Saturday, June 25, 2016

तो इस लिए ईयू से निकल लिया ब्रिटेन



ब्रिटेन आखिरकार कई साल पुरानी यूरोपियन यूनियन अलग हो गया। ऐसे जहन में यह सवाल सहज ही उठता है कि वह आखिर उस संगठन से अलग क्‍यों हो गया, जिसके संस्‍थापकों में  वह खुद शामिल था।

दरअसल ब्रिटेन की जनता के इस फैसले की कई वजहें हैं माना जाता रहा है कि ईयू के नियमों की वजह से ब्रिटेन कई मामलों में पीछे रह गया था। ईयू ने व्यापार से जुड़े कई सख्त नियम खड़े कर दिए थे और कई करोड़ पाउंड की सालाना सदस्यता फीस देने के बदले ब्रिटेन को कुछ ख़ास हासिल नहीं हो रहा था।

ब्रिटेन के लिए ईयू छोड़ने की एक वजह यह भी थी कि वह अपनी सीमाओं पर पूरी तरह अपना अधिकार चाहता था। साथ ही वह अपने देश में बाहर से आकर काम करने वाले लोगों की संख्या भी कम करना चाहता था। 

ईयू के तहत सदस्य-देशों की जनता के एक से दूसरे देश में आने जाने पर कोई रोक नहीं लगा सकता। फैसले से लगता है कि ब्रिटेन की जनता इस विचार से बहुत खुश नहीं है और वह चाहती है कि जीवन-यापन के लिए बाहर से आए लोगों की संख्या कम से कम हो सके।



पूरी खबर पढ़ें http://biznessdunia.com/?p=624

ब्रेक्जिट ने सेंसेक्‍स, निफ्टी को दिया करारा झटका, रुपया भी चित



ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) के पक्ष में मतदान होने की खबर ने भारतीय शेयर बाजार को तगड़ा झटका दिया है। शुक्रवार (24 जून) को कारोबार शुरू होने के साथ ही ब्रेक्जिट का भूत बाजार पर हव्‍वे की तरह टूट पड़ा। शुरुआती सत्र में बीएसई व एनएसई दोनों ही इससे चारों खाने चित होते दिखे। बीएसई का सेंसेक्‍स शुरुआती कारोबार के दौरान 27,000 के स्‍तर के पास आ गया और एनएसई का निफ्टी गोता लगा कर 8,000 के स्तर से नीचे लुढ़क गया। सेंसेक्स 948.54 अंक या 3.51 फीसदी लुढ़क कर 26,053.68 पर आ गया। इसी तरह निफ्टी भी 294.15 अंक या 3.55 प्रतिशत गिरकर 7,976.30 पर चल रहा था। सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों में से शेयरों में 9.71 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है।
कारोबारियों का कहना है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की खबर से बाजार में घबराहट का माहौल है। कारोबारियों को इससे यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ने के चलते भारतीय कारोबार प्रभावित होने की आशंका सता रही है। इसी के चलते बाजार में इतनी तगड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। शेयर बाजार के साथ ही मुद्रा बाजार में भी ब्रेक्जिट का असर देखने को मिला। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया भी शुरुआती कारोबार में 96 पैसे की भारी भरकम गिरावट का शिकार होकर 68.21 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।  उधर ब्रिटिश पाउंड 31 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है 
गौरतलब है‍ कि यूरोपियन यूनियन से अलग होने के मुद्दे पर ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह में अधिकांश लोगों ने ईयू से बाहर होने यानी ब्रेग्जिट के पक्ष में वोट दिया है। वोटिंग खत्म होने के बाद शुक्रवार को शुरू हुई वोटों की गिनती में 51.9 फीसदी (17,410,742) लोगों ने ब्रेक्जिट के समर्थन में वोट दिया है। दूसरी ओर 'रीमेन' यानी यूरोपीय संघ का हिस्सा बने रहने के पक्ष में 48.1 फीसदी (16, 141, 241) वोट ही पड़े। नतीजों से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की कुर्सी खतरे में पड़ने की अटकलें भी शुरू हो गईं। हालांकि ब्रिटिश विदेश मंत्री ने खंडन किया और कहा कि कैमरन प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

Friday, July 3, 2015

सीसीआई ने 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ खारिज की शिकायत

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टाटा मोटर्स,  महिंद्रा और फोर्ड सहित 18 ऑटो कंपनियों के खिलाफ अनुचित कारोबारी तौर-तरीकों को लेकर की गई शिकायत को खारिज कर दिया है।

यह आरोप लगाया गया है कि ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स और अधिकृत डीलरों के बीच डीलरशिप समझौता पूरी तरह से एक तरफा और ऑटो कंपनियों के पक्ष में है। यह शिकायत महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, होंड सिएल कार्स इंडिया, फॉक्सवैगन इंडिया, जनरल मोटर्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, फोर्ड इंडिया, रेनो इंडिया और ह्यूडई मोटर इंडिया के खिलाफ दर्ज कराई गई है।

इसके अलावा अशोक लेलैंड, पियाजिओ व्हीकल, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा टू व्हीलर, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया और टीवीएस मोटर कंपनी भी उन कंपनियों मेें शामिल है जिनके खिलाफ शिकायत की गई है। सीसीआई ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के मानकों के उल्लंघन का पृथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है।

Wednesday, June 24, 2015

बेहतर उच्च शिक्षा के लिए हर साल 6.8 लाख छात्र जा रहे विदेश

अच्छी उच्च शिक्षा की सुविधाओं वाले संस्थानों की कमी और अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते हर साल 6.8 लाख छात्र विदेशी शिक्षा संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। यह बात उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है।

