दिया। इससे भारत में आयातित स्टील सस्ता पड़ता है। यहां सवाल यह उठता है कि यदि सस्ता आयातित स्टील मिलता रहेगा तो महंगा भारतीय स्टील कौन खरीदेंगे। इससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को धक्का पहुंचेगा। उनका कहना है कि जब तक स्टील पर आयात शुल्क 15 फीसदी नहीं होगा, तब तक इसका समाधान नहीं हो सकता है।

उनका कहना है पूरी दुनिया में अमेरिका अपनी उदार नीतियों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन वह भी अपने स्टील उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए इस पर 25 फीसदी का अयात शुल्क लगाए हुए है तो भारत को इसे 15 फीसदी करने में क्या दिक्कत है। इस पर आयात शुल्क बढ़ाने की राह में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का भी रोड़ा नहीं है क्योंकि डब्ल्यूटीओ स्टील पर 40 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है।

जिंदल स्टील एवं पावर लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि भारतीय स्टील संघ के बैनर तले वह केन्द्रीय इस्पात मंत्री से लेकर वित्त मंत्री, सब से मिल चुके हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही है। अभी लांग और फ्लैट प्रोडक्ट पर जो आयात शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी की गई, उससे कोई खास फायदा नहीं हो पाया है। अभी भी आयातित स्टील भारत में बने स्टील के मुकाबले 13 से 15 रुपये प्रति किलो सस्ता पड़ता है। ऐसे में लघु, मंझोली और सूक्ष्म इकाइयां उनका स्टील क्याें खरीदेंगी। यही नहीं, रियल इस्टेट क्षेत्र केकई बड़े ग्राहक आयातित स्टील से ही अपना काम चला रहे हैं।

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष ए पी चौधरी कहते हैं कि आयातित स्टील के दाम पर नहीं जाएं बल्कि गुणवत्ता पर जाएं। बाहर से जो सस्ता स्टील आ रहा है, उसकी गुणवत्ता भारतीय स्टील की तुलना में हमेशा कमतर होती है। जहां भी क्वालिटी स्टील की बात होती है, वहां भारतीय स्टील को ही प्राथमिकता मिलती है। लेकिन जहां गुणवत्ता पर समझौता किया जाता है, वहां सस्ता स्टील लगा दिया जाता है।

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