Thursday, April 23, 2015

टाटा मोटर्स पेश करेगी नैनो का ऑटोमेटिक वर्जन

टाटा मोटर्स ने नैनो के सभी मौजूदा ग्राहकों के लिए एक एक्सक्लूसिव कैंपेनशुरू करने की घोषणा की। इस प्रोग्राम के साथ नैनो के ग्राहकों को मौका सबसे पहले नई जेनएक्स नैनो ईजी शिफ्ट (ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन) खरीदने का। नैनो का यह नया संस्करण अगली पीढ़ी के लिए ढेर सारे रोमांचक फीचरों के साथ आ रहा है।

इसके जरिए नैनो के मालिकों को उनकी पुरानी नैनो के लिए बाज़ार में सबसे बेहतर कीमत दी जाएगी और उन्हें पुरानी कार की कीमत के अतिरिक्त 20,000 रुपये का विशेष बोनस भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त नैनो के ग्राहक रेफरल प्रोग्राम में भी शामिल हो सकते हैं, जिसके तहत उन्हें प्रत्येक रेफरल के लिए 5,000 रुपये मिलेंगे। ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए टाटा मोटर्स ने तरज़ीही वित्तीय पार्टनरों के साथ करार किया है।

टाटा मोटर्स के अध्यक्ष, यात्री वाहन कारोबार इकाई मयंक पारीक ने कहा कि हॉरिजनेक्स्ट यात्रा के हिस्से के तहत अब हम नवीनतम तकनीकी एडवांस्मेंट के साथ जेनएक्स नैनो लेकर आ रहे हैं। यह ग्राहकों को श्रेणी में सबसे बेहतरीन तकनीक और डिजाइन इंजीनियरिंग के साथ शानदार फीचर वाले उत्पाद पेश करने की हमारी निरंतर कोशिश का ही नतीजा है। पेश करने के समय ही नैनो एक ऐतिहासिक, उत्पाद रहा है, जो इस श्रेणी में सबसे बेहतरीन वैल्यू देती है और लॉन्च के समय से अभी तक 2.5 लाख से अधिक नैनो बिक चुकी हैं। यह यात्री वाहन बाज़ार में शीर्ष 5 मॉडलों में से एक है।

झटके झेलने में सक्षम हैं भारत सहित एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्थाएं

भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं बाहरी झटकों को सहने के लिए तो पर्याप्त सक्षम हैं, पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने पर इन्हें झटका लग सकता है। यह बात ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है।

मूडीज की सहायक इकाई मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सभी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती उस वक्त खड़ी होगी, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरें बढ़ाना शुरू करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एशिया-प्रशांत के देशों में आमतौर पर वाह्य भुगतान स्थिति अच्छी है और सरकारी ऋण की स्थिति भी दुनिया के अन्य क्षेत्रों के देशों के मुकाबले बेहतर है। एजेंसी ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में वाह्य झटकों से बचने की क्षमता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन उनकी रेटिंग के परिदृश्य अलग-अलग हैं, क्योंकि उनमें से कुछ अर्थव्यवस्थाएं महत्वाकांक्षी सुधार की ओर बढ़ रही हैं।

उधर कई अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों से जूझ रही हैं। इन देशों की साख की गुणवत्ता सबसे प्रमुख रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार नीतिगत प्रतिबद्धताओं पर खरी उतरती है या नहीं। एजेंसी ने कहा कि एशिया प्रशांत के ज्यादातर देश पेट्रोलियम आयातक हैं और हाल में कच्चे तेल में हालिया नरमी को इस क्षेत्र में सकारात्मक असर होगा।

अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जून या सितंबर तक ब्याज दरें बढ़ाएगा। फेड के इस कदम से भारत समेत कई उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी होने की आशंका है। मूडीज ने भारत को सकारात्मक परिदृश्य के साथ बीएए-3 की रेटिंग दे रखी है।

