यूपीए-2 के कार्यकाल में हुए बहुचर्चित टेलीकॉम घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए राहत की खबर आई है। सीबीआई ने विशेष अदालत के समक्ष कहा है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े नीतिगत मामलों पर मनमोहन सिंह को 'गुमराह' किया।
इस मामले में अंतिम दलील देते हुए विशेष लोक अभियोजक आनंद ग्रोवर ने कहा कि अन्य आरोपियों के साथ साजिश में राजा ने 2जी लाइसेंस आवंटनों में आरोपी कंपनियों के पक्ष में कट ऑफ तारीख आगे बढ़ा दी थी। ग्रोवर ने दलील दी कि राजा ने स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) और यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) लिमिटेड जैसी 'अयोग्य' कंपनियों को स्पेक्ट्रम दिया जाना मंजूर किया। उन्होंने कहा कि कुछ आरोपियों के पक्ष में पहले आओ पहले पाओ (एफसीएफएस) नीति बदल दी गई और राजा ने तत्कालीन विधि मंत्री का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया जिन्होंने अहम नीतिगत मामलों को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के पास भेजने की पेशकश की थी।
गौरतलब है कि राजा की ओर से 2 नवंबर 2007 को तत्कालीन पीएम मनामोहन को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए ग्रोवर ने कहा कि असल में राजा ने एफसीएफएस और कट ऑफ तारीख पर मनमोहन सिंह को गुमराह किया। डीओटी (दूरसंचार विभाग) में अदभुत चीजें हुई जिससे पता चलता है कि यह (एफसीएफएस नीति में बदलाव) आरोपियों के पक्ष में जानबूझकर किया गया।
मामले में अंतिम सुनवाई की अगली तारीख 25 मई है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के इस मामले में राजा, द्रमुक
सांसद कनिमोझी और कुछ शीर्ष कॉरपोरेट अधिकारी सहित 15 अन्य लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं। मामले में साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग 11 नवंबर 2011 को शुरू हुई थी। अदालत ने एजेंसी की ओर से दाखिल किए गए दो आरोप पत्रों में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किया। अपने आरोपपत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंसों के आवंटन में 30,984 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
इस मामले में अंतिम दलील देते हुए विशेष लोक अभियोजक आनंद ग्रोवर ने कहा कि अन्य आरोपियों के साथ साजिश में राजा ने 2जी लाइसेंस आवंटनों में आरोपी कंपनियों के पक्ष में कट ऑफ तारीख आगे बढ़ा दी थी। ग्रोवर ने दलील दी कि राजा ने स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) और यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडु) लिमिटेड जैसी 'अयोग्य' कंपनियों को स्पेक्ट्रम दिया जाना मंजूर किया। उन्होंने कहा कि कुछ आरोपियों के पक्ष में पहले आओ पहले पाओ (एफसीएफएस) नीति बदल दी गई और राजा ने तत्कालीन विधि मंत्री का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया जिन्होंने अहम नीतिगत मामलों को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के पास भेजने की पेशकश की थी।
गौरतलब है कि राजा की ओर से 2 नवंबर 2007 को तत्कालीन पीएम मनामोहन को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए ग्रोवर ने कहा कि असल में राजा ने एफसीएफएस और कट ऑफ तारीख पर मनमोहन सिंह को गुमराह किया। डीओटी (दूरसंचार विभाग) में अदभुत चीजें हुई जिससे पता चलता है कि यह (एफसीएफएस नीति में बदलाव) आरोपियों के पक्ष में जानबूझकर किया गया।
मामले में अंतिम सुनवाई की अगली तारीख 25 मई है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के इस मामले में राजा, द्रमुक
सांसद कनिमोझी और कुछ शीर्ष कॉरपोरेट अधिकारी सहित 15 अन्य लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं। मामले में साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग 11 नवंबर 2011 को शुरू हुई थी। अदालत ने एजेंसी की ओर से दाखिल किए गए दो आरोप पत्रों में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किया। अपने आरोपपत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 2जी स्पेक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंसों के आवंटन में 30,984 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

No comments:
Post a Comment