Wednesday, April 22, 2015

सन फार्मा से बाहर हुई जापानी दवा कंपनी दायची

भारत में सफर का दि एंड
जापान की दवा कंपनी दायची सांक्यो सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज में अपनी समूची 9 फीसदी हिस्सेदारी बेच कर कंपनी से अलग हो गई है। दायची ने सन फार्मा में 21 करोड़ शेयर 20,420 करोड़ रुपये में बेचे हैं। यह हिस्सेदारी उसने रैनबक्सी का सन फार्मा में विलय के बाद हासिल की थी।  इस तरह से दायची सांक्यो ने भारत में अपने सात वर्ष के उथल-पुथल भरे सफर को खत्म कर दिया है।
इस बारे में दायची की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सन फार्मा के शेयरों की बिक्री पूरी हो गई है। शेयर बिक्री के तहत दायची ने सन फार्मा के 21,49,69,058 शेयर बेचे हैं। सुबह के कारोबारी सत्र में जब दायची ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषण की, उस समय उसके शेयर की औसत कीमत 950 रुपये थी। पिछले माह सन फार्मा ने अपने साथ रैनबक्सी का विलय पूरा करने की घोषणा की थी। कंपनी ने 4 अरब डॉलर मेें विलय के सौदे की घोषणा के एक वर्ष बाद विलय पूरा किया है। सौदे के तहत रैनबक्सी के शेयर धारकों को उनके एक शेयर के बदले सन फार्मा के 0.8 शेयर मिलने थे। विलय के समय रैनबैक्सी में दायची की 63.4 फीसदी हिस्सेदारी थी। रैनबक्सी के विलय के साथ सन फार्मा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी जेनरिक दवा कंपनी और घरेलू बाजार में शीर्ष कंपनी बन गई है।
रैनबक्सी की खरीदारी के बाद जापानी कंपनी को सात सालों में चुनौतियां ही चुनौतियां मिलती रहीं। उत्पादन प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना के मामले में रैनबक्सी लगातार अमेरिकी दवा नियामक की जांच के घेरे में रही। 2008 में अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने रैनबैक्सी के मध्य प्रदेश के देवास, पोंटा साहिब और हिमाचल प्रदेश के बाटामंडी स्थित संयंत्रों में उत्पादित 30 जेनेरिक दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया था।

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