मूडीज ने कहा कि ऊर्जा लागत में बचत से विभिन्न देशों को अपने बजट घाटे पर नियंत्रण और राजकोषीय बफर तैयार करने में मदद मिलेगी। चीन के संबंध में एजेंसी ने कहा कि घटती विकास दर और ग्लोबल अर्थव्यवस्था में नरमी आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी। मूडीज ने कहा कि इस क्षेत्र के जिंस निर्यातक चीन की आर्थिक वृद्धि में नरमी के नए सामान्य स्तर को सबसे अधिक प्रभावित कर सकते हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) ने हाल ही में अनुमान जताया है कि भारत 2015-16 में 7.5 फीसदी की वृद्धि दर के साथ चीन को पीछे छोड देगा। ऐसा सरकार के नीतिगत कदमों, निवेश में बढ़ोतरी और तेल की कीमतों में नरमी के चलते संभव हो पाएगा। इस क्षेत्र की कई अर्थव्यवस्थाओं में पारिवारिक कर्ज का स्तर ऊंचा रहेगा, लेकिन यह वित्तीय व्यवस्था की स्थिरता के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।

एजेंसी ने कहा हालांकि ऐसे कर्ज से निजी खपत में वृद्धि कम होगी, जिससे आर्थिक विस्तार सीमित हो सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के जिन देशों को मूडीज रेटिंग प्रदान करती है उनमें भारत (बीएए-3), कोरिया (एए-3), मलेशिया (ए-3), और पाकिस्तान (सीएए-1) को सकारात्मक रेटिंग परिदृश्य प्रदान किया है, जबकि मंगोलिया (बी-2) का परिदृश्य नकारात्मक है।

Wednesday, April 22, 2015

फायदे का फंडा


कंपनियों की लेट-लतीफी का फायदा उठा रहे साइबर हमलावर

कंप्यूटर और साइबर दुनिया में आज सवाल यह नहींहै कि आप पर साइबर हमला किया जाएगा, बल्कि सवाल है कि हमला कब होगा। साइबर और डेटा सिक्योरिटी के कारोबार से जुड़ी अमेरिकी कंपनी सिमैंटेक ने इंटरनेट सिक्युरिटी थ्रेट रिपोर्ट जारी कर साइबर हमलावरों के तरीकों में हुए बदलावों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावर कंपनियों के नेटवर्क में किस तरह से घुसपैठ कर अपने इरादों को अंजाम देकर चतुराई से बच निकलते हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले साइबर हमलों में तेजी देखने को मिली है। वित्तीय सेवाओं में 17.1 फीसदी परिवहन एवं संचार में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा परिवहन, संचार, विद्युत एवं गैस उद्योग ने साइबर हमलों में पांच गुनी वृद्धि दर्ज की।  बीते वर्ष कुल 24 जीरो-डे वलनरेबिलिटी देखी गई। कंपनियों के नेटवर्क को चकता देने और फिशिंग की घटनाओं में वर्ष 2014 में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पिछले वर्ष किए गए हमलों को देखने से पता चलता है कि साइबर हमलावरों की कुशलता बढ़ गई है।  इसके तहत उन्होंने अपने लक्ष्यों तक सफलता पूर्वक पहुंचने में 20 फीसदी कम ई-मेल  का इस्तेमाल किया। हमलावरों ने मैलवेयर डाउनलोड्स और अन्य वेब आधारित तकनीकी कुचक्रों के जरिए ज्यादा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक साइबर क्षेत्र में सुरक्षात्मक कमजोरी और दुर्बलता को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए इस वर्ष काफी सुधार हुआ है। सिमैंटेक की रिसर्च ने खुलासा किया है कि सॉफ्टवेयर कंपनियों को सुरक्षा कवच बनाने और उसे चालू करने में औसतन 59 दिन लगते हैं, जोकि वर्ष 2013 की अपेक्षा केवल चार दिन का सुधार है। साइबर हमलावर इस देरी का लाभ उठा लेते हैं। हार्टब्लीड के मामले में साइबर हमलावरों ने इस कमजोरी का लाभ उठाते हुए चार घंटे के अंदर ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे दिया।

