Saturday, June 25, 2016

तो इस लिए ईयू से निकल लिया ब्रिटेन



ब्रिटेन आखिरकार कई साल पुरानी यूरोपियन यूनियन अलग हो गया। ऐसे जहन में यह सवाल सहज ही उठता है कि वह आखिर उस संगठन से अलग क्‍यों हो गया, जिसके संस्‍थापकों में  वह खुद शामिल था।

दरअसल ब्रिटेन की जनता के इस फैसले की कई वजहें हैं माना जाता रहा है कि ईयू के नियमों की वजह से ब्रिटेन कई मामलों में पीछे रह गया था। ईयू ने व्यापार से जुड़े कई सख्त नियम खड़े कर दिए थे और कई करोड़ पाउंड की सालाना सदस्यता फीस देने के बदले ब्रिटेन को कुछ ख़ास हासिल नहीं हो रहा था।

ब्रिटेन के लिए ईयू छोड़ने की एक वजह यह भी थी कि वह अपनी सीमाओं पर पूरी तरह अपना अधिकार चाहता था। साथ ही वह अपने देश में बाहर से आकर काम करने वाले लोगों की संख्या भी कम करना चाहता था। 

ईयू के तहत सदस्य-देशों की जनता के एक से दूसरे देश में आने जाने पर कोई रोक नहीं लगा सकता। फैसले से लगता है कि ब्रिटेन की जनता इस विचार से बहुत खुश नहीं है और वह चाहती है कि जीवन-यापन के लिए बाहर से आए लोगों की संख्या कम से कम हो सके।



पूरी खबर पढ़ें http://biznessdunia.com/?p=624

ब्रेक्जिट ने सेंसेक्‍स, निफ्टी को दिया करारा झटका, रुपया भी चित



ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) के पक्ष में मतदान होने की खबर ने भारतीय शेयर बाजार को तगड़ा झटका दिया है। शुक्रवार (24 जून) को कारोबार शुरू होने के साथ ही ब्रेक्जिट का भूत बाजार पर हव्‍वे की तरह टूट पड़ा। शुरुआती सत्र में बीएसई व एनएसई दोनों ही इससे चारों खाने चित होते दिखे। बीएसई का सेंसेक्‍स शुरुआती कारोबार के दौरान 27,000 के स्‍तर के पास आ गया और एनएसई का निफ्टी गोता लगा कर 8,000 के स्तर से नीचे लुढ़क गया। सेंसेक्स 948.54 अंक या 3.51 फीसदी लुढ़क कर 26,053.68 पर आ गया। इसी तरह निफ्टी भी 294.15 अंक या 3.55 प्रतिशत गिरकर 7,976.30 पर चल रहा था। सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों में से शेयरों में 9.71 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है।
कारोबारियों का कहना है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की खबर से बाजार में घबराहट का माहौल है। कारोबारियों को इससे यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ने के चलते भारतीय कारोबार प्रभावित होने की आशंका सता रही है। इसी के चलते बाजार में इतनी तगड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। शेयर बाजार के साथ ही मुद्रा बाजार में भी ब्रेक्जिट का असर देखने को मिला। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया भी शुरुआती कारोबार में 96 पैसे की भारी भरकम गिरावट का शिकार होकर 68.21 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।  उधर ब्रिटिश पाउंड 31 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है 
गौरतलब है‍ कि यूरोपियन यूनियन से अलग होने के मुद्दे पर ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह में अधिकांश लोगों ने ईयू से बाहर होने यानी ब्रेग्जिट के पक्ष में वोट दिया है। वोटिंग खत्म होने के बाद शुक्रवार को शुरू हुई वोटों की गिनती में 51.9 फीसदी (17,410,742) लोगों ने ब्रेक्जिट के समर्थन में वोट दिया है। दूसरी ओर 'रीमेन' यानी यूरोपीय संघ का हिस्सा बने रहने के पक्ष में 48.1 फीसदी (16, 141, 241) वोट ही पड़े। नतीजों से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की कुर्सी खतरे में पड़ने की अटकलें भी शुरू हो गईं। हालांकि ब्रिटिश विदेश मंत्री ने खंडन किया और कहा कि कैमरन प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

Friday, July 3, 2015

सीसीआई ने 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ खारिज की शिकायत

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टाटा मोटर्स,  महिंद्रा और फोर्ड सहित 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ अनुचित कारोबारी तौर-तरीकों को लेकर की गई शिकायत को खारिज कर दिया है।

यह आरोप लगाया गया है कि ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स और अधिकृत डीलरों के बीच डीलरशिप समझौता पूरी तरह से एक तरफा और ऑटो कंपनियों के पक्ष में है। यह शिकायत महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, होंड सिएल कार्स इंडिया, फॉक्सवैगन इंडिया, जनरल मोटर्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, फोर्ड इंडिया, रेनो इंडिया और ह्यूडई मोटर इंडिया के खिलाफ दर्ज कराई गई है।

इसके अलावा अशोक लेलैंड, पियाजिओ व्हीकल, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा टू व्हीलर, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया और टीवीएस मोटर कंपनी भी उन कंपनियों मेें शामिल है जिनके खिलाफ शिकायत की गई है। सीसीआई ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के मानकों के उल्लंघन का पृथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है।

Wednesday, June 24, 2015

बेहतर उच्च शिक्षा के लिए हर साल 6.8 लाख छात्र जा रहे विदेश

अच्छी उच्च शिक्षा की सुविधाओं वाले संस्थानों की कमी और अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते हर साल 6.8 लाख छात्र विदेशी शिक्षा संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बात उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है।

