Wednesday, April 22, 2015

आईसीआईसीआई का मनी ट्रांसफर के लिए करार

देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने खाड़ी देशों मे रह रहे अप्रवासी भारतीयों को पैसे भेजने की सेवा मुहैया कराने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अग्रणी बैंक से गठजोड़ किया है।

एमीरेट्स एनबीडी के साथ किए गए इस गठजोड़ से ग्राहक भारत में आईसीआईसीआई बैंक के खाताधारकों को डायरेक्टरेमिट सर्विस के जरिए एक मिनट में पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे।

दोनों बैंकों की ओर से इस संबंध मेंजारी किए गए संयुक्त बयान में कहा गया है कि ग्राहक यह सुविधा इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, और एमीरेट्स एनबीडी के एटीएम के जरिए हासिल कर सकते हैं।

आम के दाम 65 फीसदी तक चढ़ सकते हैं इस बार

खास लोग ही ले सकेंगे मजा
बीते महीनों के दौरान देश में  बे मौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के चलते आम के भाव इस बार काफी महंगे रहने की बात एसोचैम ने अपने एक अध्ययन में कही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल आम की साधारण व निचले दर्जे की किस्में जहां 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती हैं, वहीं मुंबई में अलफांसो (हापुस) आम के दाम 500 से 600 रुपये प्रति दर्जन तक रह सकते हैं। असमय हुई बारिश के चलते आम की करीब 50 फीसदी तक फसल खराब होने को इसकी वजह बताया गया है।

एसोचैम की एग्री रिसर्च विंग की ओर से मैंगो-एंग्जाइटी ऑन प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट फ्रंट शीर्षक से तैयार की गई रिपोर्ट मे कहा गया है कि आम के दाम अन्य फलों व सब्जियों की तुलना में 50 से 65 फीसदी अधिक बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बेमौसम हुई बारिश किसानों और ग्राहकों दोनों को ही नुकसान पहुंचाने वाली रही। इससे फसल को सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर प्रदेश की आम पट्टी में हुआ है। इसमें मलीहाबाद, शाहाबाद, अमरोहा, बुलंद शहर, हरदोई, उन्नाव, बाराबंकी और सहारनपुर जैसे इलाके आते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आम की खुदरा कीमतों में 50 से 65 फीसदी तक तक बढ़ोतरी का रुझान अभी से दिखाई देने लगा है। कीमतों में यह उछाल फलों की किस्मों पर निर्भर करता है। हालांकि आम की इस साल की फसल अभी बाजार में आना बाकी है, पर अनुमान जताया जा रहा है कि कुल मिलाकर आम की फसल को कम से कम 20 फीसदी का नुकसान तो हुआ ही है। उत्तर प्रदेश के कई आम उत्पादक इलाकों में तो यह नुकसान 50 फीसदी तक भी गया है।

उत्तर प्रदेश के यह इलाके देश के कुल आम उत्पादन का एक चौथाई तक उत्पन्न करते हैं। फसल को हुए नुकसान के चलते इस साल इन इलाकों का उत्पादन गिरकर 15 लाख टन पर आ जाने के आसार हैं। महाराष्ट्र और मध्य भारत के आम उत्पादक क्षेत्रों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है।

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि कई राज्यों की सरकारों ने फसल को हुए नुकसान के लिए राहत के उपायों और मुआवजे की घोषणा की है, पर यह किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए नाकाफी हैं। उनके मुताबिक देश में होने वाले आम में आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी की बैठती है। इसके अलावा कर्नाटक 10 फीसदी, बिहार 7.6 फीसदी उत्पादन करता है। गुजरात भी देश के पांच आम उत्पादक देशों में गिना जाता है।

