सरकारी कंपनियों के विनिवेश की दिशा में नए वित्त वर्ष (2015-16) को बड़ी कामयाबी मिली है। निवेशकों ने ऊर्जा मंत्रालय की कंपनी ग्रामीण विद्युतिकरण निगम (आरईसी) के ओएफएस को हाथों-हाथ लिया है।
ऑफर के जरिए बेचे जाने वाले 4.93 करोड़ शेयरों के लिए बुधवार को मंगाई गई थी, पर निवेशकों की ओर से 25.24 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन मिले हैं। खुदरा श्रेणी में तो 9.02 गुने ज्यादा का अभिदान मिला है। इससे सरकार की झोली में करीब 1,550 करोड़ रुपये आ गए।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक आरईसी का ओएफएस खुलने के महज डेढ़ घंटे में भी ओवर सबस्क्राइब हो गया। इसके लिए फ्लोर प्राइस तो 315 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था, लेकिन इसके लिए खुदरा निवेशकों ने 325.10 रुपये और संस्थानिक निवेशकों ने 324.73 रुपये प्रति शेयर तक की बोली आई। ओएफएस में खुदरा निवेशकों के लिए 20 फीसदी शेयर आरक्षित थे और उन्हें पांच फीसदी की छूट भी मिलेगी।
सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान सरकारी कंपनियों के शेयरों की बिक्री से 41,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि एक वर्ष पहले विनिवेश के मद में 43,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वर्ष खत्म होने पर सरकार की झोली में 24,500 करोड़ रुपये ही आ पाए थे।
ऑफर के जरिए बेचे जाने वाले 4.93 करोड़ शेयरों के लिए बुधवार को मंगाई गई थी, पर निवेशकों की ओर से 25.24 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन मिले हैं। खुदरा श्रेणी में तो 9.02 गुने ज्यादा का अभिदान मिला है। इससे सरकार की झोली में करीब 1,550 करोड़ रुपये आ गए।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक आरईसी का ओएफएस खुलने के महज डेढ़ घंटे में भी ओवर सबस्क्राइब हो गया। इसके लिए फ्लोर प्राइस तो 315 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था, लेकिन इसके लिए खुदरा निवेशकों ने 325.10 रुपये और संस्थानिक निवेशकों ने 324.73 रुपये प्रति शेयर तक की बोली आई। ओएफएस में खुदरा निवेशकों के लिए 20 फीसदी शेयर आरक्षित थे और उन्हें पांच फीसदी की छूट भी मिलेगी।
सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान सरकारी कंपनियों के शेयरों की बिक्री से 41,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि एक वर्ष पहले विनिवेश के मद में 43,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वर्ष खत्म होने पर सरकार की झोली में 24,500 करोड़ रुपये ही आ पाए थे।
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