एसोचैम की ओर से ‘स्किलिंग इंडिया : एंपावरिंग इडियन यूथ थ्रू वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि  छात्रों के विदेश जाने के चलते आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू उच्च संस्थानों को सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये की रकम से हाथ धोना पड़ रहा है। यह वह राशि है, जो विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्र वहां के संस्थानों को देते हैं।

बेहतर भविष्य और सुनहरे कैरियर की संभावनाओं को देखते हुए हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र सिंगापुर, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, स्वीडेन, आयरलैंड, नार्वे और कनाडा की ओर रुख कर रहे हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह नई जगहों पर जाने में भी नहीं हिचक रहे हैं और ऐसा करने वाले छात्रों की तादात में इस साल 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल अमीर घरों के बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। आजकल मध्य वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने में पीछे नहीं हैं। इसके लिए वह अपनी जीवन भर की बचत की राशि भी खर्च कर दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में देश से 2.9 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए। इस साल यह संख्या बढ़कर 6.8 लाख तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी वजह विदेशी संस्थानों में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होना और कैरियर में बेहतर संभावनाओं के द्वार खुलना है। इसके अलावा विदेशी जीवन शैली से प्रभावित होकर भी छात्र इन देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
एसोचैम के महा सचिव डीएस रावत का कहना है कि देश में अच्छी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान बहुत कम हैं। ऐसे में इन संस्थानों में दाखिला पाने के प्रतिस्पर्धा लगातार कठिन होती जा रही है। साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा यह कंपटीशन भी छात्रों का पढ़ाई के लिए विदेश जाने की एक अहम वजह बन रहा है।

मोबाइल फोन कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

माइक्रोमैक्स ने इक्सिगो में किया निवेश

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड ने एक कनेक्टेड मोबाइल सर्विस इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को मोबाइल ट्रैवेल सर्च और बाजार इक्सिगो में निवेश की घोषणा की। इक्सिगो एप्लीकेशन भारतीय पर्यटकों को यात्रा की योजना तैयार करने में, सबसे अच्छी बस सेवा हासिल करने, सबसे सस्ती उड़ानें, कैब, होटल और भी बहुत कुछ पाने में मदद करता है।

अपने सस्ते और अनोखे उत्पादों से ग्राहकों को लुभाकर तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध करा चुके माइक्रोमैक्स के इस निवेश के बाद के एप्लीकेशन सेवाओं के क्षेत्र में कदम रखने का रास्ता साफ  हो जाएगा। इस निवेश की मदद से इक्सिगो को 18 महीने के भीतर 3 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

इस निवेश के बारे में माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि हमारा लक्ष्य अनोखी और नई सेवाओं को स्मार्ट डिवाइसों से जोड़कर इकोसिस्टम तैयार करना है। हम उनके साथ मिलकर माइक्रोमैक्स के ग्राहकों के लिए मांग के मुताबिक वन-क्लिक यात्रा का अनुभव मुहैया कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। माइक्रोमैक्स ने पिछले महीने ही यह घोषणा की थी कि वह आने वाले साल में 20 से भी अधिक स्टार्ट-अप में 5 लाख से 2 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी।

Tuesday, June 23, 2015

फेडरल बैंक ने लांच किया नया मोबाइल ऐप


फेडरल बैंक ने अपने मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन फेड मोबाइल का नया संस्करण लांच किया है। नए वर्जन में मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें ग्राहकों को कुछ नई सहूलियतें भी दी गई हैं।

नए ऐप को तेजी से लोकप्रिय बनाने के लिए बैंक ने ग्राहकों को इससे किए जाने वाले 100 रुपये या उससे अधिक के पहले ट्रांजेक्शन पर 50 रुपये का कैशबैक देने की भी घोषणा की है। यह ऑफर 31 जुलाई तक चलेगा। ऐप को बैंक की ई पासबुक सुविधा फेडबुक के साथ भी जोड़ा गया है, जिससे ग्राहक अब मोबाइल के जरिए ही अपनी पासबुक देख सकेंगे।

ब्याज दर में कटौती से कारोबारी धारणा हुई मजबूत

 सूचीबद्ध कंपनियों के उत्पादन के स्तर, घरेलू और निर्यात ऑर्डर में इस महीने बड़े पैमाने पर सुधार दर्ज किया गया है। ड्यूटसे बोर्से का एमएनआई इंडिया बिजनेस सेंटीमेंट इंडीकेटर मई के 62.3 से 7.7 फीसदी तक बढ़ कर जून में 67.1 पर आ गया है। सर्वे में कहा गया है कि जून के कारोबारी सर्वे एक संकेत मिलता है कि कुल मिला कर धारणा में गिरावट अपने निचने स्तर से बाहर निकल चुकी है।

एमएनआई इंडीकेटर्स के चीफ इकनॉमिस्ट फिलिप उगलो ने कहा कि एक माह के आंकड़ो में बहुत कुछ निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं होगी लेकिन जून के सर्वे की चमक यह शुरुआती संकेत मुहैया कराती है कि धारणा में गिरावट का ट्रेड अब पूरा हो चुका है। पिछले वर्ष सितंबर में धारणा में गिरावट अपने चरम पर थी।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि जून में ब्याज दरों में कटौती ने कारोबारी विश्वास बढ़ाने में योगदान दिया है। इसके अलावा रुपये की कीमत में गिरावट ने निर्यात आर्डर के मोर्चे पर मदद की है। उगलो ने कहा कि रुपये की कीमत में गिरावट से निर्यातकों को फायदा हुआ है और श्रमिकों की मांग वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। 2 जून को रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती की थी। आरबीआई ने इस वर्ष तीसरी बार दरों में कटौती है। आरबीआई ने निवेश और ग्रोथ में तेजी लाने के लिए यह कदम उठाया था। साथ ही बैंक ने यह संकेत भी दिया था निकट भविष्य में अब और कटौती नहीं होगी।