एसोचैम की ओर से ‘स्किलिंग इंडिया : एंपावरिंग इडियन यूथ थ्रू वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि  छात्रों के विदेश जाने के चलते आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू उच्च संस्थानों को सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ रहा है। यह वह राशि है, जो विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्र वहां के संस्थानों को देते हैं।

बेहतर भविष्य और सुनहरे कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र सिंगापुर, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, स्वीडेन, आयरलैंड, नार्वे और कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह नई जगहों पर जाने में भी नहीं हिचक रहे हैं और ऐसा करने वाले छात्रों की तादात में इस साल 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल अमीर घरों के बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। आजकल मध्य वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने में पीछे नहीं हैं। इसके लिए वह अपनी जीवन भर की बचत की राशि भी खर्च कर दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश से 2.9 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। इस साल यह संख्या बढ़कर 6.8 लाख तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी वजह विदेशी संस्थानों में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होना और कैरियर में बेहतर संभावनाओं के द्वार खुलना है। इसके अलावा विदेशी जीवन शैली से प्रभावित होकर भी छात्र इन देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
एसोचैम के महा सचिव डीएस रावत का कहना है कि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान बहुत कम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में दाखिला पाने के प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा यह कंपटीशन भी छात्रों का पढ़ाई के लिए विदेश जाने की एक अहम वजह बन रहा है।

मोबाइल फोन कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

माइक्रोमैक्स ने इक्सिगो में किया निवेश

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

Tuesday, June 23, 2015

फेडरल बैंक ने लांच किया नया मोबाइल ऐप


फेडरल बैंक ने अपने मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन फेड मोबाइल का नया संस्करण लांच किया है। नए वर्जन में मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें ग्राहकों को कुछ नई सहूलियतें भी दी गई हैं।

नए ऐप को तेजी से लोकप्रिय बनाने के लिए बैंक ने ग्राहकों को इससे किए जाने वाले 100 रुपये या उससे अधिक के पहले ट्रांजेक्शन पर 50 रुपये का कैशबैक देने की भी घोषणा की है। यह ऑफर 31 जुलाई तक चलेगा। ऐप को बैंक की ई पासबुक सुविधा फेडबुक के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे ग्राहक अब मोबाइल के जरिए ही अपनी पासबुक देख सकेंगे।

ब्याज दर में कटौती से कारोबारी धारणा हुई मजबूत

 सूचीबद्ध कंपनियों के उत्पादन के स्तर, घरेलू और निर्यात ऑर्डर में इस महीने बड़े पैमाने पर सुधार दर्ज किया गया है। ड्यूटसे बोर्से का एमएनआई इंडिया बिजनेस सेंटीमेंट इंडीकेटर मई के 62.3 से 7.7 फीसदी तक बढ़ कर जून में 67.1 पर आ गया है। सर्वे में कहा गया है कि जून के कारोबारी सर्वे एक संकेत मिलता है कि कुल मिला कर धारणा में गिरावट अपने निचने स्तर से बाहर निकल चुकी है।

एमएनआई इंडीकेटर्स के चीफ इकनॉमिस्ट फिलिप उगलो ने कहा कि एक माह के आंकड़ो में बहुत कुछ निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं होगी लेकिन जून के सर्वे की चमक यह शुरुआती संकेत मुहैया कराती है कि धारणा में गिरावट का ट्रेड अब पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष सितंबर में धारणा में गिरावट अपने चरम पर थी।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि जून में ब्याज दरों में कटौती ने कारोबारी विश्वास बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके अलावा रुपये की कीमत में गिरावट ने निर्यात आर्डर के मोर्चे पर मदद की है। उगलो ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट से निर्यातकों को फायदा हुआ है और श्रमिकों की मांग वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। 2 जून को रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी। आरबीआई ने इस वर्ष तीसरी बार दरों में कटौती है। आरबीआई ने निवेश और ग्रोथ में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया था। साथ ही बैंक ने यह संकेत भी दिया था निकट भविष्य में अब और कटौती नहीं होगी।

Monday, June 22, 2015

केबल टीवी प्रसारण के क्षेत्र में रिलायंस जियो ने बढ़ाया कदम

मुकेश अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस इडस्ट्रीज समूह की कंपनी रिलायंस जियो को सरकार की तरफ से डिजिटल केबल टीवी के मल्टी सर्विस ऑपरेटर (एमएसओ) के रूप में काम करने के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन मिल गया है। इससे अब वह देश भर में एमएसओ के रूप में काम कर सकेगी। यह पंजीकरण सूचना व प्रसारण मंत्रालय की तरफ से दिया गया है। सरकार की तरफ से इस इजाजत के बाद रिलायंस जियो को अपनी मीडिया सामग्री को केबल ऑपरेटर्स या लोगों तक भेजने के लिए किसी ऑपरेटर का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। रिलायंस जियो जल्द ही देश भर में 4जी सेवा की भी शुरुआत करने जा रही है।

एमएसओ उस केबल ऑपरेटर को कहते है जो प्रसारणकर्ता से प्रोग्रामिंग सेवा प्राप्त करता है और उसे एक साथ कई जगहों पर प्रसारित करता है या एक या दो केबल ऑपरेटर को यह प्रसारण भेजता है। एमएसओ बनने की सरकार की इस अनुमति के बाद रिलायंस जियो हेथवे, सिटी केबल नेटवर्क, आईएमसीएल व डीईएन नेटवर्क को चुनौती देने लगेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज रिलायंस जियो को एक ऐसे ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश में लगी है जो एक साथ टेलीकॉम, हाई स्पीड डेटा, ई-कॉमर्स, मीडिया व भुगतान सेवा देने में सक्षम हो।