सिमैंटेक के टेक्नोलॉजी सेल्स निदेशक तरुण कौरा के मुताबिक जब चाबियां आसानी से उपलब्ध हैं, तो साइबर हमलावरों को किसी कंपनी के नेटवर्क के दरवाजे को तोड़ कर घुसने की जरूरत नहीं। हमलावर बेहद चतुराई से घुसपैठ बना कर वहां के कॉमन प्रोग्राम्स के सॉफ्टवेयर अपडेट्स को कमजोर बना देते हैं तथा उन्हें डाउनलोड करने के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करते हैं। इस प्रकार साइबर हमलावरों को कॉरपोरेट नेटवर्क में बिना किसी रोक-टोक के ऐक्सेस करने का मौका मिल जाता है।

मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ आरबीआई अधिकारियों ने खोला मोर्चा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पर कतरने और सारे वित्तीय अधिकार वित्त मंत्री के हाथों में देने की कवायद में जुटी मोदी सरकार के खिलाफ आरबीअधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है।

आरबीआई के अधिकारियों के एक समूह ने की शक्तियां घटाए जाने की आशंका जताते हुए सांसदों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखा है। पत्र में अधिकारियों ने वित्त विधेयक में शामिल बजट प्रस्तावों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही इनसे राज्य सरकारों के हितों पर बुरा असर पड़ने और देश के संघीय ढांचे पर भी बुरा असर पड़ने की बात कही है।

मोदी सरकार की कारगुजारी के खिलाफ यह पत्र अधिकारियों के एक फोरम यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्प्लॉइज ने लिखा है। फोरम ने अपने पत्र में कहा है कि वित्त विधेयक कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनके काफी दूरगामी परिणाम होंगे और अगर इन्हें लागू कर दिया गया तो देश के केंद्रीय बैंक के रूप में आरबीआई के कामकाज और शक्तियों पर काफी बुरा असर पड़ेगा। 

पत्र में कहा गया है कि विधेयक के प्रावधान आरबीआई के अधिकारों में भी कटौती करने वाले हैं। यह प्रावधान मौद्रिक नीति के मामले में रिजर्व बैंक के दायित्वों और अधिकारों को निरर्थक करने वाले हैं। इसके अलावा वित्तीय स्थिरता और महंगाई को नियंत्रित करने के मामले में भी इन प्रावधानों के चलते रिजर्व बैंक का काम प्रभावित होगा।

पत्र के मुताबिक बिल के कुछ प्रस्तावों में जहां 1934 के आरबीआई एक्ट में बदलाव की बात है, वहीं इससे 2006 का सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 1956 का सिक्यूरिटीज कांट्रेक्ट (रेग्यूलेशन) एक्ट और फेमा एक्ट भी भंग होता है। पत्र में फोरम ने सांसदों से इस मामले को सरकार के सामने उठाने की अपील की है। अधिकारियों ने राष्ट्रहित में ऐसा करने की गुहार लगाई है।

पत्र में कहा गया है कि सरकारी ऋणों के प्रबंधन का काम रिजर्व बैंक से छीना जाना जहां राज्यों के हितों के खिलाफ होगा, वहीं यह देश के संघीय ढांचे को भी प्रभावित करेगा। राज्यों के मुख्य मंत्रियों को लिखे गए पत्र में फोरम ने उन्हें इसके प्रति आगाह किया है।

पेट्रोलियम नीति में और पारदर्शिता लाएगी सरकार

मोदी सरकार पेट्रोलियम और गैस क्षेत्र की नीतियों में और पारदर्शिता लाएगी। यह भरोसा केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने दिलाया है। प्रधान ने कहा कि इस क्षेत्र की नीतियां स्थिर एवं पारदर्शी होंगी और इस क्षेत्र में काम करने वालों को विश्वस्तरीय माहौल उपलब्ध कराया जाएगा।

