Friday, April 17, 2015

भारतीय कंपनियों के सीईओ लें इस छोटी सी कंपनी के मुखिया से सीख

हमारे देश में कंपनियों के कर्ताधर्ता और टॉप मैनेजमेंट के लोग मुनाफे में कमी या कमजोर प्रदर्शन के नाम पर कर्मचारियों का ‌वेतन बढ़ाने में भले ही कंजूसी करें, पर अपनी तन्‍ख्वाह दिल खोलकर बढ़ा लेते हैं। ऐसे कॉरपोरेट्स के लिए अमेरिका की एक छोटी सी कंपनी ने एक मिसाल पेश की है।

अमेरिका की ग्रेविटी पेमेंट्स के संस्थापक और सीईओ डैन प्राइस ने अपने स्टाफ की सैलेरी दुगनी करने के लिए खुद की सैलेरी 90 फीसदी घटा दी। इस छोटी सी कपंनी में केवल 120 कर्मचारी काम करते हैं। सीईओ डैन प्राइस ने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए अपने वेतन के साथ ही कंपनी के मुनाफे में भी भारी कमी की।

उनकी कोशिश है कि अपने सभी कर्मचारियों को वह अगले तीन साल में 70 हजार डॉलर की सालाना सैलरी दे सकें। रुपये के हिसाब से देखें तो यह रकम 42 लाख रुपये के करीब बैठती है। बताया जाता है कि प्राइस ने एक स्टडी रिपोर्ट को पढ़ने के बाद यह अहम फैसला लिया।

प्राइस ने अपना वेतन 10 लाख डॉलर (6 करोड़ 20 लाख रुपये) को घटाकर 70 हजार डॉलर कर दिया और फर्म के 20 लाख डॉलर (लगभग 12 करोड़ 40 लाख रुपये) के मुनाफे में भी कटौती की। सीईओ के इस कदम से 30 कर्मचारियों का वेतन जहां दोगुना हो गया, वहीं 40 कर्मचारियों की तनख्वाह में भी काफी इजाफा हुआ। कंपनी ने बीते ही दिनों कंपनी की नई वेतन नीति का ऐलान किया। अपने वेतन में भारी बढ़ोतरी की यह घोषणा सुनकर कर्मचारियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

प्राइस खुद इस कंपनी के संस्‍थापक हैं लिहाजा कंपनी में सबसे ज्यादा शेयर उन्ही के हैं। उन्होंने हैपिनेस को लेकर जो रिपोर्ट पढ़ी थी, उसमें कहा गया था कि कंपनी की ओर से मिलने वाली आय से किसी कर्मचारी के भावनात्मक संतुष्टि का स्तर तब बढ़ जाता है, जब वह सालाना 75,000 डॉलर कमाने लगता है।

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