रिलायंस पहले ही नेटवर्क-18 मीडिया हाउस का अधिग्रहण कर चुकी है, जिसके पास 17 समाचार चैनल हैं और आठ भाषा में 14 मनोरंजन के चैनल है। वर्ष 2017-18 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिलायंस जियो को टीवी व मोबाइल सामग्री का एकीकृत सेट बनाने का लक्ष्य रखा है। 4जी सेवा की शुरुआत के बाद मोबाइल पर वीडियो देखने में वही मजा आएगा, जो टेलीविजन सेट पर किसी वीडियो को देखने में आता है।

यूपी में खुली हार्ले डेविडसन की पहली डीलरशिप

हार्ले डेविडसन इंडिया ने उत्तर प्रदेश में अपनी पहली स्वतंत्र डीलरशिप खोल दी है। यह डीलरशिप लखनऊ के गोमती नगर में स्थित है। यूनाइटेड हार्ले डेविडसन ग्राहकों को ब्रांड के मोटरसायकिल, राइडिंग गियर, अपैरल और एक्सेसरीज तक पहुंच सुनिश्चित करती है। इसके साथ पूरे भारत में अब 18 स्वतंत्र हार्ले डेविडसन डीलरशिप सुविधाएं हैं।

कंपनी के डायरेक्टर सेल्स और डीलर डेवलपमेंट राजीव वोहरा लांच पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हम यूनाइटेड हार्ले डेविडसन को उनकी नई हार्ली डेविडसन फैसिलिटी पर बधाई देते हैं। पिछले पांच वर्षों में भारत में हमारा डीलर नेटवर्क लगातार बढ़ा है और देश भर में हजारों ओनर्स और शौकीनों को स्वागत किया है। यूनाइटेड हार्ले डेविडसन उत्तर प्रदेश में मोटरसाइकिल के सभी शौकीनों के लिए सही स्थल पर सेवाएं मुहैया कराएगी। यह खास कर ऐसे ग्राहकों के लिए है, जो प्रीमियम लाइफ स्टाइल का अनुभव करने की इच्छा रखते हैं और हार्ले डेविडसन इसके लिए दुनिया भर में जानी जाती है।  ग्राहकों और शौकीनों की ओर से मिला शानदार रिस्पांस कंपनी के ग्रोथ प्लान के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार में उतरेगा हीरो ग्रुप

हीरो ग्रुप ने सोमवार को देश में तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कदम रखते हुए एक नई कंपनी हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत की। कंपनी के मुताबिक उसका यह निर्णय सरकार के मेन इन इंडिया अभियान से प्रेरित है और और इसके जरिए वह मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में और अधिक विकास में योगदान देना चाहती है।

हीरो इलेक्ट्रॉनिक्स देश में सेट टॉप बाक्स की सबसे बड़ी परिचालक कंपनी माइबॉक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के अधिकांश हिस्से का अधिग्रहण करेगी। माइबॉक्स भारत में बड़े डीटीएच ओर केबल ऑपरेटरों की अग्रणी सप्लायर है। ठोस अनुसंधान और विकास क्षमताओं के साथ माईबॉक्स भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और डीएसआईआर द्वारा स्वीकृत एक उपक्रम है। यह स्वदेशी सेट टॉप बॉक्स के संपूर्ण डिजाइन में संलग्न बहुत थोड़ी कंपनियों में से एक है।

उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की दीर्घकालीन विरासत के अनुरूप, हीरो का लक्ष्य मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने में मदद के लिए मजबूत इन हाउस क्षमताओं का निर्माण करके इस उपक्रम के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आगे बढ़ना है। 1950 से भारत में एक सुप्रसिद्ध नाम बन चुके इस समूह ने दुपहिया वाहनों से लेकर वित्तीय समाधानों तक ग्राहक केंद्रित उत्पाद प्रस्तुत करते हुए देश में उद्योग के विकास में मदद की है।

ग्रुपऑन ने रीयल टाइम डील्स के लिए एक्सप्लोरी

अग्रणी डेली डील्स वेबसाइट-ग्रुपऑन इंडिया तथा भारत के पहले सर्च एवं डिस्कवरी प्लेटफार्म एक्सप्लोरी (Xploree) ने आज अपनी भागीदारी की आधिकारिक घोषणा की। एक्सप्लोरी ग्राहकों को खरीदादारी की संभावनाएं मुहैया कराता है तथा उन्हें एक टैप में संबद्ध ब्रांड तथा सेवाओं से जोड़ता है।

ग्रुपऑन इंडिया तथा ग्चसवतमम दोनों मिलकर ग्राहकों को आकर्षक, वैल्यू फॉर मनी डील्स एक टच पर मुहैया कराएंगे। कीप्वाइंट टेक्नोलॉजीस ने इस महीने के आरंभ में एक्सप्लोरी को लॉन्च किया था जो कि इंडस्ट्री का पहला सर्च तथा डिस्कवरी प्लेटफार्म है जो मोबाइल यूजर्स को सभी सर्च, मैसेंजर तथा अन्य प्लेटफार्म में सबसे संबद्ध ब्रांड तथा सेवाओं से जोड़ता है और ऐसा करते हुए उन्हें उनके वर्तमान कन्वर्सेशन एप से बाहर नहीं आना पड़ता। इस भागीदारी से एक्सप्लोरी के यूजर्स को फौरन ग्रुपऑन की डील्स की खोज और खरीददारी में मदद मिलेगी। ग्रुपऑन के डील्स की रेंज में डाइनिंग और वेलनेस से लेकर शॉपिंग और गेटअवेज तक शामिल हैं।

