अच्छी उच्च शिक्षा की सुविधाओं वाले संस्थानों की कमी और अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते हर साल 6.8 लाख छात्र विदेशी शिक्षा संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बात उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है।
एसोचैम की ओर से ‘स्किलिंग इंडिया : एंपावरिंग इडियन यूथ थ्रू वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों के विदेश जाने के चलते आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू उच्च संस्थानों को सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ रहा है। यह वह राशि है, जो विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्र वहां के संस्थानों को देते हैं।
बेहतर भविष्य और सुनहरे कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र सिंगापुर, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, स्वीडेन, आयरलैंड, नार्वे और कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह नई जगहों पर जाने में भी नहीं हिचक रहे हैं और ऐसा करने वाले छात्रों की तादात में इस साल 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल अमीर घरों के बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। आजकल मध्य वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने में पीछे नहीं हैं। इसके लिए वह अपनी जीवन भर की बचत की राशि भी खर्च कर दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश से 2.9 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। इस साल यह संख्या बढ़कर 6.8 लाख तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी वजह विदेशी संस्थानों में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होना और कैरियर में बेहतर संभावनाओं के द्वार खुलना है। इसके अलावा विदेशी जीवन शैली से प्रभावित होकर भी छात्र इन देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
एसोचैम के महा सचिव डीएस रावत का कहना है कि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान बहुत कम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में दाखिला पाने के प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा यह कंपटीशन भी छात्रों का पढ़ाई के लिए विदेश जाने की एक अहम वजह बन रहा है।
मोबाइल फोन कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।
अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।
एसोचैम की ओर से ‘स्किलिंग इंडिया : एंपावरिंग इडियन यूथ थ्रू वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रों के विदेश जाने के चलते आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू उच्च संस्थानों को सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ रहा है। यह वह राशि है, जो विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्र वहां के संस्थानों को देते हैं।
बेहतर भविष्य और सुनहरे कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र सिंगापुर, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, स्वीडेन, आयरलैंड, नार्वे और कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह नई जगहों पर जाने में भी नहीं हिचक रहे हैं और ऐसा करने वाले छात्रों की तादात में इस साल 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल अमीर घरों के बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। आजकल मध्य वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने में पीछे नहीं हैं। इसके लिए वह अपनी जीवन भर की बचत की राशि भी खर्च कर दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश से 2.9 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। इस साल यह संख्या बढ़कर 6.8 लाख तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी वजह विदेशी संस्थानों में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होना और कैरियर में बेहतर संभावनाओं के द्वार खुलना है। इसके अलावा विदेशी जीवन शैली से प्रभावित होकर भी छात्र इन देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
एसोचैम के महा सचिव डीएस रावत का कहना है कि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान बहुत कम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में दाखिला पाने के प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा यह कंपटीशन भी छात्रों का पढ़ाई के लिए विदेश जाने की एक अहम वजह बन रहा है।
मोबाइल फोन कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।
अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।
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