सन फार्मा से बाहर हुई जापानी दवा कंपनी दायची

भारत में सफर का दि एंड
जापान की दवा कंपनी दायची सांक्यो सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज में अपनी समूची 9 फीसदी हिस्सेदारी बेच कर कंपनी से अलग हो गई है। दायची ने सन फार्मा में 21 करोड़ शेयर 20,420 करोड़ रुपये में बेचे हैं। यह हिस्सेदारी उसने रैनबक्सी का सन फार्मा में विलय के बाद हासिल की थी।  इस तरह से दायची सांक्यो ने भारत में अपने सात वर्ष के उथल-पुथल भरे सफर को खत्म कर दिया है।
इस बारे में दायची की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सन फार्मा के शेयरों की बिक्री पूरी हो गई है। शेयर बिक्री के तहत दायची ने सन फार्मा के 21,49,69,058 शेयर बेचे हैं। सुबह के कारोबारी सत्र में जब दायची ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषण की, उस समय उसके शेयर की औसत कीमत 950 रुपये थी। पिछले माह सन फार्मा ने अपने साथ रैनबक्सी का विलय पूरा करने की घोषणा की थी। कंपनी ने 4 अरब डॉलर मेें विलय के सौदे की घोषणा के एक वर्ष बाद विलय पूरा किया है। सौदे के तहत रैनबक्सी के शेयर धारकों को उनके एक शेयर के बदले सन फार्मा के 0.8 शेयर मिलने थे। विलय के समय रैनबैक्सी में दायची की 63.4 फीसदी हिस्सेदारी थी। रैनबक्सी के विलय के साथ सन फार्मा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी जेनरिक दवा कंपनी और घरेलू बाजार में शीर्ष कंपनी बन गई है।
रैनबक्सी की खरीदारी के बाद जापानी कंपनी को सात सालों में चुनौतियां ही चुनौतियां मिलती रहीं। उत्पादन प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना के मामले में रैनबक्सी लगातार अमेरिकी दवा नियामक की जांच के घेरे में रही। 2008 में अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने रैनबैक्सी के मध्य प्रदेश के देवास, पोंटा साहिब और हिमाचल प्रदेश के बाटामंडी स्थित संयंत्रों में उत्पादित 30 जेनेरिक दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया था।

Friday, April 17, 2015

भारतीय कंपनियों के सीईओ लें इस छोटी सी कंपनी के मुखिया से सीख

हमारे देश में कंपनियों के कर्ताधर्ता और टॉप मैनेजमेंट के लोग मुनाफे में कमी या कमजोर प्रदर्शन के नाम पर कर्मचारियों का ‌वेतन बढ़ाने में भले ही कंजूसी करें, पर अपनी तन्‍ख्वाह दिल खोलकर बढ़ा लेते हैं। ऐसे कॉरपोरेट्स के लिए अमेरिका की एक छोटी सी कंपनी ने एक मिसाल पेश की है।

अमेरिका की ग्रेविटी पेमेंट्स के संस्थापक और सीईओ डैन प्राइस ने अपने स्टाफ की सैलेरी दुगनी करने के लिए खुद की सैलेरी 90 फीसदी घटा दी। इस छोटी सी कपंनी में केवल 120 कर्मचारी काम करते हैं। सीईओ डैन प्राइस ने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए अपने वेतन के साथ ही कंपनी के मुनाफे में भी भारी कमी की।

उनकी कोशिश है कि अपने सभी कर्मचारियों को वह अगले तीन साल में 70 हजार डॉलर की सालाना सैलरी दे सकें। रुपये के हिसाब से देखें तो यह रकम 42 लाख रुपये के करीब बैठती है। बताया जाता है कि प्राइस ने एक स्टडी रिपोर्ट को पढ़ने के बाद यह अहम फैसला लिया।

प्राइस ने अपना वेतन 10 लाख डॉलर (6 करोड़ 20 लाख रुपये) को घटाकर 70 हजार डॉलर कर दिया और फर्म के 20 लाख डॉलर (लगभग 12 करोड़ 40 लाख रुपये) के मुनाफे में भी कटौती की। सीईओ के इस कदम से 30 कर्मचारियों का वेतन जहां दोगुना हो गया, वहीं 40 कर्मचारियों की तनख्वाह में भी काफी इजाफा हुआ। कंपनी ने बीते ही दिनों कंपनी की नई वेतन नीति का ऐलान किया। अपने वेतन में भारी बढ़ोतरी की यह घोषणा सुनकर कर्मचारियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

प्राइस खुद इस कंपनी के संस्‍थापक हैं लिहाजा कंपनी में सबसे ज्यादा शेयर उन्ही के हैं। उन्होंने हैपिनेस को लेकर जो रिपोर्ट पढ़ी थी, उसमें कहा गया था कि कंपनी की ओर से मिलने वाली आय से किसी कर्मचारी के भावनात्मक संतुष्टि का स्तर तब बढ़ जाता है, जब वह सालाना 75,000 डॉलर कमाने लगता है।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया हो रही है आसान

सरकार मोबाइन नंबर पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया को आसान करने जा रही है। यानी आप अगर अपनी मौजूदा टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी से खुश नहीं हैं, तो ज्यादा झंझट किए बिना आप अपने मौजूदा मोबाइल नंबर पर ही दूसरी कंपनी की सेवाएं हासिल कर सकेंगे। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इस बारे में सभी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश जारी किया है।

ट्राई ने अपने निर्देश में टेलीकॉम कंपनियों से कहा गया है कि वह मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) के लिए ग्राहक से सिर्फ घोषण पत्र लें। ट्राई ने यह निर्देश सभी सेलुलर मोबाइल टेलीफोन सर्विस लाइसेंसेज, यूनिफायड सर्विसेज लाइसेंसेज को जारी किया है।