भागीदारी के बारे में जानकारी देते हुए ग्रुपऑन इंडिया के सीईओ अंकुर वारीकू ने कहा कि डील्स को रियल टाइम में खोज निकालने के लिए ग्चसवतमम एक शानदार माध्यम है और हम उन्हें अपने भागीदार के रूप में पाकर अत्यन्त प्रसन्न हैं। हम दोनों का लक्ष्य एकसाथ मिलकर आज के तकनीक से लैस ग्राहक को अविश्वसनीय कीमतों पर आकर्षक डील्स की बड़ी रेंज मुहैया कराना है और उनके अनुभव को एक नए स्तर तक ले जाना है। हम भविष्य में ऐसी और भागीदारियों की तलाश में हैं और निरंतर ग्राहकों को खुश करने का इरादा रखते हैं। सुमित गोस्वामी, सीईओ, कीप्वाइंट टेक्नोलॉजीस कहते हैं, यकीनन ग्रुपऑन भारत में लोकल कामर्स क्षेत्र में अग्रणी खिलाड़ी है और हम उनके साथ भागीदारी करके बेहद प्रसन्न हैं। हमारा लक्ष्य लोगों को फौरन आकर्षक डील्स, सेवाएं खोजने तथा अविश्वसनीय दामों पर ऑफर्स हासिल करने में मदद करना है और एक्सप्लोरी की अनूठी प्रिडिक्ट एंड कनेक्ट टेक्नोलॉजी ऐसा करने में सही रूप से हमारी मदद करती है। हम ग्रुपऑन के साथ दीर्घकालिक भागीदारी करना चाहते हैं चूंकि इससे हमें ग्राहकों को पहले कभी न मिलने वाले ब्रांड और सेवाओं का अनुभव मुहैया कराने का अतुलनीय अवसर मिलेगा। हम इकोसिस्टम प्लेयर्स की साथ भागीदारी के अवसर तलाशेंगे जिससे लक्षित ब्रांड की खोज के माध्यम से ग्राहकों को फायदा पहुंचे। ग्राहक आज से एक्सप्लोरी पर ग्रुपऑन की डील्स को देख और खरीद सकेंगे। एक्सप्लोरी ऐप डाउनलोड करने के लिए  http://bit.ly/Xploree पर क्लिक करें या गूगल प्ले स्टोर पर जाएं जो केवल एन्ड्रॉयड पर उपलब्ध है।

अब भारत में भी मिलेगी शेल ल्युब्रिकेंट्स पर लाइफटाइम इंजन वारंटी


लाइफटाइम इंजन वारंटी एक्सक्लूसिव तौर पर सिर्फ उन कारों के लिए उपलब्ध होगी, जिनका रजिस्ट्रेशन भारत में प्योर प्लस तकनीक से लैस शेल हेलिक्स अल्ट्रा के इस्तेमाल के लिए हुआ है। शेल की यह गारंटी ल्युब्रिकेंट से संबंधित इंजन खामियों को भी कवर करेगी। इसके अतिरिक्त ग्राहकों को शेल हेलिक्स एचएक्स-7 5 वर्ष की सीमित अवधि वारंटी भी दी जा रही है। देश भर में शेल हेलिक्स अल्ट्रा या हेलिक्स एचएक्स7 का इस्तेमाल करने कार मालिक षेल ल्युब्रिकेंट्स की आधिकारिक लाइफटाइम इंजन वारंटी वेबसाइट Lifetime Engine Warranty website पर पंजीकरण करा इस इंजन वारंटी प्रोग्राम का मुफ्त में लाभ उठा सकते हैं। वारंटी  www.shell.com/warranty पर पंजीकरण कराने के 30 दिन या 1000 किलोमीटर चलने (जो भी बाद में हो) से षुरू होती है और पंजीकरण षेल हेलिक्स अल्ट्रा/षेल हेलिक्स एचएक्स7 इंजन ऑयल व इंजन ऑयल चेंज खरीदने के 60 दिन के भीतर हो जाना चाहिए (जो तिथि खरीद रसीद में दी गई हो)। लाइफटाइम इंजन वारंटी इंजन के 13 हिस्सों को कवर करेगी।

इस अवसर पर शेल ल्युब्रिकेंट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन प्रसाद ने कहा किभारत में अपने ग्राहकों के लिए लाइफटाइम इंजन वारंटी प्रोग्राम को सबसे पहले पेष करने वाली इकलौती ल्युब्रिकेंट निर्माता होने पर हमें गर्व है। हमें हमारे मोटर ऑयल पर पूरा भरोसा है कि वह इंजन को मोटर ऑयल संबंधी गड़बडि़यों से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा कि हमने अपने ग्राहकों को प्योर प्लस तकनीक से लैस षेल हेलिक्स अल्ट्रा के तहत इस तरह की वारंटी देने का फैसला किया। इससे आपको दिमाग का षांति मिलती है और आपको अतिरिक्त लागत व चिंता के बिना ड्राइव करने में मदद मिलती है। नवोन्वेश पर हमारा पूरा ध्यान है और षेल ने पिछले 40 साल के दौरान ये अगली पीढ़ी के मोटर ऑयल विकसित करने व उनके षोध पर कई करोड़ डॉलर का निवेश किया है। हमारा मोटर ऑयल आज के इंजन को उत्कृष्ट क्लींजिंग व सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रोग्राम के जरिये हम हमारे ग्राहकों को उच्चतम स्तर का भरोसा और संतुष्टि देना चाहते हैं। इसके साथ ही सबसे विष्वसनीय ल्युब्रिकेंट आपूर्तिकर्ता के तौर पर अपनी साख और मजबूत करना चाहते हैं।

