Wednesday, April 15, 2015

डिस्कवरी दिखाएगा दुनिया के बड़े आविष्कारों की कहानी

मानव इतिहास में जितनी जानें युद्ध में गईं उनके मुकाबले कहीं ज्यादा लोगों की मौत गंदे पानी से हुई है। पानी को क्लोरीन से साफ करने की कहानी से लेकर, कांच, घड़ी, चश्मे के शीशे आदि की आविष्कार की जीवंत कहनी डिस्कवरी चैनल पर शुरू हो रही है। ‘हाऊ वी गॉट टु नाऊ’ नाम के इस प्रोग्राम को 20 अप्रैल से दिखाया जाएगा और हर सोमवार रात 9 बजे इसका प्रसारण होगा।
डिस्कवरी चैनल की प्रेरणा देने वाली और मनोरंजक श्रृंखला ‘हाऊ वी गॉट टु नाऊ’ को विश्वविख्यात इनोवेशन एक्सपर्ट स्टीवन जॉनसन पेश कर रहे हैं और वे इतिहास, विज्ञान, कारोबार और टेक्नोलॉजी से जुड़ी उन तरक्कियों के बारे में बताएंगे जिनके बल पर हम आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। इस सीरीज में स्टीवन जॉनसन उन कमाल के आइडियाज के पीछे मौजूद कहानियों का खुलासा करेंगे जिनकी वजह से आधुनिक जीवन संभव हुआ।
इस सीरीज में वह बताएंगे कि इस आधुनिक दुनिया को मौजूदा रूप देने वाले पुरुषों और स्त्रियों के बीच कैसा जबर्दस्त मुकाबला था, किस तरह उन्होंने हैरतअंगेज सफलताएं पाईं। उनकी गजब की उपलब्धियों वाले पल कौन से थे। ये शौकिया खोजी और ऐसे आम लोग थे जिन्होंने कुछ असाधारण काम किए हैं, लेकिन फिर भी इनके बारे में कोई नहीं जानता। इस श्रृंखला में विषय और समय-काल की कोई सीमा नहीं है। इसमें जॉनसन अजीबोगरीब अवधारणाओं और अनोखे नतीजों के प्रति आकर्षित नजर आते हैं और इस सीरीज के जरिये हम कुछ ऐसे संपर्क बना पाएंगे, जिनके बारे में हमने पहले सोचा ही नहीं था।
इस श्रृंखला में स्टीवन जॉनसन बीती सदियों के दौरान हुई खोजों के इतिहास का जायजा लेते हैं और आधुनिक विज्ञान से जुड़ी चीजों के उदय का पता लगाने की कोशिश करते हैं, जैसे कि रैफ्रिजरेशन, घड़ियां और चश्मे के शीशे। जॉनसन पता लगाते हैं कि किस तरह लोगों ने शौक-शौक में इन्हें बना डाला, और उनकी इन कोशिशों के ऐसे ऐतिहासिक परिणाम निकले, जिनकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
जॉनसन आपस में जुड़े न लगने वाले क्षेत्रों के बीच मौजूद अनोखे संबंधों का जायजा लेते हैं, जैसे कि एयरकंडीशनिंग के आविष्कार से किस तरह बड़ी तादाद में लोग दुबई या फिनिक्स जैसे शहरों की तरफ जाने लगे, जिनमें एयरकंडीशनिंग के बिना रहना संभव न हो पाता, किस तरह पेंडुलम वाली घड़ियों से औद्योगिक क्रांति की शुरूआत हुई, और कैसे साफ पानी ने कम्प्यूटर चिप का निर्माण मुमकिन बनाया।

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