उद्योग संगठन फिक्की द्वारा हाइड्रोकार्बन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने कहा कि अधिकतर कारोबारी वहां काम करना पसंद करते हैं, जहां नीतियों में स्थिरता हो और सरकार पारदर्शी तरीके से काम करती हो। ऐसा ही माहौल भारत में भी मिलेगा। वह सिर्फ पेट्रोलियम मंत्रालय की ही बात नहीं कर रहे हैं बल्कि केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालय इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। वे इस तरह से काम करेंगे कि उद्योग जगत को कोई परेशानी नहीं हो।

इसी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव सौरभ चंद्रा ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के 69 छोटे एवं सीमांत तेल ब्लॉकों को नीलाम करने की तैयारी चल रही है।

इससे ओएनजीसी और ओआईएल भी खुश हैं क्योंकि वे इन ब्लॉकों पर काम नहीं कर पा रहे थे। इन ब्लॉकों को नीलामी में शामिल करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक केबिनेट नोट तैयार कर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए ) के पास भेज दिया है।

उन्होंने बताया कि देश में ही कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में तय किया गया है कि देश में कच्चे तेल की होने वाली कुल खपत में पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्ेसदारी बढ़ा कर 10 फीसदी की जाएगी। वहां ज्यादा उत्पादन हो, इसके लिए सरकार अन्वेषण (ई एंड पी) पर ज्यादा ध्यान दे रही है और वहां इसके लिए आवंटन दूना कर दिया गया है।

पेट्रोलियम सचिव ने बताया कि वर्ष 2014-15 की अंतिम तिमाही के दौरान ओएनजीसी और आयल इंडिया लिमिटेड को रसोई गैस के सिलेंडरों पर दी जा रही सब्सिडी में एक भी रुपये की भागीदारी नहीं करनी होगी। इस मद में जो राशि बचेगी, उसका उपयोग तेल कुओं की खोज और उत्पादन बढ़ाने में हो सकेगा।

विप्रो का मुनाफा बढ़ा, एचसीएल टेक का मार्जिन गिरा

सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो ने वित्तवर्ष की चौथी तिमाही में मुनाफे में 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,286.5 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी के पुत्र रिशद प्रेमजी को कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल किया है। 31 मार्च 2014 को समाप्त तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,239.1 करोड़ रुपये था। आलोच्य अवधि में कंपनी के कारोबार में 3.9 फीसदी की बढ़ोतरी रही और यह आंकड़ा 11,703 करोड़ रुपये की तुलना में 12,171.4 करोड़ रहा।

कंपनी के आईटी सर्विस कारोबार में 6 फीसदी की बढ़ोतरी रही। पूरे साल में कंपनी का शुद्ध लाभ 11.03 फीसदी बढ़कर 8,705.9 करोड़ रुपये रहा जबकि कंपनी के कारोबार में 8.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 47,318 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

दूसरी ओर एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने तीसरी तिमाही के समेकित शुद्ध मुनाफे में 3.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है और कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा 1,683 करोड़ रुपये हो गया है। मुद्रा विनिमय की दरों में उतार चढ़ाव के कारण कंपनी का मार्जिन प्रभावित हुआ है।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 1,624 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया था। कंपनी का समेकित राजस्व 11 फीसदी बढ़ कर 9,267 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 8,349 करोड़ रुपये था। कंपनी के नतीजे सामने आने के बाद उसके शेयर की कीमतों में 10 फीसदी तक गिरावट आई।

एचसीएल की आय बाजार की उम्मीदों से कम रही है। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रेसीडेंट और सीईओ अनंत गुप्ता ने कहा कि एचसीएल सभी भौगोलिक क्षेत्रों और वर्टिकल्स में ग्रोथ जारी रखेगी। इस तिमाही में हमारा राजस्व 14.4 फीसदी बढ़ा है। हमने 1 अरब डॉलर से अधिक के सौदों की बुकिंग की है।