Sunday, June 21, 2015

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश में बनेंगे चार थीम बेस्ड टूरिज्म सर्किट


भारत में ढेर सारे ऐसे टूरिस्ट स्पॉट हैं, जिन्हें देख कर पर्यटक हैरान रह जाते हैं, पर के अभाव में लोग इन स्‍थानों तक नहीं पहुंच पाते। इसे देखते हुए पर्यटन मंत्रालय एक ऐसी योजना पर काम कर रहा है, जिससे देश के पर्यटन स्थलों की न सिर्फ जानकारी मिलेगी, बल्कि वहां सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके लिए मंत्रालय अगले वर्ष से स्वदेश दर्शन योजना के शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत चार नए विषय वस्तु आधारित (थीम बेस्ड) टूरिज्म सर्किटों का विकास किया जाएगा। इन चार सर्किटों में वन्य जीव, अध्यात्म, मरुस्थल और रामायण शामिल हैं। यह चार सर्किट उन पांच सर्किटों के अतिरिक्त हैं, जिन्हें पर्यटन मंत्रालय पहले से विकसित कर रहा है।

वन्य जीव सर्किट में राष्ट्रीय उद्यान और अभयरण्यों को शामिल किया जाएगा। अध्यात्म सर्किट में सभी धर्मों के प्रख्यात तीर्थ स्थलों को शामिल किया जाएगा। देखा जाए तो भारत इस मामले में अनूठा देश है जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई धर्म से जुड़े कई तीर्थ स्थल मौजूद हैं। बस जरूरत है इसे सही ढंग से विकसित करने की और उसे प्रचारित करने की। इसी शृंखला में तीसरा मरुस्थल सर्किट होगा, जिसमें राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध थार रेगिस्तान के पर्यटन स्थलों को शामिल किया जाएगा। चौथा सर्किट रामायण पर आधारित होगा जिसमें अध्योध्या, सीतामढ़ी, सेतु बांध रामेश्वरम, धनुष्कोटि और चित्रकूट अदि स्थल शामिल होंगे।

इससे पहले पर्यटन मंत्रालय मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार नेनेशनल मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म बोर्ड स्थापित करने की घोषणा कर चुकी है। यह बोर्ड उन पर्यटकों की मदद करेगा, जो देश में हेल्थ केयर संबंधी जरूरतों के लिए आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस बोर्ड में मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा अस्पताल, होटेलियर्स, मेडिकल एक्सपर्ट और टूर ऑपरेटर्स को भी शामिल किया जाएगा।

विकसित देशों की तुलना में जो लोग कम कीमत पर बेहतर मेडिकल केयर की जगह तलाश रहे हैं, उनके लिए भारत एक किफायती गंतव्य है। इससे वैकल्पिक ट्रीटमेंट जैसे योग, आयुर्वेद और यूनानी को भी बढ़ावा मिलेगा। अनुसंधान फर्म केपीएमजी की पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया में टॉप थ्री मेडिकल टूरिज्म डेस्टीनेशन में थाईलैंड और सिंगापुर के साथ ही भारत भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कम खर्च में तो उपचार होता ही है, यहां क्वालिटी हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहद अनुभवी और उच्च कोटि के प्रशिक्षित डाक्टर भी उपलब्ध हैं।

देसी कंपनियां चाहती हैं स्टील पर और ज्यादा आयात शुल्क

चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से सस्ते में आयात किया जा रहा स्टील भारतीय स्टील कंपनियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

भारतीय स्टील निर्माताओं को राहत दिलाने के लिए सरकार ने स्टील के आयात पर शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी भले ही कर दी हो, लेकिन इससे इस उद्योग को कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। भारतीय निर्माताओं का कहना है कि आयात बढ़ने के बावजूद अभी भी आयातित स्टील यहां बने स्टील के मुकाबले प्रति किलो 13 से 15 रुपये तक सस्ता पड़ रहा है। इनका कहना है कि सरकार यदि आयात शुल्क 15 फीसदी करे, तभी मेक इन इंडिया कार्यक्रम सही ढंग से फलीभूत हो पाएगा।

भारतीय स्टील संघ के महासचिव और राउरकेला स्टील प्लांट के प्रबंध निदेशक रहे सनक मिश्रा का कहना है कि उन्होंने तो सरकार से इस पर 15 फीसदी के आयात शुल्क की मांग की थी लेकिन सरकार ने 7.5 और 10 फीसदी पर ही छोड़ दिया। इससे भारत में आयातित स्टील सस्ता पड़ता है। यहां सवाल यह उठता है कि यदि सस्ता आयातित स्टील मिलता रहेगा तो महंगा भारतीय स्टील कौन खरीदेंगे। इससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को धक्का पहुंचेगा। उनका कहना है कि जब तक स्टील पर आयात शुल्क 15 फीसदी नहीं होगा, तब तक इसका समाधान नहीं हो सकता है।