आगामी तीन मई से मोबाइल उपभोक्ता नंबर पोर्टेबिलिटी के जरिए देश के किसी भी कोने में अपने पुराने मोबाइल फोन नंबर को जारी रख सकते हैं। अब तक यह सुविधा देश भर के लिए नहीं थी। ट्राई की तरफ से जारी निर्देश के मुताबिक मोबाइल उपभोक्ता को नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए टेलीकॉम कंपनियों को यह घोषणा पत्र देना होगा कि यह मोबाइल नंबर उनके नाम पर है।

इसके अतिरिक्त उन्हें टेलीकॉम कंपनियों को कोई दस्तावेज नहीं सौंपने होंगे। अगर टेलीकॉम कंपनियां यह पाती है कि वह नंबर उस उपभोक्ता के नाम पर नहीं है तो दिए गए नंबर को काट दिया जाएगा। पिछले साल जून में पूर्ण नंबर पोर्टेबिलिटी को लागू करने का फैसला किया गया था। अभी उपभोक्ता टेलीकॉम कंपनियों की समान सर्किल में ही जगह बदलने पर अपने नंबर को कायम रख सकता है। ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों से यह भी कहा है कि उनके निर्देश पर क्या अमल किया गया, यह भी जानकारी दी जाए।

टीसीएस ने कर्मचारियों को दिया 2,628 करोड़ रुपये का बोनस

देश की सबसे बड़ी साफ्टवेयर सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कर्मचारियों को 2,628 करोड़ रुपये का बोनस देने का ऐलान किया है। जनवरी-मार्च तिमाही में टीसीएस का शुद्ध लाभ 2,628 करोड़ रुपये रहा। नतीजों को देशते हुए कंपनी ने कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा की है। एकमुश्त कर्मचारी बोनस के समायोजन के बाद 27 प्रतिशत घटकर 3,858.2 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि टीसीएस अगस्त 2004 में हुई कंपनी की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश की 10वीं वषर्गांठ पर कर्मचारियों को विशेष प्रोत्साहन या एक बारगी बोनस प्रदान करेगी। टीसीएस ने कहा कि कंपनी के लिए इस विशेष प्रोत्साहन की लागत 2,628 करोड़ रुपये होगी।

वैश्विक स्तर पर जिन कर्मचारियों ने कंपनी में कम से कम एक साल काम किया है वे इस विशेष बोनस का भुगतान पाने योग्य होंगे। कंपनी के पास अक्तूबर से दिसंबर 2014 तिमाही में 3.18 लाख कर्मचारी थे। बयान में कहा गया कि हर कर्मचारी को टीसीएस में उसके सेवा काल के हर साल के एक सप्ताह के वेतन के बराबर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। टीसीएस शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने के बाद से कंपनी भारतीय शेयर बाजार में सबसे अधिक पूंजीकरण वाली कंपनी बन गई।

मिल सकती है किसी भी एटीएम से अपने खाते में जमा करने की सुविधा

अपने डेबिट कार्ड के जरिए किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा तो बरसों से लोगों को मिल रही है, पर आने वाले दिनों में ग्राहकों को किसी भी बैंक के एटीएम के जरिए अपने खाते में पैसे जमा कराने की सुविधा भी मिल सकती है। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक देश की सभी कैश डिपॉजिट मशीनों को नेशनल फाइनेंशियल स्विच (एनएफएस) से जोड़ने पर विचार कर रहा है।

आरबीआई द्वारा ऐसा किए जाने पर सारी कैश डिपाजिट मशीनें एक दूसरे से जुड़ जाएंगी। फलस्वरूप ग्राहक किसी भी डिपॉजिट मशीन से अपने किसी भी बैंक खाते में पैसे जमा कर सकेगा। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एचआर खान हाल ही में बताया कि एटीएम पहले से एनएफएस का हिस्सा हैं और अब नेशनल पेमेंट कारपोरेशन (एनपीसीआई) से सभी नकद जमा करने वाली मशीनों को एनएफएस से जोडने का प्रस्ताव है। इससे बैंक ग्राहकों को किसी भी बैंक की मशीन से अपने खातों में पैसा डालने की सुविधा मिलेगी।

खान ने कहा कि इसके अलावा दिन प्रतिदिन के लेनदेन के लिए वैकल्पिक बैंकिंग चैनलों को प्रोत्साहन देने का विचार है। एटीएम इंटरचेंज शुल्क के बारे में पूछे जाने पर खान ने कहा कि बैंकों के स्तर पर इस मामले में विचार हुआ और रिजर्व बैंक ने उन्हें खुद फैसला करने की अनुमति दे दी।