उनका कहना है पूरी दुनिया में अमेरिका अपनी उदार नीतियों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन वह भी अपने स्टील उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए इस पर 25 फीसदी का अयात शुल्क लगाए हुए है तो भारत को इसे 15 फीसदी करने में क्या दिक्कत है। इस पर आयात शुल्क बढ़ाने की राह में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का भी रोड़ा नहीं है क्योंकि डब्ल्यूटीओ स्टील पर 40 फीसदी तक आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है।

जिंदल स्टील एवं पावर लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि भारतीय स्टील संघ के बैनर तले वह केन्द्रीय इस्पात मंत्री से लेकर वित्त मंत्री, सब से मिल चुके हैं लेकिन कोई राहत नहीं मिल रही है। अभी लांग और फ्लैट प्रोडक्ट पर जो आयात शुल्क में ढाई फीसदी की बढ़ोतरी की गई, उससे कोई खास फायदा नहीं हो पाया है। अभी भी आयातित स्टील भारत में बने स्टील के मुकाबले 13 से 15 रुपये प्रति किलो सस्ता पड़ता है। ऐसे में लघु, मंझोली और सूक्ष्म इकाइयां उनका स्टील क्याें खरीदेंगी। यही नहीं, रियल इस्टेट क्षेत्र केकई बड़े ग्राहक आयातित स्टील से ही अपना काम चला रहे हैं।

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष ए पी चौधरी कहते हैं कि आयातित स्टील के दाम पर नहीं जाएं बल्कि गुणवत्ता पर जाएं। बाहर से जो सस्ता स्टील आ रहा है, उसकी गुणवत्ता भारतीय स्टील की तुलना में हमेशा कमतर होती है। जहां भी क्वालिटी स्टील की बात होती है, वहां भारतीय स्टील को ही प्राथमिकता मिलती है। लेकिन जहां गुणवत्ता पर समझौता किया जाता है, वहां सस्ता स्टील लगा दिया जाता है।

पैनासोनिक ने लांच की छह हेडफोन की नई रेंज

इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, घरेलू उपकरणों से लेकर मोबाइल फोन तक बनाने वाली कंपनी पैनासोनिक ने संगीत के शौकीनों के लिए हेडफोनों की एक व्यापक रेंज भारतीय बाजार में पेश की है। कंपनी ने इस रेंज के तहत अलग-अलग तरह की खूबियों वाले छह हेडफोन पेश किए हैं। इनकी कीमतें 949 रुपये से लेकर 13,990 रुपये तक जाती हैं।

पैनासोनिक की इस रेंज की शुरुआत 949 रुपये की कीमत वाले आरपी-एचएस34 हेड फोन से शुरू होती है। 14.3 एमएम की ड्राइवर यूनिट वाला यह हेड फोन 10 हर्ट्ज से लेकर 25 किलो हर्ट्ज तक की ध्वनियों को पकड़ने व सुनाने में सक्षम है। इसके बाद 1,690 रुपये कीमत वाला एचबीडी 250 हेडफोन आता है, जिसमें न उलझने वाला फ्लैट केबल दिया गया है। यह दोनों ही हेडफोन पांच रंगों में उपलब्ध हैं।

रेंज के बाकी चार हेड फोन काले रंग में पेश किए गए हैं। इनमें आरपी-एचएक्सएस 400 की कीमत 2,899 रुपये, आरपी-बीटीडी 10 की कीमत 8,990 रुपये, आरपी-एचसी 800 की 11,990 रुपये रखी गई है, जबकि 13,999 रुपये की कीमत वाला आरपी-डीजे 1210 इस रेंज का सबसे हाई एंड हेड फोन है।

योग दिवस लांच हुआ योग परिधान प्रोयोग

भारत के आईकेए योगा वियर ने अरबों डॉलर के योग परिधान बाजार के जाने-माने खिलाड़ियों को चुनौती देते हुएपहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर एक खास योग परिधान प्रोयोग लांच किया है। योग परिधान का डिजाइन प्राचीन भारत से लिया गया है और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के द्वारा इसे आज की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है। प्रोयोग महिलाओं के लिए दुनिया का पहला योग परिधान है, जिसमें सिंथेटिक कपड़ा त्वचा को जरा भी नहीं छुएगा और यह परिधान शरीर से बिल्कुल नहीं चिपकेगा।

इस खास परिधान में योग करते समय आपकी त्वचा तक हवा का ठीक से आदान-प्रदान होगा। प्रोयोग के ट्रेडमार्क हाइपरब्रीद फैब्रिक बेहद स्टाइलिश हैं और साथ ही दुनिया भर के ब्रांड्स के द्वारा पेश किए जाने वाले योग परिधान की तुलना में कहीं अधिक आरामदायक भी हैं। प्रोयोग भारत में प्रोयोग डॉट कॉम पर उपलब्ध है।

कंपनी के सह-संस्थापक एवं प्रोडक्ट हेड मलिका बरुआ के मुताबिक आज योग परिधान के 90 फीसदी बाजार में पॉलिएस्टर एवं नायलॉन उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है जो कि प्लास्टिक या पीईटी फैब्रिक है। ये परिधान योगा के लिए अनुकूल नहीं हैं। प्रोयोग ने इस फैब्रिक और परिधान के विकास से पहले इस पर दो साल का लंबा अनुसंधान किया, इस दौरान योगा अध्यापकों और टेक्सटाइल इंजीनियरों से परामर्श लिया गया। उन्होंने 11 देशों के योग अध्यापकों से बात की। इन सब अनुसंधानों के बाद पाया गया कि ज्यादातर योग अध्यापक इस बात को जानते ही नहीं हैं कि वे नायलॉन और पॉलिएस्टर से बने परिधानों का इस्तेमाल कर रहें हैं। वे योग और ‘प्लास्टिक’ के बीच के विरोधाभास से परिचित नहीं हैं।

Friday, June 19, 2015

ऑडी ने लांच की नई क्यू-3

ऑडी ने भारत में नई ऑडी क्यू3 लांच की है। नई ऑडी क्यू 3 डिजाइन के नए पन व कई नई तकनीक खासियतों के कारण अब और भी आकर्षक होकर आई है। यह वर्ष 2012 में बाजार में लांच के बाद से ऑडी क्यू3 अपने सेगमेंट से सबसे अहमअ मॉडल रही है।

नई दिल्ली व मुंबई में ऑडी क्यू3 की एक्स शो रूम कीमत 28.99 लाख रुपये तय की गई है। यह कार उत्तर भारत में ऑडी की सभी डीलरशिप पर उपलब्ध होगी।

ऑडी क्यू3 में डायनामिक टर्न इंडिकेटरों के साथ एलईडी हैडलाइट दी गई है। कार में स्टीयरिंग माउंटेड पैडल शिफ्टर भी पहली बार पेश किए गए। वहीं कार में एमएमआई नेविगेशन सिस्टम और पार्किंग सिस्टम प्लस, रियर व्यू कैमरा के साथ ऑडी म्युजिक इंटरफेस, 20जीबी ज्यूकबॉक्स, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और स्ट्रीमिंग शामिल हैं।

ऑडी इंडिया के प्रमुख जो किंग ने कहा कि नई ऑडी क्यू3 इस साल हमारा पांचवां लांच है। उन्होंने कहा कि इस साल उनका इरादा 10 नई कारें लांच करने का है। कंपनी कई शानदार नए मॉडल को लांच करने की तैयारी कर रही है।

डायबिटीज पीड़ित रोजेदारों के लिए मोबाइल ऐप

एमएसडी फार्मास्युटिकल्स (एमएसडी इंडिया) ने रमजान में रोजे के दौरान डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित रोजे रखने हेतु एक अभियान की शुरुआत की है। एमएसडी ने रमजान के पवित्र माह में ब्लड शुगर ट्रैकर और मधुमेह प्रबंधन के नुस्खों की मदद से रोजों की अवधि के दौरान एक विषेश ऐप की शुरुआत की है। आईओएस और एंड्रायड उपयोक्ताओं के लिए ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप का निर्माण टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए किया गया है, जो रमजान के दौरान रोजे रखते हैं। इस ऐप में इनकी परेशानियों का समाधान पेश किया गया है।

रमजान के दौरान रोज रखना जहां एक महत्वपूर्ण इबादत मानी जाती है, वहीं डायबिटीज़ रोगियों को कम रक्त शर्करा स्तर (हाइपोग्लाइसीमिया), अधिक ब्लड शुगर स्तर (हाइपरग्लाइसीमिया) और निर्जलीकरण के जोखिमों की रोकथाम के लिए विशेष्ज्ञ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। उपवास पर रहने वाले डायबिटीज के मरीजों को हाइपोग्लाइसीमिया का उच्च जोखिम होता है। ऐसा विषेशकर उस समय होता है जब वे मधुमेह की दवाएं ले रहे होते हैं।

खाना खाने के बीच में लंबे अंतर और डायबिटीज़ की दवाओं के कारण ग्लूकोज़ का स्तर प्राय: गिर जाता है, जिससे पसीना आने, चक्कर आने और बेचैनी होने जैसे लक्षण सामने आते हैं। गंभीर होने पर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण मानसिक भ्रम, विपरीत व्यवहार, बेहोशी और यहां तक कि दौरों जैसी समस्याएं भी आ सकती है जिसके कारण उपवास के दौरान ब्लड शुगर के स्तर पर निगरानी रखना आवश्यक हो जाता है।  ‘रमजान, डायबिटीज एंड मी’ ऐप यह काम बखूबी करता है। ऐप में एक रैंडम ब्लड शुगर (आरबीएस) ट्रैकर उपलब्ध है। यह रक्तचाप की निरंतर निगरानी की सुविधा प्रदान करता है जिससे रोगियों को उपवास के दौरान अपनी टाइप 2 डायबिटीज को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

मुफ्त में उपलब्ध इस ऐप में कई तरह के खास फीचर शामिल किए गए हैं। यह तीन भाषाओं, हिंदी, अंग्रेजी और अरबी में उपलब्ध है। यह रोजाना नमाज और सूर्यास्त का समय बताता है। यह इस बात की जानकारी देता है कि रोजा कब खोला जा सकता है। इसका किबला कंपास उपयोक्ता की स्थिति के अनुसार नमाज की दिशा की जानकारी देता है। प्रतिदिन रोज़े की शुरुआत और समापन (सहरी और इफ्तार) के लिए अलार्म लगाने की सुविधा भी इसमें दी गई है। इसके अलावा रमजान की तैयारी के लिए अपने स्वास्थ्य देखभाल से जूड़े प्रश्न पूछने की सुविधा भी इसमें मौजूद है।

ऐप के बारे में एमएसडी इंडिया के प्रबंध निदेशक केजी अनंतकृष्णन ने बताया कि रमजान में रोजे के दौरान एक महीने तक खाने के समय, भोजन, दवाइयों के उपयोग और दिनचर्या में होने वाले बदलावों से डायबिटीज पर प्रभाव पड़ सकता है। इस ऐप के उपयोग से कोई भी अपने ब्लड ग्लूकोज स्तर पर नजर रख सकता है और साथ ही साथ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकता है। रमजान के दौरान 5 करोड़ से अधिक डायबिटीज पीड़ित लोग रोजे रखते हैं और ग्लूकोज स्तर का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस ऐप की संस्तुति करते हुए डीएम, एंडोक्रायनोलॉजिस्ट डा. शहला शेख ने कहा कि रमजान के पवित्र माह के दौरान उपवास रखते हुए डायबिटीज रोगियों को विशेष सतर्कता और सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ब्लड शुगर स्तर पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसी स्थिति में एमएसडी का यह ऐप मार्गदर्शक का काम करता है।

Thursday, June 18, 2015

मुद्रा को हिट कराने के लिए वित्त मंत्रालय ने कसी कमर

छोटे कारोबारियोंऔर असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को बैंकों से सस्ते दर पर लोन दिलवाने की बहुप्रचारित मुद्रा योजना को हिट कराने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय सक्रिय हो गया है। इसके तहत असल लाभार्थी को कितना लोन मिलता है, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इसमें लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए बैंको को मंत्रालय से कुछ अलग ही निर्देश दिया गया है।

वित्त मंत्रालय के बैंकिंग डिवीजन के एक अधिकारी ने बताया कि सभी सरकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सरकारों के सहकारी बैंकों और अरबन कोऑपरेटिव बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्होंने 10 लाख रुपये तक के जो भी नॉन-फार्म (गैर कृषि) लोन दिए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा लोन के रूप में पारिभाषित करें। इस तरह के निर्देश देने के बाद ही बैंकिंग डिवीजन चुप नहीं बैठ गया बल्कि बीते 27 मई को सभी सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को बुला कर मुद्रा योजना की समीक्षा भी की गई।

इसके बाद इसी महीने 4 तारीख को पीएमएमवाई की समीक्षा के लिए एक बड़ी बैठक भी की गई। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय, विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग मंत्रालय के भी प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके तहत संख्या दिखाने की भी तैयारी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 के दौरान 27 सरकारी बैंकों द्वारा 10 लाख रुपये तक के दिए गए नॉन-फार्म लोन का आंकड़ा मंगा लिया गया है, जो कि 29.37 लाख खाते हैं। इन्हें अब मुद्रा खाता के रूप में प्रचारित किया जाएगा।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 8 अप्रैल को जबु मुद्रा योजना को शुरू किया था तब कहा था कि इस योजना में लघु, मंझोले एवं सूक्ष्म क्षेत्र के उद्योगपतियों से लेकर साइकिल ठीक करने वाले, पंचर लगाने वाले, पतंग बनाने वाले, मटकी बनाने वाले, चाय-पान बेचने वाले और पंसारी जैसे छोटे कारोबारियों को भी सस्ते ब्याज दरों पर लोन मिलेगा। हालांकि अभी मुद्रा बैंक की स्थापना नहीं हुई है लेकिन इसका कामकाज शुरू करने के लिए सिडबी की अनुषंगी इकाई के रूप में मुद्रा लिमिटेड की स्थापना हो गई है और नाबार्ड के सीजीएम जीजी मैमन को इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया गया है। शुरूआती कामकाज के लिए रिजर्व बैंक ने भी 5,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या अधिक से अधिक दिखाने का दवाब है तभी तो ऐसा किया जाएगा।

महज 10 सेकेंड में पर्सनल लोन देगा एचडीएफसी बैंक

एचडीएफसी बैंक ने 10 सेंकेंड में ग्राहकों को पर्सनल लोन देने की घोषणा की है। इसके तहत बैंक के वर्तमान ग्राहकों को एक पूर्व-स्वीकृत ऋण की राशि 24×7 उपलब्ध रहेगी। लोन देने की यह पूरी प्रक्रिया कागज रहित है और ग्राहक नेटबैंकिंग के जरिए अपने बैंक खाते में लॉग इन करके या मोबाइल बैंकिंग के जरिए केवल एक क्लिक से ऋण हासिल कर सकेंगे।

एचडीएफसी बैंक का दावा है कि वह पहला ऐसा संस्थान है, जिसने ऋण स्वीकृति और वितरण की पूरी प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया है। यह 10 सेकेंड  का लोन पूरी तरह झंझट-मुक्त एवं पारदर्शी है और इसमें लोन लेने वाला राशि जारी होने का इंतजार नहीं करेगा, खास कर चिकित्सा या अन्य तरह की आपात स्थितियों में जहां तुरंत नकदी की जरूरत होती है।

एचडीएफसी बैंक में अनसिक्योर्ड लोन, होम एवं मोर्गेज लोन विभाग के बिजनेस हेड अरविंद कपिल के मुताबिक यह किसी के वर्चुअल वैलेट में एक वास्तविक चेक होने के जैसा है और केवल एक क्लिक पर उपलब्ध सरल एवं तेज बैंकिंग समाधानों को उपलब्ध करा कर ग्राहकों को खुश करने के हमारे अभियान का हिस्सा है। यह 10 सेकेंड का लोन एचडीएफसी बैंक की डिजिटल बैंकिंग की पेशकश गो डिजिटल के तहत नई पहल है। गो डिजिटल अभियान पिछले साल वाराणसी में शुरू किया गया था, जो मोबाइल फोन को बिल्कुल एक बैंक शाखा में परिवर्तित कर देता है। उसके बाद से बैंक ने कई नई डिजिटल पहल  की शुरुआत की है।